गौतम गोत्र

गौतम गोत्र आङ्गिरस-परंपरा का है। मत्स्य पुराण इसे उचथ्य-गौतम गण में रखता है (प्रवर: आङ्गिरस, औचथ्य, गौतम)। जानिए आयास्य-गौतम गण, गौतम-समूह के 11 गण और सभी प्रवर-रूप।

संक्षेप में

गौतम गोत्र महर्षि गौतम का गोत्र है, जो आङ्गिरस-परंपरा में आते हैं। ग्रंथ में "गौतमः" नाम मत्स्य पुराण की सूची में उचथ्य-गौतम गण में है, जिसका प्रवर आश्वलायन, आपस्तम्ब और कात्यायन के अनुसार है — आङ्गिरस, औचथ्य, गौतम। गौतम-समूह में कुल 11 गण हैं, और हर गण का प्रवर अलग है।

मुख्य जानकारी

गोत्रगौतम (Gautam)
अन्य नाम / वर्तनीगोतम, गौतम, Gautama, Gotam
ऋषि-कुलगौतम (आङ्गिरस)
गोत्रकार ऋषिमहर्षि गौतम
गणगण 13 — उचथ्या गौतमाः; गण 12 — आयास्या गौतमाः
मुख्य प्रवरआङ्गिरस, औचथ्य, गौतम (आश्वलायन, आपस्तम्ब, कात्यायन)
ग्रंथ-सूची मेंगण 13: "गौतमः" (मत्स्य पुराण)

गौतम गोत्र — परिचय

बौधायन सूत्र गोत्र की परिभाषा में जिन आठ ऋषियों का नाम लेता है, गौतम उनमें से एक हैं। ग्रंथ की तालिका में गौतम-समूह के 11 गण हैं (गण 12–22), और लगभग सबके प्रवर में "आङ्गिरस" और "गौतम" दोनों आते हैं।

मत्स्य पुराण (अध्याय 196) उचथ्य-गौतम समूह का प्रवर "आङ्गिरस, औचथ्य, औशिज" बताता है। इस गण में 108 नाम दर्ज हैं।

आयास्य-गौतम और उचथ्य-गौतम

गौतम-समूह के पहले दो गण सबसे बड़े हैं। आयास्य-गौतम गण का प्रवर है — आङ्गिरस, आयास्य, गौतम। आश्वलायन यही प्रवर सामान्य "गौतम" परिवारों के लिए बताते हैं।

उचथ्य-गौतम गण का प्रवर है — आङ्गिरस, औचथ्य, गौतम। इसलिए गौतम-गोत्री परिवारों में दोनों में से कोई भी प्रवर हो सकता है। अपने परिवार का प्रवर घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से पूछ लें।

