मानव गोत्र

मानव नाम ग्रंथों में दो जगह है: मत्स्य पुराण की आत्मभुव-गण सूची में, और सूत्रों के क्षत्रिय-प्रवर "मानव, ऐल, पौरूरवस" में। दोनों अलग अर्थ हैं — स्रोत सहित।

संक्षेप में

मानव नाम गोत्र-प्रवर ग्रंथों में दो अलग रूपों में आता है। मत्स्य पुराण की सूची में "मानवः" आत्मभुव गण में है, जिसका प्रवर है — आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, मान्त्रवर, आत्मभुव। दूसरी ओर, चारों सूत्र क्षत्रियों का एक प्रवर बताते हैं — मानव, ऐल, पौरूरवस, जो किसी गण से नहीं जुड़ा।

मुख्य जानकारी

गोत्रमानव (Manav)
अन्य नाम / वर्तनीमानव, Manava, Manav
ऋषि-कुलभारद्वाज (आङ्गिरस)
गोत्रकार ऋषिमहर्षि भरद्वाज
गणगण 27 — आत्मभुवः
मुख्य प्रवरआङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, मान्त्रवर, आत्मभुव (मत्स्य पुराण)
ग्रंथ-सूची मेंगण 27: "मानवः" (मत्स्य पुराण)

मानव — दो अर्थ

आत्मभुव गण केवल मत्स्य पुराण में मिलता है और उसमें 10 नाम हैं — मानव उनमें से एक है। इस गण का प्रवर भारद्वाज-परंपरा का है।

क्षत्रिय-प्रवर "मानव, ऐल, पौरूरवस" आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन और कात्यायन बताते हैं। आपस्तम्ब और कात्यायन क्षत्रिय और वैश्य दोनों के लिए केवल "मानव" (एक ऋषि) का विकल्प भी देते हैं।

अपना रूप कैसे पहचानें

परिवार में जो पूरा प्रवर बोला जाता है, उसी से पता चलता है कि "मानव" किस अर्थ में है। "आङ्गिरस… आत्मभुव" वाला प्रवर हो तो आत्मभुव गण; "मानव, ऐल, पौरूरवस" हो तो क्षत्रिय-प्रवर।

प्रवर याद न हो तो घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से पूछें।

प्रवर — गण 27 (आत्मभुवः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · मान्त्रवर · आत्मभुव5मत्स्य पुराणतालिका का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (10)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। मानव गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अत्वरिःम
  2. 2अश्वरिष्कःम
  3. 3आत्मभवःम
  4. 4आत्महवःम
  5. 5ऋक्षःम
  6. 6क्रथिश्वान्म
  7. 7भरद्वाजःम
  8. 8मन्त्रवरःम
  9. 9मानवःम
  10. 10मैत्रवरःम

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 27 — आत्मभुवः का पूरा पृष्ठ

इसी गण के अन्य गोत्र-पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में मानव गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। मानव गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह मानवआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, मान्त्रवर, आत्मभुव है (मत्स्य पुराण)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

मानव गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न