महर्षि गालव

विश्वामित्र के शिष्य

संक्षेप में

महर्षि गालव महाभारत (उद्योग पर्व) के अनुसार विश्वामित्र के शिष्य थे। गुरु-दक्षिणा के हठ में उन्होंने आठ सौ ऐसे श्वेत घोड़े खोजे जिनका एक कान काला हो — यह "गालव-चरित" है। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में गालव नाम दो कुलों में दर्ज है: विश्वामित्र-कुल का औदल गण और भृगु-कुल का जामदग्न्य वत्स गण।

महाभारत के ऋषि

एक नज़र में

महर्षि गालव — एक नज़र में
बातविवरणस्रोत
श्रेणीमहाभारत के ऋषिमहाभारत (Ganguli अनु.), उद्योग पर्व, Section CXIV
गुरुमहर्षि विश्वामित्रमहाभारत (Ganguli अनु.), उद्योग पर्व, Section CVI, CXIV

ग्रंथों में

  • गालव विश्वामित्र के शिष्य थे; गरुड़ उन्हें अपना मित्र बताते हैं।
  • गुरु-दक्षिणा में "आठ सौ चन्द्रमा जैसे श्वेत घोड़े, हर एक का एक कान काला"।
  • "गालवः" औदल गण (आश्व, म) और जामदग्न्य वत्स गण (म, का) — दोनों में।
  • मत्स्य पुराण विश्वामित्र-परिवार में गालव का नाम लेता है।

संबंधित ऋषि

गालव से जुड़े गोत्र-पृष्ठ

कुल और प्रवर

संबंधित गाथाएँ

स्रोत

महर्षि गालव — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न