मौद्गल्य गोत्र — परिचय
ग्रंथ की तालिका में "मुद्गलाः" आश्वलायन, आपस्तम्ब और बौधायन — तीनों की सूची में है, और "मौद्गलः" मत्स्य पुराण की सूची में। आश्वलायन और आपस्तम्ब विकल्प में "तार्क्ष्य, भार्म्यश्व, मौद्गल्य" भी देते हैं।
मत्स्य पुराण (अध्याय 196) मुद्गल परिवारों के दो समूह बताता है, और दोनों का प्रवर अलग है।
मत्स्य पुराण के दो रूप
हंसजिह्व, देवजिह्व, अग्निजिह्व आदि परिवारों के लिए मत्स्य पुराण का प्रवर है — आङ्गिरस, ताण्डि, मौद्गल्य। सत्यमुग्रि, हिरण्यस्तम्ब आदि के लिए यह ग्रंथ "आङ्गिरस, भार्म्यश्व, मौद्गल्य" पढ़ता है, पर मत्स्य के अंग्रेज़ी और हिन्दी दोनों अनुवाद वहाँ "मत्स्यदग्ध" पढ़ते हैं।
यह पाण्डुलिपियों का अंतर है। हम कोई एक रूप सही नहीं ठहराते — परिवार में जो प्रवर चलता आया है, वही अपनाएँ।
प्रवर — गण 30 (मुद्गलाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · भार्म्यश्व · मौद्गल्य | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| तार्क्ष्य · भार्म्यश्व · मौद्गल्य | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब | विकल्प |
| आङ्गिरस · ताण्डि · मौद्गल्य | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
| आङ्गिरस · मत्स्यदग्ध · मौद्गल्य | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Matsyadagdha, Mudgala · Angira, Tandya, Maudgalya”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।
पूजा, संकल्प और विवाह में मौद्गल्य गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। मौद्गल्य गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह मौद्गल्यआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आङ्गिरस, भार्म्यश्व, मौद्गल्य है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, मत्स्य पुराण)।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
