धनञ्जय गोत्र

धनञ्जय गोत्र विश्वामित्र-कुल का है। सूत्र इसका प्रवर वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, धानञ्जय बताते हैं, जबकि मत्स्य पुराण वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, आघमर्षण। दोनों रूप, गण और स्रोत।

संक्षेप में

धनञ्जय गोत्र महर्षि विश्वामित्र के कुल का गोत्र है। ग्रंथ की तालिका में "धनञ्जयाः" आश्वलायन, आपस्तम्ब और बौधायन — तीनों की सूची में है। इन सूत्रों के अनुसार प्रवर है — वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, धानञ्जय। पर मत्स्य पुराण धनञ्जय परिवारों का तीसरा ऋषि "आघमर्षण" बताता है।

मुख्य जानकारी

गोत्रधनञ्जय (Dhananjay)
अन्य नाम / वर्तनीधनंजय, धानञ्जय, Dhananjaya, Dhanjay
ऋषि-कुलविश्वामित्र
गोत्रकार ऋषिमहर्षि विश्वामित्र
गणगण 43 — धानञ्जयाः
मुख्य प्रवरवैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, धानञ्जय (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन)
ग्रंथ-सूची मेंगण 43: "धनञ्जयाः" (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन)

धनञ्जय गोत्र — परिचय

धानञ्जय गण विश्वामित्र-कुल का तीसरा गण है। इसमें 12 नाम दर्ज हैं, और इसके प्रवर का दूसरा ऋषि "माधुच्छन्दस" है — यानी मधुच्छन्दा की परंपरा।

माधुच्छन्दस नाम विश्वामित्र-कुल के चार गणों के प्रवर में आता है: धानञ्जय, आज, रौहिण और आष्टक।

सूत्र और मत्स्य पुराण का मतभेद

तीनों सूत्र — आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन — तीसरा ऋषि "धानञ्जय" बताते हैं। मत्स्य पुराण (अध्याय 198) धनञ्जय, कपर्दय आदि परिवारों के लिए "विश्वामित्र, मधुच्छन्दा, अघमर्षण" देता है।

हम इनमें से किसी एक को सही नहीं ठहराते। परिवार में जो प्रवर चलता आया है, वही अपनाएँ।

प्रवर — गण 43 (धानञ्जयाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · धानञ्जय3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायनतालिका का मुख्य
वैश्वामित्र · माधुच्छन्दस · आघमर्षण3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 198 — “Vishvamitra, Madhuchchhanda, Aghamarshana”. यह ऊपर दिए पाठ से अलग है।

इस गण में दर्ज नाम (12)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। धनञ्जय गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1आश्ववताःबो
  2. 2आश्वावताःबो
  3. 3उत्स्राक्षाःबो
  4. 4उष्ट्राक्षाःबो
  5. 5कारव्याःबो
  6. 6कारीषयःबो
  7. 7तारव्याःबो
  8. 8धनञ्जयाःआश्व, आप, बो
  9. 9महाक्षाःबो
  10. 10माधुच्छन्दसाःआप
  11. 11सैन्धवायनाःबो
  12. 12स्थूलव्याःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 43 — धानञ्जयाः का पूरा पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में धनञ्जय गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। धनञ्जय गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह धनञ्जयआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप वैश्वामित्र, माधुच्छन्दस, धानञ्जय है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

धनञ्जय गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न