ॐ चन्द्रशेखराय नमः

oṃ candraśekharāya namaḥ

Chandrashekhar Mantra (Om Chandrashekharaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार व पूर्णिमा
उद्देश्य:मन की शांति (Peace)स्वास्थ्य (Health)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ चन्द्रशेखराय नमः का अर्थ है “मस्तक पर चंद्र धारण करने वाले शिव को नमस्कार”। शतनामावलियों में यह “शशाङ्कशेखर” व “शशिशेखराय” रूप में मिलता है। परंपरा में इसे मन की चंचलता व चंद्र-दोष की शांति से जोड़ा जाता है; सोमवार और पूर्णिमा इसके जप के लिए विशेष हैं।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: शिव शतनामावली — "शशाङ्कशेखर"; अष्टोत्तर शतनामावली — "शशिशेखराय"

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ चन्द्रशेखराय नमः
IASToṃ candraśekharāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री शिव
मूल स्रोतशिव शतनामावली — "शशाङ्कशेखर"; अष्टोत्तर शतनामावली — "शशिशेखराय"
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष या स्फटिक माला
शुभ दिनसोमवार व पूर्णिमा
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

चन्द्रशेखर अर्थात् "जिनके शिखर (मस्तक) पर चंद्रमा है"। शिव के जटाजूट पर विराजमान द्वितीया का बालचंद्र उनकी शीतलता, संयम और काल-गणना — तीनों का प्रतीक माना जाता है। प्रचंड संहारक होते हुए भी शिव के मस्तक पर चंद्र का होना यही बताता है कि शक्ति और शीतलता एक साथ रह सकती हैं।

परंपरा में इस चंद्र से जुड़ी एक कथा भी कही जाती है — दक्ष के शाप से क्षीण होते चंद्रमा ने शिव की शरण ली और शिव ने उन्हें अपने मस्तक पर धारण कर लिया, जिससे उनका क्षय रुका। इसी कारण ज्योतिष-परंपरा में इस नाम-मंत्र को चंद्र-दोष व मानसिक अस्थिरता की शांति से जोड़ा जाता है, और सोमवार — चंद्र का दिन — इसके जप के लिए विशेष माना जाता है।

मंत्र

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ॐ चन्द्रशेखराय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ चन्द्रशेखराय नमः॥

oṃ candraśekharāya namaḥ ||

Om Chandrashekharaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "चन्द्र" में "न्द्र" संयुक्ताक्षर है — इसे "चन-दर" की तरह न तोड़ें। "शे" में तालव्य "श" है और "खराय" में महाप्राण "ख" स्पष्ट होना चाहिए। हिन्दी में यह प्रायः "चंद्रशेखर" (अनुस्वार सहित) लिखा जाता है; उच्चारण दोनों का एक ही है। स्वर शांत व मधुर रखें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
चन्द्रचंद्रमा
शेखरशिखर, मस्तक का आभूषण
चन्द्रशेखरायमस्तक पर चंद्र धारण करने वाले (शिव) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. चन्द्रशेखर शिव को नमस्कार। जिन्होंने अपने मस्तक पर बालचंद्र को धारण किया है और जो प्रचंड होकर भी चंद्र के समान शीतल हैं — उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे मन की चंचलता व अस्थिरता के शमन से जोड़ा जाता है।
  • ज्योतिष-परंपरा में चंद्र-दोष की शांति हेतु इसका जप बताया जाता है।
  • क्रोध व उत्तेजना में शीतलता आने की मान्यता है।
  • निद्रा-संबंधी बेचैनी में रात्रि-जप प्रचलित है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला

उत्तम समय: सोमवार संध्या व चंद्रोदय काल

जप का उत्तम समय

सोमवार को — चंद्र का दिनपूर्णिमा व प्रदोष काल मेंरात्रि शयन से पूर्वमानसिक अशांति या चंचलता के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शिवलिंग पर शीतल जल व श्वेत पुष्प अर्पित कर, श्वेत आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। सोमवार व पूर्णिमा को चंद्रोदय के समय जप विशेष माना जाता है। जप के समय शिव के मस्तक पर स्थित बालचंद्र का ध्यान करने की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराशिव शतनामावली — नाम "शशाङ्कशेखर" क्रम 82 (drikpanchang) · शिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — नाम 5 "ॐ शशिशेखराय नमः" · चन्द्रशेखराष्टकम् — पारंपरिक शिव स्तोत्र परंपरा
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
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मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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ॐ चन्द्रशेखराय नमः — सामान्य प्रश्न

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