महर्षि कण्व

ऋग्वेद के ऋषि, आङ्गिरस-परंपरा

संक्षेप में

सर्वानुक्रमणी के अनुसार ऋग्वेद 1.36 से आगे के सूक्तों के ऋषि "कण्व घौर" हैं, यानी घोर के पुत्र कण्व। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में काण्व गण आङ्गिरस-परंपरा का है, प्रवर: आङ्गिरस, आजमीढ, काण्व। महाभारत में शकुन्तला के पालक कण्व को "कश्यप के वंश का" कहा गया है — दोनों एक ही हैं, यह ग्रंथ नहीं बताते।

मंत्रद्रष्टा ऋषिमहाभारत के ऋषि

ग्रंथों में

  • "प्र वो विंशतिः कण्वो घौरः" — ऋग्वेद 1.36 से कण्व घौर के सूक्त।
  • काण्व गण का प्रवर आङ्गिरस, आजमीढ, काण्व — चारों सूत्र, और मत्स्य भी; आश्वलायन का विकल्प "आङ्गिरस, घौर, काण्व"।
  • शकुन्तला के पालक ऋषि कण्व "कश्यप के वंश के" बताए गए हैं।

कण्व से जुड़े गोत्र-पृष्ठ

कुल और प्रवर

ऋषि से गोत्र — हर गोत्रकार के प्रवर वाले गण

संबंधित गाथाएँ

स्रोत

महर्षि कण्व — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न