महर्षि शौनक

महाभारत के कुलपति, भृगु-कुल

संक्षेप में

महर्षि शौनक "कुलपति" के नाम से महाभारत के आरंभ में आते हैं — नैमिषारण्य में उनके बारह वर्ष के यज्ञ में ही महाभारत की कथा सुनाई गई। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में शुनक गण भृगु-कुल का है, जिसका मुख्य प्रवर "गार्त्समद" है; कात्यायन और मत्स्य पुराण इसे "भार्गव, गार्त्समद" बताते हैं।

महाभारत के ऋषि

ग्रंथों में

  • नैमिष वन में कुलपति शौनक का बारह वर्ष का यज्ञ, जहाँ ऋषियों को महाभारत सुनाई गई।
  • ऋग्वेद का दूसरा मण्डल "गार्त्समद" — गृत्समद का।
  • शुनक गण का मुख्य प्रवर "गार्त्समद"; विकल्प: "भार्गव, शौनहोत्र, गार्त्समद" (आश्वलायन), "शौनक" (बौधायन), "भार्गव, गार्त्समद" (कात्यायन, मत्स्य)।
  • मत्स्य पुराण: शुनक-गृत्समद समूह का प्रवर "भृगु, गृत्समद"।

शौनक से जुड़े गोत्र-पृष्ठ

कुल और प्रवर

ऋषि से गोत्र — हर गोत्रकार के प्रवर वाले गण

संबंधित गाथाएँ

स्रोत

महर्षि शौनक — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न