ॐ कैलाशपतये नमः

oṃ kailāśapataye namaḥ

Kailashpati Mantra (Om Kailashpataye Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार व प्रदोष
उद्देश्य:मन की शांति (Peace)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)मोक्ष (Liberation)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ कैलाशपतये नमः का अर्थ है “कैलाश के स्वामी शिव को नमस्कार”। शतनामावली में इस भाव का नाम “कैलासवासिने” (क्रम 35) मिलता है; “कैलाशपति” लोक-भक्ति का प्रचलित संबोधन है। परंपरा में इसे चित्त की निर्मलता व मानसिक स्थिरता से जोड़ा जाता है।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: लोक-प्रचलित शिव नाम-मंत्र; शतनामावली में सम-भाव नाम "कैलासवासिने"

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ कैलाशपतये नमः
IASToṃ kailāśapataye namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री शिव
मूल स्रोतलोक-प्रचलित शिव नाम-मंत्र; शतनामावली में सम-भाव नाम "कैलासवासिने"
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनसोमवार व प्रदोष
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

कैलाशपति अर्थात् "कैलाश के स्वामी"। कैलाश पर्वत परंपरा में शिव का नित्य निवास माना जाता है — वह स्थान जहाँ वे माता पार्वती सहित विराजते हैं और जहाँ से सृष्टि का संचालन होता है। हिमालय की जिस चोटी को आज कैलाश कहा जाता है, वह तिब्बत में मानसरोवर के निकट स्थित है और आज भी अनारोहित है; परिक्रमा ही वहाँ की परंपरा है, आरोहण नहीं।

प्रतीक-रूप में कैलाश को चित्त की उस अवस्था का द्योतक माना जाता है जो हिम की भाँति निर्मल, स्थिर और शीतल है। शतनामावली में इस भाव का नाम "कैलासवासिने" (कैलास में निवास करने वाले) रूप में मिलता है, जबकि "कैलाशपति" लोक-भक्ति का प्रचलित संबोधन है — भजनों व आरतियों में यही अधिक सुनाई देता है।

मंत्र

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ॐ कैलाशपतये नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ कैलाशपतये नमः॥

oṃ kailāśapataye namaḥ ||

Om Kailashpataye Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "कै" द्विस्वर है (क् + ऐ) — इसे "के" न बनाएँ। "ला" दीर्घ। अंत में यह "कैलाशपतये" है, "कैलाशपताय" नहीं — "पति" का चतुर्थी रूप "पतये" बनता है। वर्तनी की एक बात और: शास्त्रीय संस्कृत में यह "कैलास" (स-कार) है, हिन्दी में "कैलाश" (श-कार) प्रचलित हो गया — दोनों एक ही पर्वत के नाम हैं।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
कैलाशकैलाश पर्वत — शिव का निवास
पतिस्वामी, अधिपति
कैलाशपतयेकैलाश के स्वामी (शिव) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. कैलाशपति शिव को नमस्कार। जो कैलाश पर्वत के स्वामी हैं और वहाँ माता पार्वती सहित विराजमान रहते हैं — उन महादेव को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे चित्त की निर्मलता व स्थिरता से जोड़ा जाता है।
  • कैलाश-मानसरोवर यात्रा के संकल्प के साथ जप प्रचलित है।
  • मानसिक ताप व बेचैनी के शमन की मान्यता है।
  • भजन-कीर्तन में सर्वाधिक प्रयुक्त शिव संबोधनों में से एक है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: प्रातः व प्रदोष काल

जप का उत्तम समय

प्रातः स्नान के बाद ध्यान के समयसोमवार व प्रदोष काल मेंमहाशिवरात्रि व श्रावण मास मेंकैलाश-मानसरोवर यात्रा-संकल्प पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शिवलिंग पर शीतल जल व बिल्वपत्र अर्पित कर, स्थिर आसन पर बैठकर रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। जप के समय कैलाश पर्वत पर समाधिस्थ शिव व पार्वती का ध्यान करने की परंपरा है। भजन व कीर्तन के साथ सामूहिक जप भी प्रचलित है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराशिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — सम-भाव नाम 35 "ॐ कैलासवासिने नमः" · लोक-प्रचलित शिव भजन व आरती परंपरा — संबोधन "कैलाशपति"
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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ॐ कैलाशपतये नमः — सामान्य प्रश्न

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