अभिलेखों में दर्ज कुलदेवियाँ
नीचे केवल वे प्रविष्टियाँ हैं जिन्हें हमने मूल पृष्ठ पर पढ़कर जाँचा है। "कुलदेवी" के लिए अभिलेख "family goddess / family deities" या "household gods" लिखते हैं — दूसरा शब्द हमने अलग बताया है।
| समाज | अभिलेख में दर्ज देवी-देवता | वर्ष, स्रोत |
|---|---|---|
| चित्पावन (कोंकणस्थ) ब्राह्मण | कुलदेवी: जोगाई या जोगेश्वरी | 1920, Enthoven खंड 1, p. 244 |
| चित्पावन ब्राह्मण (रत्नागिरी) | प्रमुख गृह-देवता: गणपति, अन्नपूर्णा, गोपालकृष्ण, शालिग्राम, सूर्यकांत | 1880, Ratnagiri Gazetteer, p. 113 |
| कऱ्हाडे ब्राह्मण | कुलदेवियाँ: महालक्ष्मी, दुर्गा, म्हाळसा, भवानी आदि | 1920, Enthoven खंड 1, p. 247 |
| कऱ्हाडे ब्राह्मण (रत्नागिरी) | प्रमुख गृह-देवियाँ: चित्पावनों वाली देवियों के अलावा महालक्ष्मी और दुर्गा | 1880, Ratnagiri Gazetteer, p. 114 |
| गौड़ सारस्वत (शेणवी) ब्राह्मण | कुलदेवता: मंगेश, शांतादुर्गा, महालक्ष्मी आदि — सबके मंदिर गोवा में | 1920, Enthoven खंड 1, p. 251 |
| शेणवी ब्राह्मण (रत्नागिरी) | प्रमुख गृह-देवी-देवता: मंगेश, महालक्ष्मी, म्हाळसा, शांतादुर्गा, नागेश, बिंदुमाधव, सप्तकोटीश्वर | 1880, Ratnagiri Gazetteer, p. 117 |
| मोटाला ब्राह्मण (सूरत) | कुलदेवी: कोल्हापुर की महालक्ष्मी | 1920, Enthoven खंड 1, p. 234 |
| पुष्करणा (पोकरणा) ब्राह्मण | कुलदेवियाँ: लक्ष्मीजी और मारवाड़ की चामुंडा | 1920, Enthoven खंड 1, p. 238 |
| हव्यक ब्राह्मण | प्रमुख इष्ट: इडगुंजी के गणेश; कुलदेवियाँ: ग्राम-अम्माएँ (दुर्गम्मा, होनावरम्मा आदि) | 1920, Enthoven खंड 1, p. 253 |
| भावसार | कुलदेवियाँ: अंबाजी और हिंगलाज | 1920, Enthoven खंड 1, p. 149 |
| दरजी (काठियावाड़, कच्छ) | अधिकतर की कुलदेवी हिंगलाज; कुछ की पीठल | 1920, Enthoven खंड 1, p. 297 |
| श्रीमाली वाणिया | कुलदेवी: श्रीमाल की वाघेश्वरी | 1922, Enthoven खंड 3, p. 430 |
| पोरवाड वाणिया | कुलदेवी: महालक्ष्मी (अभिलेख के अनुसार पोरवाड और श्रीमाली दोनों की) | 1922, Enthoven खंड 3, p. 437 |
| नीमा वाणिया | कुलदेवता: ईडर के पास शामलाजी | 1922, Enthoven खंड 3, p. 436 |
| सोनी | सबकी अपनी कुलदेवियाँ; सबसे आम: वाघेश्वरी, महालक्ष्मी, हिंगलाज, मोमदी (Momdi) और आसिर (Asir) | 1922, Enthoven खंड 3, p. 347 |
इस तालिका को कैसे पढ़ें
- एक ही ग्रंथ में भी विवरण अलग हो सकते हैं: Enthoven श्रीमाली वाणियों की कुलदेवी एक जगह श्रीमाल की वाघेश्वरी (p. 430) और दूसरी जगह पोरवाडों के साथ महालक्ष्मी (p. 437) लिखते हैं। यह दिखाता है कि एक समाज में एक कुलदेवी नहीं होती।
- "गृह-देवता" (household gods) और "कुलदेवी" अलग बातें हैं। घर में गणपति या शालिग्राम की पूजा होना और परिवार की कुलदेवी — दोनों साथ चलते हैं।
- ये पूरे समाज का सामान्य विवरण है। आपके परिवार की कुलदेवी परिवार की परंपरा से ही पक्की होगी।
- यह ब्रिटिश-काल के अभिलेख (1880 और 1920) की जानकारी है — उस समय और क्षेत्र की स्थिति, आज की नहीं। हर परिवार की परंपरा इससे अलग हो सकती है।
जिन समाजों की कुलदेवी अभिलेखों में नहीं मिली
हमने छह ब्रिटिश-कालीन जनगणना-ग्रंथ पढ़े — Russell (मध्य प्रांत, 1916), Crooke (उत्तर-पश्चिम प्रांत और अवध, 1896), Thurston (मद्रास, 1909), Enthoven (बंबई, 1920–22), Risley (बंगाल, 1891) और Rose (पंजाब, 1911)। उत्तर भारत के कई बड़े समाजों — जैसे अग्रवाल, माहेश्वरी, कान्यकुब्ज, सरयूपारीण, गौड़, सनाढ्य, भूमिहार, जाट, खत्री और कायस्थ — की कोई नामित कुलदेवी इनमें नहीं मिली।
इसलिए हमने उन समाजों के लिए कोई कुलदेवी नहीं लिखी। बिना स्रोत के लिखना ग़लत जानकारी फैलाना होगा।
FAQ
समाज और कुलदेवी — अभिलेखों में — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Enthoven (1920) के अभिलेख में चित्पावनों की कुलदेवी जोगाई या जोगेश्वरी लिखी है (खंड 1, p. 244)।
Enthoven (1920) के अनुसार मंगेश, शांतादुर्गा, महालक्ष्मी आदि, जिनके मंदिर गोवा में हैं (खंड 1, p. 251)।
Enthoven (1920) में महालक्ष्मी, दुर्गा, म्हाळसा, भवानी आदि; Ratnagiri Gazetteer (1880) में महालक्ष्मी और दुर्गा।
Enthoven (1922) में श्रीमाली वाणियों की कुलदेवी श्रीमाल की वाघेश्वरी (खंड 3, p. 430), और दूसरी जगह पोरवाडों के साथ महालक्ष्मी (p. 437) लिखी है।
हमने जो छह ब्रिटिश-कालीन अभिलेख पढ़े, उनमें इन समाजों की कोई नामित कुलदेवी नहीं मिली, इसलिए हम कोई नाम नहीं देते।
नहीं। अभिलेख भी एक समाज के लिए कई कुलदेवियाँ लिखते हैं, और कुछ समाजों में हर शाखा की अलग कुलदेवी दर्ज है।
