गण 34 — संकृतयः
संकृतयः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, साङ्कृत्य, गौरुवीत। सूत्रों में इसके 2 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 42 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
संकृतयः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, साङ्कृत्य, गौरुवीत। सूत्रों में इसके 2 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 42 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · साङ्कृत्य · गौरुवीत | 3 | आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · गौरुवीत · साङ्कृत्य | 3 | आश्वलायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| शाक्त्य · गौरुवीत · साङ्कृत्य | 3 | आश्वलायन | विकल्प |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Samkriti, Gauraviti”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
इस गण के गोत्र-पृष्ठ
इस गण में दर्ज नाम (42)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1अभ्रापिःबो
- 2आग्रायणःबो
- 3आर्षभिःबो
- 4गाङ्गिःका
- 5गार्ग्यहरिःम
- 6चान्द्रायणःबो
- 7चासरायणःका
- 8जानकिःका
- 9तण्डुःआश्व, बो
- 10ताण्डुःका
- 11तारकाद्याःबो
- 12तालकिःका
- 13तैरन्धःका
- 14नगाहिःका
- 15परस्परायण्यःम
- 16परिभवःबो
- 17परिभावाःबो
- 18पर्णीम
- 19पूतिमाषःआश्व, का
- 20पूतिमाषाःआप, बो
- 21पैणायाःबो
- 22पौलःबो
- 23मलकाःबो
- 24लौगाक्षिःका
- 25लाक्षिःम
- 26वैतलेयःबो
- 27शम्भुःआश्व, बो
- 28शैपयःबो
- 29शैम्भवयःबो
- 30शैवगवःआश्व
- 31शैवगवःबो
- 32श्रौतायनःबो
- 33श्रौतायनाःबो
- 34सहिःका
- 35संकृतयःआप, बो
- 36संकृतिःआश्व, का
- 37साम्बुःका
- 38सूतव्यः ?
- 39सूषिभिःका
- 40सैपठनःका
- 41सौपवनःका
- 42हारग्रीवाःबो
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।
केवल-आङ्गिरस-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 245–247 (archive.org leaf 285–287)।
