गण 29 — रथीतराः
रथीतराः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, पार्षदश्व, वैरूप। सूत्रों में इसके 5 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 24 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
रथीतराः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, पार्षदश्व, वैरूप। सूत्रों में इसके 5 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 24 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · पार्षदश्व · वैरूप | 3 | आश्वलायन | तालिका का मुख्य |
| आष्टादंष्ट्र · पार्षदश्व · वैरूप | 3 | आश्वलायन | विकल्प |
| आङ्गिरस · वैरूप · पार्षदश्व | 3 | आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
| आङ्गिरस · पार्षदश्व · राथीतर | 3 | कात्यायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| आष्टादंष्ट्र · वैरूप · पार्षदश्व | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
| आङ्गिरस · वैरूप · राथीतर | 3 | बौधायन, मत्स्य पुराण | विकल्प |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Virupa, Rathitara”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
आश्वलायन मुख्य प्रवर "पृषदश्व" परिवारों के लिए देते हैं, और बाक़ी ग्रंथ रथीतरों के लिए.
इस गण में दर्ज नाम (24)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1काश्यायनाःबो
- 2काह्वायनाःबो
- 3दासकःबो
- 4ह्वायनःबो
- 5नैतदाक्षिःबो
- 6नैतिदक्षयःबो
- 7नैतिरक्षयःबो
- 8पृषदश्वाःआश्व
- 9भिलिःबो
- 10भिलीभायनःबो
- 11भैक्षवाहःबो
- 12भैमगवाःबो
- 13रथीतराःबो, म
- 14लिप्यायनःबो
- 15लेभिःबो
- 16विरूपा रथीतराःआप
- 17शैलालियःबो
- 18सावहवःबो
- 19साहवःबो
- 20हस्तिदासिःबो
- 21हास्तिदासिःबो
- 22हास्तीबो
- 23हेमगवाःबो
- 24हैमगवाःबो
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.
केवल-आङ्गिरस-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 240–241 (archive.org leaf 280–281)।
