समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार व प्रदोष
उद्देश्य:आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)रक्षा (Protection)समृद्धि (Prosperity)
✓ संपूर्ण नाम जाप
ॐ महेश्वराय नमः शिव अष्टोत्तर शतनामावली का नाम 2 है — “ॐ शिवाय नमः” के ठीक बाद। “महा” व “ईश्वर” से बने इस नाम का अर्थ है महान ईश्वर। परंपरा में यह दैनिक शिव उपासना का सबसे सुलभ नाम-मंत्र माना जाता है; इसके जप के लिए किसी विशेष दीक्षा की अनिवार्यता नहीं बताई जाती।
FAQ
ॐ महेश्वराय नमः — सामान्य प्रश्न
महेश्वर "महा" और "ईश्वर" की संधि से बना है, अर्थात् "महान ईश्वर" या सर्वोच्च अधिपति। यह नाम शिव के ऐश्वर्य और अधिपत्य का द्योतक है और शिव अष्टोत्तर शतनामावली में क्रम 2 पर — "ॐ शिवाय नमः" के ठीक बाद — आता है।
अर्थ में कोई भेद नहीं। "महेश" इसी नाम का संक्षिप्त रूप है और शिव शतनामावली में क्रम 62 पर आता है, जबकि "महेश्वर" पूर्ण रूप है। त्रिदेवों के संदर्भ में — ब्रह्मा, विष्णु, महेश — प्रायः संक्षिप्त रूप ही प्रयुक्त होता है।
हाँ। यह सामान्य दैनिक शिव उपासना का नाम-मंत्र माना जाता है और इसके जप के लिए परंपरा में किसी विशेष विधान या दीक्षा की अनिवार्यता नहीं बताई जाती। स्नान, स्वच्छ वस्त्र और स्थिर आसन पर्याप्त कहे जाते हैं।
"ॐ नमः शिवाय" पंचाक्षरी महामंत्र है, जिसका मूल श्री रुद्रम् (यजुर्वेद) में मिलता है। "ॐ महेश्वराय नमः" शतनामावली का नाम-मंत्र है। दोनों शिव-उपासना के मंत्र हैं; पंचाक्षरी को परंपरा में अधिक व्यापक व प्रधान माना जाता है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः व प्रदोष काल है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है — प्रतिदिन एक माला, बीच-बीच में छोड़कर की गई अधिक संख्या से श्रेष्ठ कही जाती है।
यह नाम-मंत्र है, अर्थात इष्ट के नाम का जप। परंपरा में नाम-जप के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं मानी जाती — इसे स्त्री-पुरुष, किसी भी आयु व किसी भी वर्ग का व्यक्ति श्रद्धापूर्वक जप सकता है। यही नाम-मार्ग की विशेषता कही जाती है कि इसमें पात्रता की शर्त भाव है, विधि नहीं।
"महेश्वराय" में "म-हे-श्व-राय" चार अंश हैं। परंपरा में कहा जाता है कि मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
पर्व
