अत्रि गोत्र

अत्रि गोत्र का प्रवर आत्रेय, आर्चनानस, श्यावाश्व है — सभी सूत्र और मत्स्य पुराण एकमत हैं। जानिए श्यावाश्व गण के 167 नाम, अत्रि-कुल के बाक़ी गण और स्रोत।

संक्षेप में

अत्रि गोत्र महर्षि अत्रि का गोत्र है। ग्रंथ की तालिका में "अत्रयः" आश्वलायन, आपस्तम्ब और बौधायन की सूची में, और "आत्रेयः" कात्यायन की सूची में है। इनका गण "श्यावाश्व" है, जिसका प्रवर है — आत्रेय, आर्चनानस, श्यावाश्व। सभी सूत्र और मत्स्य पुराण यही प्रवर बताते हैं।

मुख्य जानकारी

गोत्रअत्रि (Atri)
अन्य नाम / वर्तनीआत्रेय, अत्री, Atreya, Atrey
ऋषि-कुलअत्रि
गोत्रकार ऋषिमहर्षि अत्रि
गणगण 35 — श्यावाश्वाः
मुख्य प्रवरआत्रेय, आर्चनानस, श्यावाश्व (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)
ग्रंथ-सूची मेंगण 35: "अत्रयः" (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन); गण 35: "अत्रिः" (मत्स्य पुराण); गण 35: "आत्रिः" (मत्स्य पुराण); गण 35: "आत्रेयः" (कात्यायन)

अत्रि गोत्र — परिचय

बौधायन सूत्र गोत्र की परिभाषा में जिन आठ ऋषियों का नाम लेता है, अत्रि उनमें से एक हैं। ग्रंथ की तालिका में अत्रि-कुल के 6 गण हैं, और सबके प्रवर में पहला नाम "आत्रेय" है।

श्यावाश्व गण अत्रि-कुल का सबसे बड़ा गण है — इसमें 167 नाम दर्ज हैं। मत्स्य पुराण (अध्याय 197) भी इस समूह का प्रवर "श्यावाश्व, अत्रि, आर्चनानस" बताता है।

अत्रि-कुल के गण

श्यावाश्व के अलावा अत्रि-कुल में गविष्ठिर, अतिथि, वाग्भूतक, पुत्रिकापुत्र और सुमङ्गल गण हैं। इनके प्रवर में "आत्रेय" के बाद दूसरे ऋषि आते हैं, जैसे गाविष्ठिर या पौर्वातिथ।

मत्स्य पुराण के अनुसार पुत्रिकापुत्र समूह महर्षि अत्रि की पुत्री के पुत्रों का है, इसीलिए उसका नाम ऐसा है। अपने परिवार का गण प्रवर से पहचानें।

प्रवर — गण 35 (श्यावाश्वाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आत्रेय · आर्चनानस · श्यावाश्व3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 197 — “Shyavashva, Atri, Archananasa”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (167)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। अत्रि गोत्र की पंक्तियाँ अलग रंग में है।

