समय
1 मिनट
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
बुधवार, चतुर्थी व गणेश चतुर्थी
उद्देश्य:शुभ आरंभ (Auspicious Start)ज्ञान व विद्या (Knowledge)विघ्न नाश (Removal of Obstacles)
✓ संपूर्ण वैदिक मंत्र
गणपति वैदिक मंत्र “ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे…” ऋग्वेद 2.23.1 की ऋचा है और गणेश का सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध मंत्र माना जाता है। मूल ऋचा का सम्बोधन ब्रह्मणस्पति है, जिसे परंपरा ने गणपति उपासना का वैदिक आधार माना। किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में इसका पाठ किया जाता है।
FAQ
गणपति वैदिक मंत्र — गणानां त्वा — सामान्य प्रश्न
"ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्। ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः सीद सादनम्॥" — यह ऋग्वेद के द्वितीय मण्डल, सूक्त 23, ऋचा 1 है और गणेश का सर्वाधिक प्राचीन उपलब्ध मंत्र माना जाता है।
मूल ऋचा का सम्बोधन "ब्रह्मणस्पति" है — मन्त्रों व ब्रह्म-वाणी के स्वामी। पौराणिक गजमुख गणेश का वर्णन वेद-संहिता में नहीं मिलता। परंपरा ने "गणपति" शब्द के आधार पर इसी ऋचा को गणेश-उपासना का वैदिक मूल माना, और आज यह गणेश-पूजन का प्रथम मंत्र है।
"ॐ गं गणपतये नमः" बीज मंत्र है, जिसमें "गं" बीजाक्षर है। यह पूरी वैदिक ऋचा है, जिसका ऋषि (गृत्समद), छंद और देवता तीनों निर्दिष्ट हैं। इस संग्रह में दोनों के अलग पृष्ठ हैं।
परंपरा में इसे किसी भी मांगलिक कार्य, यज्ञ या पूजा के आरंभ में प्रथम मंत्र के रूप में पढ़ा जाता है। बुधवार, चतुर्थी तिथि और गणेश चतुर्थी विशेष माने जाते हैं।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष या स्फटिक माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः, कार्य आरंभ से पूर्व है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है — प्रतिदिन एक माला, बीच-बीच में छोड़कर की गई अधिक संख्या से श्रेष्ठ कही जाती है।
यह वैदिक मंत्र है। परंपरा में वैदिक मंत्रों को गुरु के मुख से, शुद्ध उच्चारण तथा स्वर सहित सीखना श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि इनमें स्वर का भी विधान होता है। बिना गुरु के केवल भाव सहित पाठ करने का निषेध नहीं कहा जाता, किंतु विधिवत जप के लिए सीखना उत्तम बताया गया है।
यह अनुष्टुप् नहीं, जगती छंद की ऋचा है — इसे लय के साथ, ठहरकर पढ़ें। परंपरा में कहा जाता है कि मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
पर्व
