कण्व गोत्र

कण्व गोत्र आङ्गिरस-परंपरा का है। चारों सूत्र और मत्स्य पुराण इसका प्रवर आङ्गिरस, आजमीढ, काण्व बताते हैं; आश्वलायन विकल्प में "घौर" देते हैं। गण के 41 नाम, स्रोत सहित।

संक्षेप में

कण्व गोत्र आङ्गिरस-परंपरा का गोत्र है। ग्रंथों में इसका अपना गण है — "काण्व", जिसमें 41 नाम दर्ज हैं। इसका प्रवर है — आङ्गिरस, आजमीढ, काण्व। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन और मत्स्य पुराण सभी यही बताते हैं। आश्वलायन विकल्प में "आङ्गिरस, घौर, काण्व" भी देते हैं।

मुख्य जानकारी

गोत्रकण्व (Kanva)
अन्य नाम / वर्तनीकाण्व, कण्व, Kanv, Kanva
ऋषि-कुलकेवल-आङ्गिरस
ऋषि-पृष्ठमहर्षि कण्व
गणगण 33 — काण्वाः
मुख्य प्रवरआङ्गिरस, आजमीढ, काण्व (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)
ग्रंथ-सूची मेंगण 33: "कण्वाः" (आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराण); गण 33: "अजमीढाः कण्वाः" (आपस्तम्ब)

कण्व गोत्र — परिचय

ग्रंथ की तालिका में "कण्वाः" आश्वलायन, बौधायन और मत्स्य पुराण की सूची में है, और आपस्तम्ब इसे "अजमीढाः कण्वाः" लिखते हैं। प्रवर का दूसरा नाम "आजमीढ" भी इसी ओर संकेत करता है।

मत्स्य पुराण (अध्याय 196) भी काण्व परिवारों का प्रवर "आङ्गिरस, आजमीढ, काण्व" बताता है। इसी गण की मत्स्य-सूची में "मार्कण्ड" नाम भी है।

प्रवर — गण 33 (काण्वाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · आजमीढ · काण्व3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · घौर · काण्व3आश्वलायनविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Ajamidha, Kanva”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (41)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। कण्व गोत्र की पंक्तियाँ अलग रंग में है।

  1. 1अजमीढाः कण्वाःआप
  2. 2अपाण्डुःम
  3. 3आमरनाशनः ?म
  4. 4आर्षादिः ?म
  5. 5औपमर्कटायनाःबो
  6. 6औपमर्कट्यामलिः ?बो
  7. 7कण्वाःआश्व, बो, म
  8. 8कलाःबो
  9. 9गादायनःम
  10. 10गुरुःम
  11. 11गोदायनःम
  12. 12चतुरिःम
  13. 13नाडायनःम
  14. 14नारीम
  15. 15पौलाहनःबो
  16. 16पौलाहलिःबो
  17. 17प्रागाधमाःम
  18. 18प्रागादःम
  19. 19बाष्कलःबो
  20. 20मरणःम
  21. 21मर्कटःम
  22. 22मर्कटपःम
  23. 23मर्कटयःम
  24. 24माञ्जिःबो
  25. 25मार्कण्डःम
  26. 26मौञ्जिःबो
  27. 27मौञ्जिगन्धाःबो
  28. 28राथःम
  29. 29रमणःम
  30. 30वाजयःबो
  31. 31वाजयाःबो
  32. 32वाजश्रवसःबो
  33. 33विजदाःबो
  34. 34विजिगवःबो
  35. 35शकटायनःम
  36. 36शाकटायनःम
  37. 37शिवःम
  38. 38श्यामायनःम
  39. 39श्यामायनिःम
  40. 40सणःम
  41. 41सौनारीम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 33 — काण्वाः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में कण्व गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। कण्व गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह कण्वआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आङ्गिरस, आजमीढ, काण्व है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

कण्व गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न