जातूकर्ण्य गोत्र

जातूकर्ण्य गोत्र वसिष्ठ-कुल का है, पर ग्रंथ इसे अलग-अलग गणों में रखते हैं: मत्स्य पुराण अपने गण में, बौधायन वासिष्ठ गण में, कात्यायन कुण्डिन गण में। हर गण का प्रवर जानिए।

संक्षेप में

जातूकर्ण्य गोत्र महर्षि वसिष्ठ के कुल का गोत्र है। मत्स्य पुराण इसका अलग गण मानता है, जिसका प्रवर है — वासिष्ठ, आत्रेय, जातूकर्ण्य। पर बौधायन इसे वासिष्ठ गण में रखते हैं और कात्यायन कुण्डिन गण में। इसलिए इस गोत्र का प्रवर ग्रंथ के अनुसार बदल जाता है।

मुख्य जानकारी

गोत्रजातूकर्ण्य (Jatukarnya)
अन्य नाम / वर्तनीजातुकर्ण, जातूकर्ण, Jatukarna, Jatukarnya
ऋषि-कुलवसिष्ठ
गोत्रकार ऋषिमहर्षि वसिष्ठ
गणगण 67 — जातूकर्ण्याः; गण 63 — वासिष्ठाः; गण 66 — कुण्डिनाः
मुख्य प्रवरवासिष्ठ, आत्रेय, जातूकर्ण्य (मत्स्य पुराण)
ग्रंथ-सूची मेंगण 63: "जातूकर्ण्याः" (बौधायन); गण 66: "जातूकर्ण्याः" (कात्यायन)

जातूकर्ण्य गोत्र — परिचय

गोत्र-प्रवर ग्रंथों की तालिका में जातूकर्ण्य नाम का एक अलग गण है, पर वह केवल मत्स्य पुराण में मिलता है। मत्स्य पुराण (अध्याय 200) इस समूह का प्रवर जातूकर्ण्य, वसिष्ठ और अत्रि बताता है।

प्रवर में अत्रि का नाम आना ध्यान देने लायक है — यानी इस समूह को वसिष्ठ और अत्रि दोनों से जुड़ा माना गया है।

तीन ग्रंथ, तीन गण

बौधायन "जातूकर्ण्याः" को वासिष्ठ गण की सूची में रखते हैं, जिसका प्रवर केवल "वासिष्ठ" है। कात्यायन इसे कुण्डिन गण में रखते हैं, जिसका प्रवर "वासिष्ठ, मैत्रावरुण, कौण्डिन्य" है।

इसलिए जातूकर्ण्य गोत्र के परिवारों में प्रवर अलग-अलग हो सकता है। अपने परिवार का प्रवर घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से ज़रूर पूछ लें।

प्रवर — गण 67 (जातूकर्ण्याः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ · आत्रेय · जातूकर्ण्य3मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 200 — “Jatukarnya, Vasishtha, Atri”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (9)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। जातूकर्ण्य गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अलम्बवाचनाःम
  2. 2क्रोडोदरायणाःम
  3. 3दानकायाःम
  4. 4नागेयाःम
  5. 5परमाःम
  6. 6पादपःम
  7. 7महाचर्याःम
  8. 8वयःम
  9. 9शिवकर्णःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 67 — जातूकर्ण्याः का पूरा पृष्ठ

