गोत्र और प्रवर में अंतर
इस साइट पर गोत्र और प्रवर का पूरा अंतर गोत्र के मुख्य पृष्ठ पर है; यहाँ केवल विवाह वाला हिस्सा है।
| गोत्र | प्रवर | |
|---|---|---|
| क्या है | वंश का नाम (जैसे वत्स, शाण्डिल्य) | उस वंश के 1, 2, 3 या 5 ऋषियों के नाम |
| संख्या | हज़ारों-करोड़ों (बौधायन) | 49 (बौधायन) |
| कहाँ बोला जाता है | संकल्प, कन्यादान, श्राद्ध | यज्ञ में प्रवरण, अभिवादन, कन्यादान |
| विवाह-नियम में | नाम एक हो तो सगोत्र | गोत्रकार ऋषि साझा हो तो सगोत्र |
अलग गोत्र, एक प्रवर — और उलटा
यस्या वध्वा येन वरेण सह प्रवरैक्यं गोत्रैक्यं वा नास्ति सा वधूस्तेन सह विवाहमर्हति। क्वचिद्गोत्रभेदेऽपि प्रवरैक्यमस्ति… क्वचित्प्रवरभेदेऽपि गोत्रैक्यम्।जिस वधू का जिस वर के साथ न प्रवर एक हो, न गोत्र — वही उससे विवाह के योग्य है। कहीं गोत्र अलग होने पर भी प्रवर एक होता है… और कहीं प्रवर अलग होने पर भी गोत्र एक।
संस्काररत्नमाला के दोनों उदाहरण: वाधूल, मौन और मौक अलग गोत्र हैं, पर तीनों का प्रवर "भार्गव, वैतहव्य, सावेदस" एक है — इसलिए इनमें विवाह नहीं होता। और यौवनाश्व गोत्र "आङ्गिरस, अम्बरीष, यौवनाश्व" और "मान्धाता, अम्बरीष, यौवनाश्व" — दो प्रवरों के साथ भी एक ही गोत्र है।
बौधायन का नियम
एक एव ऋषिर्यावत्प्रवरेष्वनुवर्तते। तावत्समानगोत्रत्वमन्यत्र भृग्वङ्गिरसां गणात्॥सात ऋषियों और आठवें अगस्त्य में से कोई एक ऋषि जब तक दो प्रवरों में साझा हो, तब तक वे समान गोत्र माने जाते हैं — भृगु और आङ्गिरस के गणों को छोड़कर।
इसका सीधा अर्थ: वर और कन्या के प्रवर में अगर विश्वामित्र, जमदग्नि, भरद्वाज, गौतम, अत्रि, वसिष्ठ, कश्यप या अगस्त्य में से कोई एक नाम (उसके प्रवर-रूप में) दोनों जगह आए, तो वे सगोत्र हैं। इसलिए "काश्यप, आवत्सार, नैध्रुव" और "काश्यप, आवत्सार, असित" वाले — गोत्र-नाम अलग होते हुए भी — सगोत्र हैं।
भृगु और आङ्गिरस का अपवाद
प्रवरमञ्जरी (p. 15) के अनुसार जमदग्नि से भिन्न भृगु-गण, और गौतम-भरद्वाज से भिन्न आङ्गिरस-गण, आठ गोत्रकारों की संतान में नहीं गिने जाते। इसलिए उनके प्रवर में केवल "भार्गव" या "आङ्गिरस" साझा होने से वे सगोत्र नहीं होते।
प्रवरमञ्जरी (pp. 3–4) इसे कुल-दर-कुल लिखती है: भृगुओं में वत्स, बिद, आर्ष्टिषेण आपस में विवाह नहीं करते, पर यस्क से वैन्य तक के गण अपना गण छोड़कर सबसे कर सकते हैं; केवल-आङ्गिरसों में हरित और कुत्स आपस में नहीं, पर कण्व आदि कर सकते हैं। बाक़ी सब कुलों में एक कुल के सब गण आपस में विवाह नहीं करते।
अपना प्रवर कैसे मिलाएँ
दोनों परिवारों से पूरा प्रवर (ऋषियों के नाम) पूछें, केवल गोत्र-नाम नहीं। फिर इस साइट के "प्रवर मिलान" tool में दोनों गोत्र डालकर देखें कि कोई गोत्रकार साझा है या नहीं — और अंतिम निर्णय के लिए कुल-पुरोहित से पुष्टि करें।
