गण 38 — वाग्भूतकाः

वाग्भूतकाः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, आर्चनानस, वाग्भूतक। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 2 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

वाग्भूतकाः गण अत्रि ऋषि-कुल का गण है। बौधायन के अनुसार इसका प्रवर है — आत्रेय, आर्चनानस, वाग्भूतक। इस गण का प्रवर ग्रंथ में इसी एक रूप में मिलता है। ग्रंथ ने इस गण में 2 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आत्रेय · आर्चनानस · वाग्भूतक3बौधायनतालिका का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (2)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1वाग्भूतकाःबो
  2. 2वाग्भुतकाःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

अत्रि-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 251 (archive.org leaf 291)।