प्रवर — गण 63 (वासिष्ठाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ1आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
वासिष्ठ · ऐन्द्रप्रमद · आभरद्वसव्य3आपस्तम्बविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 200 — “Vasishtha — ekarsheya”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (160)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। जातूकर्ण्य गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अध्वलाःम
  2. 2अलब्धाः ?म
  3. 3आद्दस्थूणाः ?म
  4. 4आयस्थूणाःम
  5. 5आयस्थूलाःका
  6. 6आलम्भायनाःबो
  7. 7आवकीतयःबो
  8. 8आविक्षितयःबो
  9. 9आश्वलायनाःबो, का
  10. 10औलिःम
  11. 11औडुलोमिःबो
  12. 12औदुलोमाःका
  13. 13औध्रःबो
  14. 14औपगवाःका, म
  15. 15औपलोमाःम
  16. 16औपवनाःका
  17. 17कटाःम
  18. 18कपिष्ठलाःबो, का, म
  19. 19कपिष्ठिसःबो
  20. 20कराःम
  21. 21कर्षिताःबो
  22. 22काण्डवृद्धिःबो
  23. 23काण्डेवर्धिःबो
  24. 24काण्डेविद्धिः
  25. 25काण्डेवृद्धिःबो
  26. 26काम्यकायनिःबो
  27. 27कारीषयक्षिताःबो
  28. 28कारीषितःबो
  29. 29कालोहविःका
  30. 30कीलीका
  31. 31कौभोजिःबो
  32. 32कौलायनाःबो
  33. 33कौविधिःका
  34. 34गायनिःबो
  35. 35गोण्डलिःम
  36. 36गोपायनाःका, म
  37. 37गौडिनिःम
  38. 38गौधलिःका
  39. 39गौधिलिःका
  40. 40गौरव्यःबो
  41. 41गौराजिःबो
  42. 42गौरिश्रवसःबो
  43. 43चाण्डालिःम
  44. 44चौलिःका, म
  45. 45जातूकर्ण्याःबो
  46. 46जालिःम
  47. 47तालीसयःम
  48. 48दाकव्याःम
  49. 49दासव्याःम
  50. 50देवलःबो
  51. 51धौलिःम
  52. 52धौवतयःका
  53. 53धौवयःम
  54. 54नयाप्ताः ?बो
  55. 55नाकव्यःका
  56. 56नैगलाःका
  57. 57पलाशयःका
  58. 58पार्णकायनःबो
  59. 59पार्णवल्कःबो
  60. 60पार्णवल्क्याःका
  61. 61पालिशयाःम
  62. 62पालिसयाःम
  63. 63पूतिमाषाःबो
  64. 64पैडवःम
  65. 65पौडवःम
  66. 66पौड्डवः ?म
  67. 67पौरिश्रवसःका
  68. 68पौर्णकायनःबो
  69. 69पौलिश्रवसःम
  70. 70बाह्यकाःम
  71. 71बोधपाःम
  72. 72ब्रह्मपुरेयकाःम
  73. 73ब्रह्मपुरेयाःका
  74. 74ब्रह्मबलःम
  75. 75ब्रह्मवलिःका
  76. 76ब्रह्मवल्लिः ?का
  77. 77भोजिकःबो
  78. 78माण्डलिःका
  79. 79मालोहधिःका
  80. 80मुदहरिताःबो
  81. 81मुन्दहरिताःबो
  82. 82मेकःबो
  83. 83याज्ञवल्क्यःम
  84. 84याज्ञवल्क्याःका
  85. 85लायनाःबो, का
  86. 86लोमन्याःबो
  87. 87लोमायनःबो
  88. 88लोमायनाःम
  89. 89लोमायन्याःका
  90. 90वटीकराःका
  91. 91वपिस्वान्बो
  92. 92वसटाःम
  93. 93वासिष्ठाःआश्व, आप, बो
  94. 94वस्वपाजयःबो
  95. 95वाकव्यःका
  96. 96वाकुरयःका
  97. 97वाग्रन्थयःम
  98. 98वाघ्रपदाःका
  99. 99वाटक्यःबो
  100. 100वाटराकिःबो
  101. 101वाटाराकिःबो
  102. 102वाडोहलिःम
  103. 103वायधयःम
  104. 104वाराटाकिःबो
  105. 105वालिशयाःम
  106. 106वाहकथयःबो
  107. 107वाह्यकाःका
  108. 108वाह्यकायनिःबो
  109. 109वाह्यकृत्का
  110. 110विधिःम
  111. 111विश्वायनाःबो
  112. 112विश्वावनाःबो
  113. 113वेगलाःका
  114. 114वैकलिःबो
  115. 115वैक्लबाः ?म
  116. 116वैतलाकिःबो
  117. 117वैष्णवाःम
  118. 118वौलिःम
  119. 119वौवयःका
  120. 120वौविविःका
  121. 121व्ययःका
  122. 122व्यलोहपिःम
  123. 123व्यलोहविःम
  124. 124व्यालोहपिःम
  125. 125व्यालोहविःम
  126. 126व्याघ्रपदाःम
  127. 127व्याघ्रपादःबो
  128. 128शटाःम
  129. 129शाड्वलायनाः ?म
  130. 130शितिवृक्षाःका
  131. 131शीतवृक्षाःम
  132. 132शौण्डिलिःम
  133. 133शौविवृक्षाःबो
  134. 134षठाःम
  135. 135सत्त्वःका
  136. 136सप्तवेलाःबो
  137. 137सातुलायनाःम
  138. 138सात्वलायनाःका
  139. 139सावखाः ?बो
  140. 140साश्वलाःबो
  141. 141साश्वालाःबो
  142. 142सितिवृक्षाःम
  143. 143सुदहरिताःबो
  144. 144सुन्दहरिताःबो
  145. 145सुन्दाश्वःम
  146. 146सुपाचिःम
  147. 147सुमनाःम
  148. 148सुयाविःम
  149. 149सोपवत्सायनःबो
  150. 150सौपवसायनःबो
  151. 151सौमनसायनःका
  152. 152सौविवृक्षाःबो
  153. 153सौव्यवसायनःबो
  154. 154स्वत्याःबो
  155. 155स्वपाजयःबो
  156. 156स्वस्तिकराःका, म
  157. 157स्वस्तिकाःका, म
  158. 158स्वस्त्याःबो
  159. 159हराकिः ?बो
  160. 160हारितयःका

