मत्स्य पुराण: अलग-अलग प्रश्न
Relate the gotra (clan), vamsa (dynasty), avatara (descent), and pravara (family) of the Risis…(मनु का मत्स्य से प्रश्न:) ऋषियों के गोत्र, वंश, अवतार और प्रवर बताइए…
मत्स्य पुराण के गोत्र-अध्याय इसी प्रश्न से शुरू होते हैं। प्रश्न में गोत्र, वंश और प्रवर अलग गिने गए हैं।
एक उदाहरण: भृगु-वंश
वंशावली में ऋचीक हैं पर प्रवर में नहीं; प्रवर में आप्नवान हैं पर महाभारत की इस वंशावली में नहीं। यानी प्रवर वंशावली का संक्षेप नहीं, उसके चुने हुए ऋषि हैं; और गोत्र-नाम (वत्स) वंश के एक वंशज का नाम है।
संस्काररत्नमाला (p. 415) विज्ञानेश्वर, माधव और मदनपारिजात के हवाले से कहती है कि गोत्र "वंश-परंपरा से प्रसिद्ध" है — यानी गोत्र वंश से जाना जाता है, पर वह स्वयं वंशावली नहीं।
| भृगु-वंश में | |
|---|---|
| वंश (महाभारत, आदि LXVI) | भृगु → च्यवन → और्व → ऋचीक → जमदग्नि → राम (परशुराम) |
| गोत्र (उदाहरण) | वत्स — जमदग्नि के वंश का एक गोत्र |
| प्रवर (गण 1) | भार्गव, च्यावन, आप्नवान, और्व, जामदग्न्य |
राजवंश और गोत्र
क्षत्रिय परिवारों में "वंश" और "गोत्र" अक्सर अलग चलते हैं। प्रवरमञ्जरी (p. 4) के अनुसार क्षत्रियों के लिए पुरोहित का प्रवर बताया गया है। दूसरी ओर Russell (1916) लिखते हैं कि कुछ राजपूत कुल राजाओं या वीरों के नाम पर हैं — जैसे रघुवंशी, राजा रघु के नाम पर। यानी ऐसे परिवार का वंश-नाम एक राजा से, और यज्ञ-संकल्प का गोत्र पुरोहित-परंपरा से हो सकता है।
यह ब्रिटिश-काल की जनगणना-ethnography का ऐतिहासिक अभिलेख है — उस समय और क्षेत्र की स्थिति, आज की नहीं।
