FAQ
महर्षि उपमन्यु — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाभारत (आदि पर्व, Section III) के अनुसार आयोद-धौम्य के शिष्य, जिनकी गुरु-भक्ति की कथा वहाँ है।
गुरु के कहने पर उन्होंने भिक्षा और दूध भी छोड़ा; भूख में आक के पत्ते खाकर अंधे हुए, कुएँ में गिरे, और अश्विनीकुमारों की स्तुति से दृष्टि पाई।
उपमन्यु गण (गण 64) का: वासिष्ठ, आभरद्वसव्य, ऐन्द्रप्रमद (आश्वलायन, कात्यायन)।
नाम एक है, पर महाभारत उन्हें गोत्र से नहीं जोड़ता और गोत्र-ग्रंथ कथा नहीं बताते। इसलिए हम उन्हें एक नहीं कहते।
गोत्र-प्रवर ग्रंथों में वसिष्ठ-कुल के।