  1. 1अङ्गिःबो
  2. 2अत्रयःआश्व, आप, बो
  3. 3अत्रिःम
  4. 4अरुणात्रेयःबो
  5. 5अर्घपथाःम
  6. 6अर्घपण्याःम
  7. 7आङ्गिमान्बो
  8. 8आत्रिःम
  9. 9आत्रेयःका
  10. 10आनङ्गिःबो
  11. 11आनीलायनाःबो
  12. 12आनीषायणाःबो
  13. 13आहायनाःका
  14. 14इन्द्रातिथिःबो
  15. 15उद्दालकःम
  16. 16उरुग्रीविःम
  17. 17औद्दालकिःबो
  18. 18औषसःका
  19. 19कणजिह्वःम
  20. 20कर्दमायनःम
  21. 21कर्मर्यायणयःबो
  22. 22कर्मर्यायनिःबो
  23. 23कानाजह्वःम
  24. 24कारग्रीविःका
  25. 25कार्मर्यायनयःबो
  26. 26कार्मर्यायनिःका
  27. 27कार्ष्णायनिःबो
  28. 28कालापचयाःबो
  29. 29कालायनिःबो
  30. 30कालावयःबो
  31. 31काविष्ठिराःबो
  32. 32कृष्णात्रेयःबो
  33. 33कैरजिःका
  34. 34कैरञ्जिःका
  35. 35कैरञ्जिःम
  36. 36कौण्डेयाःबो
  37. 37कौद्रेयाःबो
  38. 38गाणिपतयःबो
  39. 39गाणिष्टतयःबो
  40. 40गाधिपतिःबो
  41. 41गाविष्ठिराःबो
  42. 42गोणिपतःम
  43. 43गोणीपतिःम
  44. 44गोपनाःम
  45. 45गोपवनाःबो
  46. 46गोपवन्यःबो
  47. 47गोलेयःबो
  48. 48गौरागिःबो
  49. 49गौरग्रीवयःबो
  50. 50गौरग्रीवाःम
  51. 51गौरग्रीविःम
  52. 52गौराङ्गिःबो
  53. 53गौराजिनःम
  54. 54गौरात्रेयःबो
  55. 55गौर्यन्यःम
  56. 56चन्द्रातिथिःबो
  57. 57चान्द्रिःबो
  58. 58चैत्रायणाःम
  59. 59छगलाःबो
  60. 60छन्दोगिःबो
  61. 61छन्दोगेयःम
  62. 62छागलाःम
  63. 63छान्द्रिःम
  64. 64छान्दोगिःम
  65. 65छान्दोगिःका
  66. 66जलदःम
  67. 67जानुकिःका
  68. 68जैत्रायणाःका
  69. 69ताकिविन्दवःम
  70. 70तृणबिन्दवःम
  71. 71तृणबिन्दुःबो
  72. 72तैलपःम
  73. 73तौलेयःका
  74. 74दत्तात्रेयःबो
  75. 75दाक्षिःबो
  76. 76दिविःका
  77. 77दौराङ्गिःबो
  78. 78द्रोणगावाःबो
  79. 79द्रोणनाभःबो
  80. 80द्रोणभावाःबो
  81. 81नीलात्रेयाःबो
  82. 82नीलायनःबो
  83. 83नैद्राणिःम
  84. 84पतञ्जनःका
  85. 85पयनाःका
  86. 86पुष्टयःबो
  87. 87पौष्टिकाःबो
  88. 88प्रगलःम
  89. 89बालेयःबो
  90. 90बाहुतन्तःका
  91. 91बाहुमित्रःका
  92. 92भगपादःम
  93. 93भागमादयनःका
  94. 94भागमानःका
  95. 95भागम्पथःबो
  96. 96भाङ्कतयःबो
  97. 97भाङ्क्तयःबो
  98. 98भारद्वाजायनःबो
  99. 99भूमिःबो
  100. 100भूरयःबो
  101. 101मङ्गुलयःबो
  102. 102महात्रेयाःबो
  103. 103मानङ्गिःबो
  104. 104मालकयःबो
  105. 105मालयःबो
  106. 106मालरुचःबो
  107. 107माहुलिःबो
  108. 108मौद्गलाकिःका
  109. 109मौद्गुलयःबो
  110. 110रक्तात्रेयःबो
  111. 111वामरथीनाःबो
  112. 112वामरथ्याःबो
  113. 113वामरथ्याःका, म
  114. 114वालयःबो
  115. 115वालेयाःबो
  116. 116वैडालिःम
  117. 117वैतभावयःबो
  118. 118वैतभावाःबो
  119. 119वैदेहाःबो
  120. 120वैलेयःम
  121. 121वैलेयाःबो
  122. 122वौलेयःका
  123. 123व्यालयःबो
  124. 124शाकलायनिःम
  125. 125शाकलायानिःम
  126. 126शाकिःका
  127. 127शाखलियःका
  128. 128शाखेयाःम
  129. 129शाबव्यायनयःबो
  130. 130शारायणाःम
  131. 131शिखुपालः ?बो
  132. 132शौवाःबो
  133. 133शौणकर्णिःम
  134. 134शौद्रेयाःम
  135. 135शौकतयःम
  136. 136शौद्रेयाःम
  137. 137शौनकर्णिःका
  138. 138शौनकर्णिःम
  139. 139शौभ्रेयाःबो
  140. 140शौवाःबो
  141. 141श्यामात्रेयाःबो
  142. 142श्वाजानुकिःका
  143. 143श्वेतात्रेयाःबो
  144. 144श्योरङ्गिःबो
  145. 145सञ्चव्यानिःबो
  146. 146साकेतायनाःबो
  147. 147साङ्खेयःम
  148. 148साम्पच्यानेयःबो
  149. 149सारायणाःम
  150. 150सुपुष्पिःबो
  151. 151सैपास्थप्रालाः ?बो
  152. 152सैष्पयःबो
  153. 153सोपाच्छरालः ?बो
  154. 154सौगयःबो
  155. 155सौतवराःम
  156. 156सौपुष्पयःका
  157. 157सौपुष्पिःम
  158. 158सौभृतिःका
  159. 159सौभ्रेयःबो
  160. 160सौरागिःबो
  161. 161सौराङ्गिःबो
  162. 162सौश्रुतयःका
  163. 163स्तैदेहाःबो
  164. 164स्वेतकिःका
  165. 165हरप्रीतिःम
  166. 166हर्यश्वःका
  167. 167हालेयःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

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पूजा, संकल्प और विवाह में अत्रि गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। अत्रि गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह अत्रिआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आत्रेय, आर्चनानस, श्यावाश्व है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन, मत्स्य पुराण)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

अत्रि गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न