गण 16 — वामदेवाः

वामदेवाः गण गौतम (आङ्गिरस) ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, वामदेव्य, गौतम। सूत्रों में इसके 3 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 3 नाम दर्ज किए हैं।

संक्षेप में

वामदेवाः गण गौतम (आङ्गिरस) ऋषि-कुल का गण है। आश्वलायन के अनुसार इसका प्रवर है — आङ्गिरस, वामदेव्य, गौतम। सूत्रों में इसके 3 और रूप भी मिलते हैं। ग्रंथ ने इस गण में 3 नाम दर्ज किए हैं।

प्रवर

प्रवरऋषिकिस ग्रंथ के अनुसार
आङ्गिरस · वामदेव्य · गौतम3आश्वलायनतालिका का मुख्य
आङ्गिरस · वामदेव · बार्हदुक्थ3आपस्तम्बइस ग्रंथ का मुख्य
आङ्गिरस · गौतम · वामदेव3बौधायनइस ग्रंथ का मुख्य
आङ्गिरस · बार्हदुक्थ · वामदेव्य3मत्स्य पुराणइस ग्रंथ का मुख्य

स्वतंत्र मिलान: The Matsya Puranam, Part 2 (Sacred Books of the Hindus, vol. 17) (1917), अध्याय 196 — “Angira, Brihaduktha, Vamadeva”. यह ऊपर दिए मत्स्य पाठ से मेल खाता है।

इस गण में दर्ज नाम (3)

गोत्र-प्रवर ग्रंथों के अनुसार एक गण के गोत्रों में आपस में विवाह वर्जित माना गया है। सूची ग्रंथ में जैसी छपी है, वैसी ही है। नाम के आगे लिखे संकेत बताते हैं कि वह नाम किस ग्रंथ की सूची में है।

  1. 1बृहदुक्थःम
  2. 2वामदेवःम
  3. 3वामदेवाःआश्व, आप, बो

संकेत: आश्व = आश्वलायन · आप = आपस्तम्ब · बो = बौधायन · का = कात्यायन · म = मत्स्य पुराण.

गौतम (आङ्गिरस)-कुल के अन्य गण

स्रोत

पी. चेन्सल राव (सं.), गोत्रप्रवरनिबन्धकदम्बम् (1900), "प्रवराः, गोत्रगणाश्च", पृष्ठ 226–227 (archive.org leaf 266–267)।