पराशर गोत्र — परिचय
पराशर गोत्र के प्रवर में तीन पीढ़ियाँ हैं। मत्स्य पुराण (अध्याय 201) के अनुसार वसिष्ठ के पुत्र शक्ति थे, और शक्ति के पुत्र पराशर। पुराण कहता है कि इसी परिवार में वेदव्यास का जन्म हुआ।
गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में "पराशराः" नाम आश्वलायन और आपस्तम्ब की सूचियों में मिलता है। इस गण का प्रवर सब ग्रंथों में एक जैसा है।
पराशरों के छह समूह
मत्स्य पुराण पराशर-परिवार को छह समूहों में बाँटता है: गौर पराशर, नील पराशर, कृष्ण पराशर, श्वेत पराशर, श्याम पराशर और धूम्र पराशर। हर समूह में कुछ परिवारों के नाम गिनाए गए हैं।
ये समूह पुराण की सूची हैं। आज किसी परिवार की पहचान इनसे होती है या नहीं, यह परिवार की अपनी परंपरा पर निर्भर है।
प्रवर — गण 65 (पराशराः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| वासिष्ठ · शाक्त्य · पाराशर्य | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
पूजा, संकल्प और विवाह में पराशर गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। पराशर गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह पराशरआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप वासिष्ठ, शाक्त्य, पाराशर्य है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
