महर्षि उपमन्यु

महाभारत में आयोद-धौम्य के शिष्य; वसिष्ठ-कुल का गोत्र

संक्षेप में

महाभारत (आदि पर्व) में उपमन्यु आयोद-धौम्य के तीन शिष्यों में से एक हैं, जिनकी गुरु-भक्ति की कथा प्रसिद्ध है: गुरु की आज्ञा से भूखे रहकर उन्होंने आक के पत्ते खाए, अंधे होकर कुएँ में गिरे, और अश्विनीकुमारों की स्तुति से दृष्टि पाई। गोत्र-प्रवर ग्रंथों में उपमन्यु वसिष्ठ-कुल का गण है — पर ग्रंथ दोनों को एक नहीं कहते।

महाभारत के ऋषि

एक नज़र में

महर्षि उपमन्यु — एक नज़र में
बातविवरणस्रोत
श्रेणीमहाभारत के ऋषिमहाभारत (Ganguli अनु.), आदि पर्व, Section III
समकालीन / प्रसंग में साथमहर्षि उद्दालक आरुणिमहाभारत (Ganguli अनु.), आदि पर्व, Section III

ग्रंथों में

  • आयोद-धौम्य के तीन शिष्य: उपमन्यु, आरुणि और वेद।
  • गुरु ने भिक्षा, दूध और फेन तक का उपयोग रोका; भूखे उपमन्यु ने आक (अर्क) के पत्ते खाए, अंधे होकर कुएँ में गिरे, और गुरु के कहने पर अश्विनीकुमारों की स्तुति की।
  • उपमन्यु गण (गण 64) का प्रवर (आश्वलायन, कात्यायन): वासिष्ठ, आभरद्वसव्य, ऐन्द्रप्रमद।
  • मत्स्य पुराण वसिष्ठ-कुल के गोत्रों की सूची देता है।

संबंधित ऋषि

उपमन्यु से जुड़े गोत्र-पृष्ठ

कुल और प्रवर

ऋषि से गोत्र — हर गोत्रकार के प्रवर वाले गण

संबंधित गाथाएँ

स्रोत

महर्षि उपमन्यु — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न