गौतम गोत्र — परिचय
बौधायन सूत्र गोत्र की परिभाषा में जिन आठ ऋषियों का नाम लेता है, गौतम उनमें से एक हैं। ग्रंथ की तालिका में गौतम-समूह के 11 गण हैं (गण 12–22), और लगभग सबके प्रवर में "आङ्गिरस" और "गौतम" दोनों आते हैं।
मत्स्य पुराण (अध्याय 196) उचथ्य-गौतम समूह का प्रवर "आङ्गिरस, औचथ्य, औशिज" बताता है। इस गण में 108 नाम दर्ज हैं।
आयास्य-गौतम और उचथ्य-गौतम
गौतम-समूह के पहले दो गण सबसे बड़े हैं। आयास्य-गौतम गण का प्रवर है — आङ्गिरस, आयास्य, गौतम। आश्वलायन यही प्रवर सामान्य "गौतम" परिवारों के लिए बताते हैं।
उचथ्य-गौतम गण का प्रवर है — आङ्गिरस, औचथ्य, गौतम। इसलिए गौतम-गोत्री परिवारों में दोनों में से कोई भी प्रवर हो सकता है। अपने परिवार का प्रवर घर के बड़ों या कुल-पुरोहित से पूछ लें।
प्रवर — गण 13 (उचथ्या गौतमाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · औचथ्य · गौतम | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
| आङ्गिरस · औचथ्य · औशिज | 3 | मत्स्य पुराण | इस ग्रंथ का मुख्य |
स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, (Suv)achotathya, Ushija”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।
प्रवर — गण 12 (आयास्या गौतमाः)
| प्रवर | ऋषि | किस ग्रंथ के अनुसार | |
|---|---|---|---|
| आङ्गिरस · आयास्य · गौतम | 3 | आश्वलायन, आपस्तम्ब, बौधायन, कात्यायन | तालिका का मुख्य |
पूजा, संकल्प और विवाह में गौतम गोत्र
संस्काररत्नमाला (1899) के प्रयोगों में अपना परिचय इस ढाँचे में दिया जाता है: “अमुकप्रवरान्वितामुकगोत्रोत्पन्नोऽमुकशर्माऽहम्” — पहले प्रवर, फिर गोत्र, फिर नाम। गौतम गोत्र वाले परिवार में “अमुक गोत्र” की जगह गौतमआता है, और “अमुक प्रवर” की जगह परिवार का प्रवर — ग्रंथ की तालिका में इसका मुख्य रूप आङ्गिरस, औचथ्य, गौतम है (आश्वलायन, आपस्तम्ब, कात्यायन)। यह नाम ग्रंथ में एक से अधिक गणों में है, इसलिए वही प्रवर लें जो आपका परिवार बोलता है।
ग्रंथ केवल यह ढाँचा देते हैं; प्रवर को वाक्य में जोड़ने का रूप शाखा और परंपरा से बदलता है, इसलिए पूरा संकल्प-वाक्य अपने कुल-पुरोहित से पक्का करें।
