गण 32 — यौवनाश्वाः

यौवनाश्वाः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, आम्बरीष, यौवनाश्व। सूत्रों में इसके 2 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 42 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

यौवनाश्वाः गण केवल-आङ्गिरस ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, आम्बरीष, यौवनाश्व। सूत्रों में इसके 2 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 42 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · आम्बरीष · यौवनाश्व3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य
मान्धात्र · आम्बरीष · यौवनाश्व3आश्वलायन, आपस्तम्बविकल्प
आङ्गिरस · मान्धात्र · कौत्स3आपस्तम्बइस ग्रंथ का मुख्य

आपस्तम्ब "आङ्गिरस, मान्धात्र, कौत्स" कुत्स परिवारों के लिए बताते हैं.

इस गण के गोत्र-पृष्ठ

इस गण में दर्ज नाम (42)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1कारीषयःबो
  2. 2कुत्सःआश्व
  3. 3कुत्साःआप
  4. 4कौतपाःबो
  5. 5कौलयःबो
  6. 6क्षेमवेगःम
  7. 7गवेरणिःम
  8. 8ज्ञात्वायनःम
  9. 9दर्भ्यःबो
  10. 10दर्भःआश्व
  11. 11दर्भःबो
  12. 12नैमिश्रयःबो
  13. 13पिङ्गःआश्व
  14. 14पौगलःम
  15. 15पौडलःबो
  16. 16पौलयःबो
  17. 17भैमगवःआश्व
  18. 18भैमगवःबो
  19. 19भैरवाःबो
  20. 20मण्डकारयःबो
  21. 21माण्डिकारयःबो
  22. 22मत्यायुःबो
  23. 23ममनायुःबो
  24. 24महोदरःबो
  25. 25माण्डिमालाःम
  26. 26माधूयःबो
  27. 27मान्धाताबो
  28. 28मान्धातुःबो
  29. 29मिश्रोदनःबो
  30. 30मिश्रोदराःबो
  31. 31लावादरःबो
  32. 32वालोदरःबो
  33. 33वाश्यःम
  34. 34वास्यमालिःम
  35. 35शङ्खःआश्व
  36. 36शाखदर्भिःम
  37. 37साङ्ख्यःबो
  38. 38सौभागःबो
  39. 39हरिःम
  40. 40हरितःआश्व, बो
  41. 41हरिताःआप
  42. 42हरितवास्यःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

केवल-आङ्गिरस-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 243–244 (archive.org leaf 283–284)।