कपिल गोत्र

कपिल गोत्र प्रवरदर्पण में उद्धृत मत्स्य पुराण की रौक्षायण-सूची में है, जिसका प्रवर आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, वान्दन, मातवचस है। महाभारत की एक सूची कपिल को विश्वामित्र-पुत्र भी कहती है।

संक्षेप में

कपिल गोत्र का नाम प्रवरदर्पण में उद्धृत मत्स्य पुराण की सूची में है — रौक्षायण, कपिल, शबल, शिपिल आदि के साथ। इन परिवारों का गण मातवचस है, जिसका प्रवर है: आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, वान्दन, मातवचस। महाभारत की एक सूची कपिल को विश्वामित्र के पुत्रों में भी गिनती है।

मुख्य जानकारी

गोत्रकपिल (Kapil)
अन्य नाम / वर्तनीकपिल, Kapila
ऋषि-कुलभारद्वाज (आङ्गिरस)
गोत्रकार ऋषिमहर्षि भरद्वाज
गणगण 23 — मातवचसः
मुख्य प्रवरआङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, वान्दन, मातवचस (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन)

कपिल गोत्र — परिचय

प्रवरदर्पण (17वीं सदी) मत्स्य पुराण से एक सूची देता है: "रौक्षायणः कपिलः शबलः शिपिलः…"। आपस्तम्ब इन रौक्षायणों का प्रवर पाँच ऋषियों का बताते हैं — आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, वान्दन, मातवचस।

ध्यान दें: ग्रंथ की मुख्य गण-तालिका में मातवचस गण की सूची में 11 नाम हैं, और उनमें "कपिल" नहीं है। कपिल केवल प्रवरदर्पण की इस मत्स्य-सूची में आता है।

विश्वामित्र-परंपरा में कपिल

प्रवरदर्पण महाभारत के दान-धर्म प्रसंग से विश्वामित्र के पुत्रों की एक सूची भी उद्धृत करता है, जिसमें "महान् ऋषिश्च कपिलः" आता है।

इसलिए कपिल-गोत्री परिवारों में भारद्वाज-मातवचस वाला प्रवर भी हो सकता है, और विश्वामित्र-परंपरा वाला भी। अपने परिवार का प्रवर घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से ज़रूर पूछें।

प्रवर — गण 23 (मातवचसः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · वान्दन · मातवचस5आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायनतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · वान्दन · मातवच3आपस्तम्बविकल्प

इस गण में दर्ज नाम (11)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। कपिल गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अग्निजिह्वीबो
  2. 2ऋक्षाःआश्व, आप
  3. 3कर्णिःबो
  4. 4कौथुमःबो
  5. 5कौथुयःबो
  6. 6रौक्षायणाःबो
  7. 7वैकिडाःबो
  8. 8वैपिण्डीबो
  9. 9शिपिलाःबो
  10. 10शैपिलाःबो
  11. 11सूतिःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 23 — मातवचसः का पूरा पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में कपिल गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। कपिल गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह कपिलआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, वान्दन, मातवचस है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन)।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

कपिल गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न