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 63 — वासिष्ठाः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

प्रवर — गण 66 (कुण्डिनाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ · मैत्रावरुण · कौण्डिन्य3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 200 — “Vasishtha, Mitravaruna, Kundina”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (68)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। जातूकर्ण्य गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अक्षतयःका
  2. 2अश्मरथ्यःबो
  3. 3अश्वत्थःबो
  4. 4आवल्ववदरःबो
  5. 5आविश्ववदरःबो
  6. 6औपस्वस्थाःका, म
  7. 7कापटवःबो
  8. 8कुण्डिनःम
  9. 9कुण्डिनाःआश्व, आप, बो, का
  10. 10कौकोल्यःबो
  11. 11क्रौकोल्यः ?बो
  12. 12गुग्गुलिः ?बो
  13. 13जातूकर्णाः ?म
  14. 14जातूकर्ण्याःका
  15. 15जादपाः ?म
  16. 16निम्नुः ?म
  17. 17नैकर्णयःम
  18. 18नैभ्रुकाः ?का
  19. 19नैभ्रुकाः ?का
  20. 20नैभ्रकायनः ?म
  21. 21नवग्रामाःबो
  22. 22पाटलयःका
  23. 23पादपःम
  24. 24पालोहाःम
  25. 25पेटकाःबो
  26. 26पेठकाःबो
  27. 27पैप्पलादयःबो
  28. 28पैप्पलादिःका, म
  29. 29बाहवःबो
  30. 30बोधायनाःका
  31. 31बौधिःका
  32. 32भाज्यकिःबो
  33. 33माक्षतयःम
  34. 34माक्षितयःम
  35. 35माध्यन्दिनःबो, म
  36. 36माध्यन्दिनिःबो
  37. 37मित्रावरुणाःका
  38. 38मौद्गलाःका
  39. 39यालोहाःम
  40. 40लुलायाःका
  41. 41लोहयःका, म
  42. 42लोहलाःका, म
  43. 43लोहायनाःबो
  44. 44वयःम
  45. 45वसिष्ठःम
  46. 46वागुढिनःम
  47. 47वाहवःबो
  48. 48विचक्षुपः ?म
  49. 49विचत्कापिः ?म
  50. 50वियङ्कपिः ?का
  51. 51विश्वङ्करः ?का
  52. 52वैकर्णयःबो
  53. 53शान्तिःबो
  54. 54शिवकर्णःम
  55. 55सामालिनः ?बो
  56. 56सातमाः ?म
  57. 57सामङ्गलिः ?बो
  58. 58सैवलकाःम
  59. 59सौगूलिःम
  60. 60सौपक्षिःबो
  61. 61सौपथिःबो
  62. 62स्वलोकाःका
  63. 63स्वलोक्याःका
  64. 64स्वसुलःका
  65. 65स्वस्थयःका
  66. 66स्वस्थलयःम
  67. 67स्वातिःबो
  68. 68हिरण्याक्षायणाःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 66 — कुण्डिनाः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में जातूकर्ण्य गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। जातूकर्ण्य गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह जातूकर्ण्यआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप वासिष्ठ, आत्रेय, जातूकर्ण्य है (मत्स्य पुराण)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

जातूकर्ण्य गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न