वसिष्ठ-कुल के गण और प्रवर

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में वसिष्ठ ऋषि-कुल के 5 गण हैं (गण 63–67)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

संक्षेप में

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में वसिष्ठ ऋषि-कुल के 5 गण हैं (गण 63–67)। हर गण का अपना प्रवर है, और कई गणों में अलग-अलग सूत्र प्रवर के अलग रूप बताते हैं। नीचे हर गण का प्रवर, ग्रंथ के अनुसार, दिया गया है।

एक नज़र में

गण 63 — वासिष्ठाःवासिष्ठ · 160 नाम
गण 64 — उपमन्यवःवासिष्ठ, आभरद्वसव्य, ऐन्द्रप्रमद · 146 नाम
गण 65 — पराशराःवासिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर्य · 120 नाम
गण 66 — कुण्डिनाःवासिष्ठ, मैत्रावरुण, कौण्डिन्य · 68 नाम
गण 67 — जातूकर्ण्याःवासिष्ठ, आत्रेय, जातूकर्ण्य · 9 नाम

गण 63 — वासिष्ठाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ1आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
वासिष्ठ · ऐन्द्रप्रमद · आभरद्वसव्य3आपस्तम्बविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 200 — “Vasishtha — ekarsheya”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 160 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · वशिष्ठ गोत्र · जातूकर्ण्य गोत्र · आलम्भायन गोत्र

गण 64 — उपमन्यवः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ · आभरद्वसव्य · ऐन्द्रप्रमद3आश्वलायन, कात्यायनतालिका का मुख्य
वासिष्ठ · ऐन्द्रप्रमद · आभरद्वसव्य3बौधायन, मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 200 — “Bharadvasu, Vasishtha, Indrapramada”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 146 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · उपमन्यु गोत्र

गण 65 — पराशराः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ · शाक्त्य · पाराशर्य3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

इस गण में ग्रंथ ने 120 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · शाक्त्य गोत्र · पराशर गोत्र

गण 66 — कुण्डिनाः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ · मैत्रावरुण · कौण्डिन्य3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 200 — “Vasishtha, Mitravaruna, Kundina”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 68 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · वशिष्ठ गोत्र · कौण्डिन्य गोत्र · जातूकर्ण्य गोत्र

गण 67 — जातूकर्ण्याः

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ · आत्रेय · जातूकर्ण्य3मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 200 — “Jatukarnya, Vasishtha, Atri”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में ग्रंथ ने 9 नाम दर्ज किए हैं। पूरी सूची देखें · जातूकर्ण्य गोत्र

वसिष्ठ-कुल के गोत्र-पृष्ठ

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 272–282 (archive.org leaf 312–322)। मत्स्य पुराण से मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (1917).