प्रवर — गण 13 (उचथ्या गौतमाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · औचथ्य · गौतम3आश्वलायन, आपस्तम्ब, कात्यायनतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · औचथ्य · औशिज3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, (Suv)achotathya, Ushija”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (108)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। गौतम गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अङ्गायनकाःका
  2. 2अभिजितःका, म
  3. 3आरुणायनिःम
  4. 4उचथ्यःम
  5. 5उचथ्याःआप, आश्व
  6. 6उतथ्यःम
  7. 7उपबिन्दुःका, म
  8. 8ऐरीडवःम
  9. 9औतथ्याःका
  10. 10कद्रुकरःका
  11. 11करगोण्यःका
  12. 12करसोगिण्यःका
  13. 13करालिःका
  14. 14करेलःका
  15. 15करोटःम
  16. 16काचाक्षिःका
  17. 17काटल्याःका
  18. 18कापाक्षिःम
  19. 19कारवारिःका
  20. 20काराधारीका
  21. 21कारोटःका
  22. 22कारोटकःम
  23. 23कावाक्षिःका, म
  24. 24कासोरुःम
  25. 25कुण्डवःका
  26. 26कुण्डेखः ?का
  27. 27कैरातिःम
  28. 28कौशिल्याःम
  29. 29कोष्ठःम
  30. 30कौटिल्याःका
  31. 31कौशिल्यायनःम
  32. 32कौष्टिकिःम
  33. 33क्षपाःका, म
  34. 34क्षयःम
  35. 35क्षारकारण्डःम
  36. 36क्षीरःम
  37. 37क्षीरकटःका
  38. 38क्षीरकरण्डःका
  39. 39गतवःका
  40. 40गौतमःम
  41. 41चण्डान्तकःम
  42. 42णिचोराणिः ?म
  43. 43तालेयाःका
  44. 44तुण्डःका
  45. 45तोष्यकाणिःका
  46. 46तौलेयःम
  47. 47तौलेयाःका
  48. 48तौष्टचरुणयः ?का
  49. 49नगःम
  50. 50नरोहित्याःका
  51. 51निरोधान्मः ?म
  52. 52नीचयःका
  53. 53नैलेयःम
  54. 54नैपकिःका
  55. 55पाचिकारोविःम
  56. 56पाण्डुःम
  57. 57पात्विकारोविःम
  58. 58पार्थिवाःका, म
  59. 59पुष्पवान्म
  60. 60पैष्कञ्जितिःम
  61. 61पौष्कजितिःम
  62. 62पौष्यण्डिः ?का
  63. 63बाहुकर्णिःम
  64. 64बौधिःम
  65. 65भागलःका
  66. 66भागवित्तिःम
  67. 67भार्गतवःम
  68. 68भार्गवतःम
  69. 69मान्धर्यःका
  70. 70मूलवःम
  71. 71मौद्गहायनाः ?का
  72. 72मौमिनिःका
  73. 73यौपिण्डिःका
  74. 74राहुकर्णिःम
  75. 75रेविःम
  76. 76रोधःम
  77. 77रोहितायनःका
  78. 78रोहिणेयाःम
  79. 79लौगाक्षिःका
  80. 80वाडालकःम
  81. 81वारषिःका
  82. 82वासुःम
  83. 83विश्वन्तिःम
  84. 84वीरःम
  85. 85वीरषिःका
  86. 86सजीवीम
  87. 87सधूपःका
  88. 88सधूपयःका
  89. 89सपुष्पयःका
  90. 90समूलयःका
  91. 91सरावःका
  92. 92सलोगाक्षिःम
  93. 93सस्तेवयःका
  94. 94साङ्करःका
  95. 95सामलोमाकिःका
  96. 96सार्धनेमिःम
  97. 97सार्वःका
  98. 98सुगोमाक्षिःम
  99. 99सुतपाःम
  100. 100सुरैषिणःम
  101. 101सैन्धवःका
  102. 102सोमदायिनःम
  103. 103सौमनिःका
  104. 104सोमोदयनिःम
  105. 105सौगमाक्षिःम
  106. 106सौपात्रिःम
  107. 107सौपुरिःम
  108. 108स्कार्दःका

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण. "?" = मूल छपाई साफ़ नहीं, नाम की पढ़त अनिश्चित।

गण 13 — उचथ्या गौतमाः का पूरा पृष्ठ

प्रवर — गण 12 (आयास्या गौतमाः)

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · आयास्य · गौतम3आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायनतालिका का मुख्य

इस गण में दर्ज नाम (35)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। नीचे की सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। गौतम गोत्र की पंक्ति अलग रंग में है।

  1. 1अयास्याःआप, बो
  2. 2आणिचेयाःबो
  3. 3आयास्याःबो
  4. 4कठोरःबो
  5. 5काक्षीवाःबो
  6. 6काचाक्षयःबो
  7. 7काठोरिःबो
  8. 8कारुणयःबो
  9. 9कावाक्षयःबो
  10. 10कासिःबो
  11. 11कासिवायाःबो
  12. 12कासीकःबो
  13. 13कीलालयःबो
  14. 14कौमारवत्यःबो
  15. 15कौमाश्वत्याःबो
  16. 16ताण्डःबो
  17. 17तौडिःबो
  18. 18दर्भिःबो
  19. 19देवकिःबो
  20. 20नैकऋषिःबो
  21. 21नैकरिष्टिःबो
  22. 22पार्थिवाःबो
  23. 23वाभ्याःबो
  24. 24वाह्याःबो
  25. 25वौभ्याःबो
  26. 26मूढरथःबो
  27. 27मूढाःबो
  28. 28औणिचेयाःबो
  29. 29औणिचेपकःबो
  30. 30सत्यकयःबो
  31. 31सात्यकःबो
  32. 32सात्यकयःबो
  33. 33सात्यमुग्रीकःबो
  34. 34स्तैषकिःबो
  35. 35स्वैदेहाःबो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गण 12 — आयास्या गौतमाः का पूरा पृष्ठ

पूजा, संकल्प और विवाह में गौतम गोत्र

संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। गौतम गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह गौतमआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आङ्गिरस, औचथ्य, गौतम है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, कात्यायन)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।

ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।

स्रोत

गौतम गोत्र — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न