गण 31 — विष्णुवृद्धाः

विष्णुवृद्धाः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, पौरुकुत्स, त्रासदस्यव। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 42 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

विष्णुवृद्धाः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, पौरुकुत्स, त्रासदस्यव। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 42 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · पौरुकुत्स · त्रासदस्यव3आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (42)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1अत्रिवःम
  2. 2आरुणिःका
  3. 3आरुण्याःबो
  4. 4उपरायणाःम
  5. 5औपगविःका
  6. 6औपमित्यःका
  7. 7कतृणःम
  8. 8कुम्भगोत्रोद्भवःम
  9. 9जतृणःम
  10. 10देवस्थातयःबो
  11. 11देवस्थानयःबो
  12. 12नितुन्दिःका
  13. 13नैतुन्द्याःबो
  14. 14पुत्रवःम
  15. 15बादरायणःका
  16. 16बादरायणाःबो
  17. 17भद्रणमन्द्रणःका
  18. 18भद्रणाःबो
  19. 19भरण्याःबो
  20. 20मत्स्प्रायणाःबो
  21. 21मद्रणाःबो
  22. 22मद्रिःम
  23. 23वात्सप्रायणःबो
  24. 24विष्णुवृद्धःबो
  25. 25विष्णुवृद्धाःआश्व
  26. 26विष्णुवृद्धिःम
  27. 27वैमाडाःबो
  28. 28वैरपरायणःम
  29. 29वैहोढःबो
  30. 30स्तुल्याःबो
  31. 31मर्षणःबो
  32. 32शठःबो
  33. 33शठमन्द्रणःका
  34. 34शठमर्षणःबो
  35. 35शाङ्करायणःबो
  36. 36शिवमतिःम
  37. 37सतःम
  38. 38सात्यकाम्यःका
  39. 39सात्यकायनःबो
  40. 40सात्यकिःबो, का
  41. 41सात्यङ्कायनाःबो
  42. 42हारुण्याःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

केवल-आङ्गिरस-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 242–243 (archive.org leaf 282–283)।