लोहित गोत्र

लोहित गोत्र विश्वामित्र-कुल के आष्टक गण में है — बौधायन, कात्यायन और मत्स्य की सूचियों में। प्रवर के चार रूप हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार आष्टक और लोहित परिवारों में विवाह नहीं होता।

संक्षेप में

लोहित गोत्र महर्षि विश्वामित्र के कुल का गोत्र है। ग्रंथ की तालिका में "लोहिताः" बौधायन, कात्यायन और मत्स्य पुराण की सूची में आष्टक गण में है। कात्यायन और मत्स्य इसका प्रवर बताते हैं — वैश्वामित्र, लौहित, आष्टक। मत्स्य पुराण कहता है कि आष्टक और लोहित परिवारों में आपस में विवाह नहीं होता।

मुख्य जानकारी

गोत्रलोहित (Lohit)
अन्य नाम / वर्तनीलौहित, लोहित, Lohita, Lohit
ऋषि-कुलविश्वामित्र
गोत्रकार ऋषिमहर्षि विश्वामित्र
गणगण 46 — आष्टकाः; गण 47 — पौरणाः; गण 53 — शालङ्कायनाः
मुख्य प्रवरवैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, आष्टक (आश्वलायन)
ग्रंथ-सूची मेंगण 46: "लोहिताः" (बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण); गण 47: "लोहितः" (मत्स्य पुराण); गण 53: "लोहितः" (आश्वलायन)

लोहित गोत्र — परिचय

आष्टक गण के प्रवर के चार रूप मिलते हैं: आश्वलायन "वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, आष्टक", आपस्तम्ब "वैश्वामित्र, आष्टक", बौधायन "वैश्वामित्र, आष्टक, लौहित", और कात्यायन व मत्स्य "वैश्वामित्र, लौहित, आष्टक"।

मत्स्य पुराण (अध्याय 198) लोहित और अष्टक को एक साथ गिनता है और साफ़ कहता है कि इन दोनों गोत्रों में विवाह नहीं होता।

दो और गणों में लोहित नाम

"लोहितः" मत्स्य की पौरण-गण सूची में और "लोहितः" आश्वलायन की शालङ्कायन-गण सूची में भी है। इन गणों के प्रवर अलग हैं — पौरण: वैश्वामित्र, दैवरात, पौरण; शालङ्कायन: वैश्वामित्र, शालङ्कायन, कौशिक।

इसलिए लोहित-गोत्री परिवार अपना प्रवर घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से ज़रूर मिलाएँ।

प्रवर — गण 46 (आष्टकाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · आष्टक3आश्वलायनतालिका का मुख्य
वैश्वामित्र · आष्टक2आपस्तम्बइस ग्रंथ का मुख्य
वैश्वामित्र · आष्टक · लौहित3बौधायनइस ग्रंथ का मुख्य
वैश्वामित्र · लौहित · आष्टक3कात्यायन, मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Lohita, Ashtaka”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (13)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। लोहित गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अष्टकयःबो
  2. 2अष्टकाःआश्व, आप, म
  3. 3कर्जूरायनाःबो
  4. 4जर्झरायनाः ?बो
  5. 5कुण्डकयः ?बो
  6. 6दाण्डकयः ?बो
  7. 7रण्डकयः ?बो
  8. 8लोहिताःबो, का, म
  9. 9वञ्जायनाःबो
  10. 10वसयःबो
  11. 11वाञ्जायनाःबो
  12. 12वासयःबो
  13. 13श्वान्त्रवर्णायनाःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 46 — आष्टकाः का पूरा पृष्ठ

प्रवर — गण 47 (पौरणाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वैश्वामित्र · दैवरात · पौरण3आश्वलायनतालिका का मुख्य
वैश्वामित्र · पौरण2आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Purana”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (6)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। लोहित गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अष्टकःम
  2. 2परिधापयन्ताःबो
  3. 3पारणाःबो
  4. 4पारिधापयन्तःआश्व, आप, बो, का
  5. 5पूरणाःआश्व, आप, बो, का, म
  6. 6लोहितःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 47 — पौरणाः का पूरा पृष्ठ

प्रवर — गण 53 (शालङ्कायनाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वैश्वामित्र · शालङ्कायन · कौशिक3आश्वलायनतालिका का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (5)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। लोहित गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1जह्नुःआश्व
  2. 2लोहितःआश्व
  3. 3लोहिताक्षःआश्व
  4. 4शालङ्कायनःआश्व
  5. 5शालाक्षःआश्व

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 53 — शालङ्कायनाः का पूरा पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में लोहित गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। लोहित गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह लोहितआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, आष्टक है (आश्वलायन)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

लोहित गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न