शाक्त्य गोत्र

शाक्त्य कोई अलग गण नहीं — वह पराशर गण के प्रवर "वासिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर्य" का दूसरा ऋषि है। मत्स्य पुराण के अनुसार शक्ति वसिष्ठ के पुत्र और पराशर के पिता थे। स्रोत सहित।

संक्षेप में

गोत्र-प्रवर ग्रंथों में "शाक्त्य" किसी गण की सूची का नाम नहीं, बल्कि पराशर गण के प्रवर का दूसरा ऋषि है — वासिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर्य। मत्स्य पुराण (अध्याय 201) के अनुसार शक्ति महर्षि वसिष्ठ और अरुन्धती के पुत्र थे, और पराशर के पिता। इसलिए शाक्त्य परिवार का प्रवर पराशर गण वाला माना जाएगा।

मुख्य जानकारी

गोत्रशाक्त्य (Shaktya)
अन्य नाम / वर्तनीशक्ति, शाक्त्य, Shakti, Shaktya
ऋषि-कुलवसिष्ठ
गोत्रकार ऋषिमहर्षि वसिष्ठ
ऋषि-पृष्ठमहर्षि पराशर, महर्षि शक्ति
गणगण 65 — पराशराः
मुख्य प्रवरवासिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर्य (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)

शाक्त्य — परिचय

पराशर गण का प्रवर सभी सूत्रों और मत्स्य पुराण में एक ही है: वासिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर्य। यानी तीन पीढ़ियाँ — वसिष्ठ, उनके पुत्र शक्ति, और शक्ति के पुत्र पराशर।

आश्वलायन संकृति गण के लिए एक विकल्प "शाक्त्य, गौरुवीत, साङ्कृत्य" भी देते हैं — वहाँ भी शाक्त्य नाम प्रवर-ऋषि के रूप में आता है।

प्रवर — गण 65 (पराशराः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ · शाक्त्य · पाराशर्य3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (120)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। शाक्त्य गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अकयःका
  2. 2आविष्ठायनःम
  3. 3आविष्ठायनाःका
  4. 4इषीकहस्तःका, म
  5. 5औपयाःका, म
  6. 6औषयःका, म
  7. 7कण्डूःबो
  8. 8कण्डूशयःका
  9. 9कपिग्रीवाःका
  10. 10कपिमुखाःबो, म
  11. 11कपिश्रेष्ठाःबो, म
  12. 12काकेयस्थाःबो, म
  13. 13काक्रयःबो
  14. 14काण्डर्षयःम
  15. 15कात्कयःबो
  16. 16कापिमुखाः ?बो
  17. 17कार्केयस्याःम
  18. 18कार्ष्णायनाःम
  19. 19काह्वायनाःबो
  20. 20कुहुशयःबो
  21. 21कृष्णाजिनाःबो, का
  22. 22कृष्णायनयःबो
  23. 23कोर्कचादयःका
  24. 24कौकुशादयःबो
  25. 25कौतुजातयःम
  26. 26कौमुदयःबो
  27. 27कौमुनानयःबो
  28. 28काह्वायनाःबो
  29. 29क्रैमतिःबो
  30. 30क्रोधनायनाःम
  31. 31क्रौकुलयःबो
  32. 32क्रौकुशादयःबो
  33. 33क्रौञ्चकाबकाःम
  34. 34क्रौमतिःबो
  35. 35क्षौमिःम
  36. 36क्षौमिःम
  37. 37खल्वायनयःबो
  38. 38खल्वायनाःम
  39. 39ख्यातेयाःम
  40. 40गार्ग्यायनयःबो
  41. 41गोपयःबो
  42. 42गोपवनःबो
  43. 43गोपवयःबो
  44. 44गोपाणिःका
  45. 45गोपालिःबो, म
  46. 46गोवालिःबो
  47. 47जपातयःम
  48. 48जेमयःका
  49. 49जैह्मपःम
  50. 50तन्तिःम
  51. 51तरणिःका
  52. 52तुल्यायनयःबो
  53. 53तैलेयाःम
  54. 54नयातयाःम
  55. 55पठिकाःम
  56. 56पराशराःआश्व, आप
  57. 57पाटिकःम
  58. 58पारोहयःबो
  59. 59पार्येयाःम
  60. 60पुष्करःम
  61. 61पौष्करसादिःबो, का
  62. 62प्रपोहयाःम
  63. 63प्रागेहयाःम
  64. 64प्रायःका
  65. 65प्रारोहयःका
  66. 66प्लाक्षयःबो
  67. 67बादरिःबो, म
  68. 68बाह्यतयाःबो, म
  69. 69बैल्वयूपयःका
  70. 70भालिःम
  71. 71भालुक्याःबो
  72. 72भैमतायनःबो
  73. 73भैमयनाःका
  74. 74भौमतापनःम
  75. 75यूथपाःम
  76. 76वाजयःबो
  77. 77वाजरिःबो
  78. 78वाजातयःबो
  79. 79वाजिमतयःबो
  80. 80वाजिमन्तयःबो
  81. 81वादरिःबो
  82. 82वारुणिःबो
  83. 83वार्ष्ययःबो
  84. 84वार्ष्णिःका
  85. 85वार्ष्णायनाःम
  86. 86वर्ष्णेयाःबो
  87. 87वालेयाःम
  88. 88वाहनपःम
  89. 89वाहयःका
  90. 90वाहरयःका
  91. 91वाह्यमयाःम
  92. 92वैकलयःबो
  93. 93वैकलेयः ?बो
  94. 94वैमतायनःबो
  95. 95वैरिणेयाःका
  96. 96व्याप्यायनिःका
  97. 97शातपाःका
  98. 98शातयःबो
  99. 99शिवाजिःबो
  100. 100शौर्गिभिः ?बो
  101. 101श्यामायनयःबो
  102. 102श्यामेयाःबो, का
  103. 103श्याम्यायनयःबो
  104. 104श्रौतहिःबो
  105. 105श्लोकयाःका
  106. 106श्लोनुहिःबो
  107. 107श्वेतयूपयःबो
  108. 108सहचौलिःबो
  109. 109सहयौलिः ?बो
  110. 110स्तस्वाः ?म
  111. 111स्तम्भस्वाःम
  112. 112स्यातयःबो
  113. 113स्वायष्टाःम
  114. 114स्वायस्वाःम
  115. 115स्वास्यायनयःबो
  116. 116हयश्रीःका
  117. 117हर्यश्वःम
  118. 118हर्यश्विःम
  119. 119हार्यश्वीः ?बो
  120. 120हार्यश्विःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 65 — पराशराः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में शाक्त्य गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। शाक्त्य गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह शाक्त्यआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप वासिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर्य है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

शाक्त्य गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न