समाज और कुलदेवी — ऐतिहासिक अभिलेखों में दर्ज कुलदेवियाँ

Ratnagiri Gazetteer (1880) और Enthoven (1920–22) में दर्ज समाज-वार कुलदेवियाँ, पृष्ठ-संख्या सहित: चित्पावन की जोगेश्वरी, गौड़ सारस्वत के मंगेश-शांतादुर्गा, कऱ्हाडे की महालक्ष्मी, पुष्करणा, श्रीमाली, भावसार, दरजी और अन्य।

संक्षेप में

ब्रिटिश-काल के दो अभिलेखों — Ratnagiri Gazetteer (1880) और Enthoven (1920–22) — में कई समाजों की कुलदेवियाँ दर्ज हैं: जैसे चित्पावन ब्राह्मणों की जोगाई या जोगेश्वरी, गौड़ सारस्वतों के मंगेश और शांतादुर्गा, कऱ्हाडे ब्राह्मणों की महालक्ष्मी। ये पूरे समाज का सामान्य विवरण हैं; एक ही समाज के परिवारों की कुलदेवी अलग हो सकती है।

अभिलेखों में दर्ज कुलदेवियाँ

नीचे केवल वे प्रविष्टियाँ हैं जिन्हें हमने मूल पृष्ठ पर पढ़कर जाँचा है। "कुलदेवी" के लिए अभिलेख "family goddess / family deities" या "household gods" लिखते हैं — दूसरा शब्द हमने अलग बताया है।

समाजअभिलेख में दर्ज देवी-देवतावर्ष, स्रोत
चित्पावन (कोंकणस्थ) ब्राह्मणकुलदेवी: जोगाई या जोगेश्वरी1920, Enthoven खंड 1, p. 244
चित्पावन ब्राह्मण (रत्नागिरी)प्रमुख गृह-देवता: गणपति, अन्नपूर्णा, गोपालकृष्ण, शालिग्राम, सूर्यकांत1880, Ratnagiri Gazetteer, p. 113
कऱ्हाडे ब्राह्मणकुलदेवियाँ: महालक्ष्मी, दुर्गा, म्हाळसा, भवानी आदि1920, Enthoven खंड 1, p. 247
कऱ्हाडे ब्राह्मण (रत्नागिरी)प्रमुख गृह-देवियाँ: चित्पावनों वाली देवियों के अलावा महालक्ष्मी और दुर्गा1880, Ratnagiri Gazetteer, p. 114
गौड़ सारस्वत (शेणवी) ब्राह्मणकुलदेवता: मंगेश, शांतादुर्गा, महालक्ष्मी आदि — सबके मंदिर गोवा में1920, Enthoven खंड 1, p. 251
शेणवी ब्राह्मण (रत्नागिरी)प्रमुख गृह-देवी-देवता: मंगेश, महालक्ष्मी, म्हाळसा, शांतादुर्गा, नागेश, बिंदुमाधव, सप्तकोटीश्वर1880, Ratnagiri Gazetteer, p. 117
मोटाला ब्राह्मण (सूरत)कुलदेवी: कोल्हापुर की महालक्ष्मी1920, Enthoven खंड 1, p. 234
पुष्करणा (पोकरणा) ब्राह्मणकुलदेवियाँ: लक्ष्मीजी और मारवाड़ की चामुंडा1920, Enthoven खंड 1, p. 238
हव्यक ब्राह्मणप्रमुख इष्ट: इडगुंजी के गणेश; कुलदेवियाँ: ग्राम-अम्माएँ (दुर्गम्मा, होनावरम्मा आदि)1920, Enthoven खंड 1, p. 253
भावसारकुलदेवियाँ: अंबाजी और हिंगलाज1920, Enthoven खंड 1, p. 149
दरजी (काठियावाड़, कच्छ)अधिकतर की कुलदेवी हिंगलाज; कुछ की पीठल1920, Enthoven खंड 1, p. 297
श्रीमाली वाणियाकुलदेवी: श्रीमाल की वाघेश्वरी1922, Enthoven खंड 3, p. 430
पोरवाड वाणियाकुलदेवी: महालक्ष्मी (अभिलेख के अनुसार पोरवाड और श्रीमाली दोनों की)1922, Enthoven खंड 3, p. 437
नीमा वाणियाकुलदेवता: ईडर के पास शामलाजी1922, Enthoven खंड 3, p. 436
सोनीसबकी अपनी कुलदेवियाँ; सबसे आम: वाघेश्वरी, महालक्ष्मी, हिंगलाज, मोमदी (Momdi) और आसिर (Asir)1922, Enthoven खंड 3, p. 347

इस तालिका को कैसे पढ़ें

  • एक ही ग्रंथ में भी विवरण अलग हो सकते हैं: Enthoven श्रीमाली वाणियों की कुलदेवी एक जगह श्रीमाल की वाघेश्वरी (p. 430) और दूसरी जगह पोरवाडों के साथ महालक्ष्मी (p. 437) लिखते हैं। यह दिखाता है कि एक समाज में एक कुलदेवी नहीं होती।
  • "गृह-देवता" (household gods) और "कुलदेवी" अलग बातें हैं। घर में गणपति या शालिग्राम की पूजा होना और परिवार की कुलदेवी — दोनों साथ चलते हैं।
  • ये पूरे समाज का सामान्य विवरण है। आपके परिवार की कुलदेवी परिवार की परंपरा से ही पक्की होगी।
  • यह ब्रिटिश-काल के अभिलेख (1880 और 1920) की जानकारी है — उस समय और क्षेत्र की स्थिति, आज की नहीं। हर परिवार की परंपरा इससे अलग हो सकती है।

जिन समाजों की कुलदेवी अभिलेखों में नहीं मिली

हमने छह ब्रिटिश-कालीन जनगणना-ग्रंथ पढ़े — Russell (मध्य प्रांत, 1916), Crooke (उत्तर-पश्चिम प्रांत और अवध, 1896), Thurston (मद्रास, 1909), Enthoven (बंबई, 1920–22), Risley (बंगाल, 1891) और Rose (पंजाब, 1911)। उत्तर भारत के कई बड़े समाजों — जैसे अग्रवाल, माहेश्वरी, कान्यकुब्ज, सरयूपारीण, गौड़, सनाढ्य, भूमिहार, जाट, खत्री और कायस्थ — की कोई नामित कुलदेवी इनमें नहीं मिली।

इसलिए हमने उन समाजों के लिए कोई कुलदेवी नहीं लिखी। बिना स्रोत के लिखना ग़लत जानकारी फैलाना होगा।

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स्रोत

समाज और कुलदेवी — अभिलेखों में — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न