गण 44 — आजाः

आजाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, आज। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 14 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

आजाः गण विश्वामित्र ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, आज। सूत्रों में इसके 1 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 14 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · आज3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायनतालिका का मुख्य
वैश्वामित्र · आश्मरथ्य · वाधुल3कात्यायनइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Kamalayajina, Ashmarathya, Bandhula”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

कात्यायन के रूप में "वाधुल" को ग्रंथ "बन्धुल" के बराबर बताता है.

इस गण में दर्ज नाम (14)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1अजाःआश्व, का
  2. 2अजायनाःबो
  3. 3अश्मरथ्यःम
  4. 4आजायनाःबो
  5. 5आज्याःआप
  6. 6आश्मरथ्यःका
  7. 7कमलायजिनःका
  8. 8कामलायनिःम
  9. 9काशिकाःम
  10. 10कुशिकाः ?का
  11. 11बन्धुलिः ?म
  12. 12माधुच्छन्दसः ?का
  13. 13माधुलाः ?म
  14. 14मार्गमित्ययःका

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

विश्वामित्र-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 256 (archive.org leaf 296)।