गण 25 — शैन्याः
शैन्याः गण भारद्वाज (आङ्गिरस) ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, गार्ग्य, शैन्य। सूत्रों में इसके 5 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 126 नाम दर्ज किए हैं।
संक्षेप में
शैन्याः गण भारद्वाज (आङ्गिरस) ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराण के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, बार्हस्पत्य, भारद्वाज, गार्ग्य, शैन्य। सूत्रों में इसके 5 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 126 नाम दर्ज किए हैं।
प्रवर
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · गार्ग्य · शैन्य | 5 | आश्वलायन, बौधायन, मत्स्य पुराण | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · शैन्य · गार्ग्य | 3 | आश्वलायन, बौधायन | विकल्प |
| आङ्गिरस · शैन्य · गार्ग्य | 3 | कात्यायन | इस ग्रंथ का मुख्य |
| आङ्गिरस · बार्हस्पत्य · भारद्वाज · शैन्य · गार्ग्य | 5 | कात्यायन | विकल्प |
| आङ्गिरस · गार्ग्य · शैन्य | 3 | आपस्तम्ब | इस ग्रंथ का मुख्य |
| भारद्वाज · गार्ग्य · शैन्य | 3 | आपस्तम्ब | विकल्प |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Brihaspati, Bharadvaja, Garga, Sainya”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
कात्यायन पाँच ऋषियों वाला रूप आत्रेयायणि आदि परिवारों के लिए देते हैं, और तीन ऋषियों वाला "आङ्गिरस, शैन्य, गार्ग्य" गर्ग, तित्तिरि, कपिभू, खण्डित आदि के लिए.
इस गण के गोत्र-पृष्ठ
इस गण में दर्ज नाम (126)
गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।
- 1ऐन्द्रालिःका
- 2औपमर्कटाःबो
- 3औपमर्कटिःका
- 4कपिःका
- 5कपिभूःम
- 6काकायनःम
- 7काणायनाःबो
- 8काण्वायनाःम
- 9कारिरात्रिःबो
- 10कारीबो
- 11कालकृत्का
- 12कालायनःका
- 13केवलायनःम
- 14केशमर्थःका
- 15केष्मरिःका
- 16कैवल्यःबो
- 17कोपचयाःम
- 18कोशचयाःम
- 19कौजपथःम
- 20कौतुकयःबो
- 21कौलास्त्रयःका
- 22क्रियाश्वःका
- 23क्रीवःका
- 24क्रोष्टकयःबो
- 25क्रोष्टाक्षिःम
- 26क्रौडिःम
- 27खण्डितःका
- 28खन्दिनःका
- 29गर्गाःआश्व, बो, का
- 30गाधीम
- 31गान्धरायणःबो
- 32गार्ग्यःम
- 33गार्ग्याःका
- 34चक्रीम
- 35चाक्रीम
- 36जायावताःबो
- 37तालकृत्म
- 38तित्तिरिःका, म
- 39तुल्याःबो
- 40दार्मीम
- 41नैद्राक्षिःम
- 42पैंगलायनाःका
- 43पैलिकायनःम
- 44पौचिकःबो
- 45पौलयःबो
- 46पौलिकायनिःम
- 47प्रेषचङ्गाः ?का
- 48बलाकिःम
- 49बहुवीतीम
- 50बाभ्याः ?बो
- 51बालाकिःम
- 52बाहुलकयःबो
- 53भार्गिःम
- 54भार्गीम
- 55भालवित्म
- 56भाल्लविःका
- 57भूमिःका
- 58भ्रष्टविन्दवःबो
- 59भ्रष्टकाःबो
- 60भ्रष्टयःबो
- 61भ्रष्टविन्दयःबो
- 62भ्रष्टकृत्म
- 63भ्रष्टविष्णः ?म
- 64भ्राजिताक्षयःबो
- 65भ्राजिताक्षिःबो
- 66भ्राजिनाक्षत्रेयः ?बो
- 67भ्राष्टविन्दुःबो
- 68भ्राष्टकृत्का
- 69भ्राष्टकृत्म
- 70भ्राष्टमितिःका
- 71मधुरावहःम
- 72मर्कटिःम
- 73मातुलेयःका
- 74मार्कटिःम
- 75मृत्सङ्गःम
- 76यावकिःका
- 77यौगन्धरायणःबो
- 78राजयःबो
- 79रातःम
- 80रायःम
- 81राष्ट्रपिण्डीम
- 82रोपःम
- 83रौतिःबो
- 84लातकृत्म
- 85लायकृत्म
- 86लावकृत्म
- 87लैत्यालिःम
- 88लैन्द्राणिःम
- 89वत्सतरायणःका
- 90वत्सरायणःका
- 91वाटाःबो
- 92वात्स्यतरायणाःम
- 93वार्ष्णीम
- 94विदुःम
- 95वेणुहानिःबो
- 96वैलहानिःबो
- 97शङ्खिनाःबो
- 98शाकलायनःम
- 99शालङ्कायनःका
- 100शिखायनयःबो
- 101श्यामायनाःका
- 102श्यामायनिःम
- 103श्वक्रीडाम
- 104सखीनाःबो
- 105सत्यापचयःबो
- 106साङ्ख्यायनःम
- 107साङ्खहवान्बो
- 108सात्यायनिःबो
- 109सापरिवाराःका
- 110साभारःम
- 111साम्परिवाराःका
- 112साम्भरायणाःबो
- 113साम्भरावणाःबो
- 114सायकायनिःम
- 115साहनिःम
- 116साहरिःम
- 117सोहर्ताबो
- 118सौयामुनिःबो
- 119स्कन्दःम
- 120स्कन्दसःम
- 121स्त्राहतः ?बो
- 122स्वन्दितिःका
- 123स्वश्वःम
- 124हात्रायविःबो
- 125होत्रपचयःबो
- 126होत्रापचयःबो
संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।
भारद्वाज (आङ्गिरस)-कुल के अन्य गण
स्रोत
पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 235–237 (archive.org leaf 275–277)।
