गण 67 — जातूकर्ण्याः

जातूकर्ण्याः गण वसिष्ठ ऋषि-कुल का गण है। मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — वासिष्ठ, आत्रेय, जातूकर्ण्य। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 9 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

जातूकर्ण्याः गण वसिष्ठ ऋषि-कुल का गण है। मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — वासिष्ठ, आत्रेय, जातूकर्ण्य। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 9 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वासिष्ठ · आत्रेय · जातूकर्ण्य3मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 200 — “Jatukarnya, Vasishtha, Atri”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण के गोत्र-पृष्ठ

इस गण में दर्ज नाम (9)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1अलम्बवाचनाःम
  2. 2क्रोडोदरायणाःम
  3. 3दानकायाःम
  4. 4नागेयाःम
  5. 5परमाःम
  6. 6पादपःम
  7. 7महाचर्याःम
  8. 8वयःम
  9. 9शिवकर्णःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

वसिष्ठ-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 281–282 (archive.org leaf 321–322)।