गण 33 — काण्वाः

काण्वाः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, आजमीढ, काण्व। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 41 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

काण्वाः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, आजमीढ, काण्व। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 41 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · आजमीढ · काण्व3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · घौर · काण्व3आश्वलायनविकल्प

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Ajamidha, Kanva”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण के गोत्र-पृष्ठ

इस गण में दर्ज नाम (41)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1अजमीढाः कण्वाःआप
  2. 2अपाण्डुःम
  3. 3आमरनाशनः ?म
  4. 4आर्षादिः ?म
  5. 5औपमर्कटायनाःबो
  6. 6औपमर्कट्यामलिः ?बो
  7. 7कण्वाःआश्व, बो, म
  8. 8कलाःबो
  9. 9गादायनःम
  10. 10गुरुःम
  11. 11गोदायनःम
  12. 12चतुरिःम
  13. 13नाडायनःम
  14. 14नारीम
  15. 15पौलाहनःबो
  16. 16पौलाहलिःबो
  17. 17प्रागाधमाःम
  18. 18प्रागादःम
  19. 19बाष्कलःबो
  20. 20मरणःम
  21. 21मर्कटःम
  22. 22मर्कटपःम
  23. 23मर्कटयःम
  24. 24माञ्जिःबो
  25. 25मार्कण्डःम
  26. 26मौञ्जिःबो
  27. 27मौञ्जिगन्धाःबो
  28. 28राथःम
  29. 29रमणःम
  30. 30वाजयःबो
  31. 31वाजयाःबो
  32. 32वाजश्रवसःबो
  33. 33विजदाःबो
  34. 34विजिगवःबो
  35. 35शकटायनःम
  36. 36शाकटायनःम
  37. 37शिवःम
  38. 38श्यामायनःम
  39. 39श्यामायनिःम
  40. 40सणःम
  41. 41सौनारीम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

केवल-आङ्गिरस-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 244–245 (archive.org leaf 284–285)।