ॐ शम्भवे नमः

oṃ śambhave namaḥ

Shambhu Mantra (Om Shambhave Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार व प्रदोष
उद्देश्य:मन की शांति (Peace)आनंद व सुख (Wellbeing)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ शम्भवे नमः शिव अष्टोत्तर शतनामावली का नाम 3 है, जिसका अर्थ है “सुख के स्रोत को नमस्कार”। “शम्” अर्थात् कल्याण और “भू” अर्थात् उत्पन्न करने वाला। शुद्ध रूप “शम्भवे” है, “शम्भवाय” नहीं — क्योंकि “शम्भु” उकारान्त शब्द है। यह शिव के सौम्य स्वरूप का नाम है।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: शिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — नाम 3

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ शम्भवे नमः
IASToṃ śambhave namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री शिव
मूल स्रोतशिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — नाम 3
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनसोमवार व प्रदोष
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

शम्भु शब्द "शम्" और "भू" से बना है — "शम्" अर्थात् सुख, कल्याण, शांति; और "भू" अर्थात् उत्पन्न करने वाला। इस प्रकार शम्भु वे हैं जिनसे सुख उत्पन्न होता है, जो आनंद के स्रोत हैं। "शङ्कर" (कल्याण करने वाले) से यह नाम भाव में बहुत निकट है और अष्टोत्तर शतनामावली में दोनों एक ही सूची में आते हैं।

यह नाम शिव के प्रसन्न, सौम्य और आनंदमय स्वरूप की ओर संकेत करता है — उग्र या संहारक स्वरूप की ओर नहीं। परंपरा में शम्भु का स्मरण उस भाव से किया जाता है जिसमें भक्त शिव से भय नहीं, सुख की अपेक्षा रखता है। शिव-भजनों व लोकगीतों में "शम्भु" संबोधन बहुत प्रचलित है, और यह नाम शतनामावली में तीसरे ही स्थान पर आ जाता है।

मंत्र

PDF डाउनलोड

ॐ शम्भवे नमः॥

लिपि बदलने के लिए ऊपर देवनागरी / IAST / Roman चुनें।

उच्चारण (Pronunciation)

ॐ शम्भवे नमः॥

oṃ śambhave namaḥ ||

Om Shambhave Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: सबसे बड़ी सावधानी अंत में है — यह "शम्भवे" है, "शम्भवाय" या "शम्भुवे" नहीं। "शम्भु" उकारान्त शब्द है, इसलिए उसका चतुर्थी रूप "शम्भवे" बनता है। "श" तालव्य है और "म्भ" में महाप्राण "भ" स्पष्ट सुनाई देना चाहिए। पूरा रूप "शम्-भ-वे न-मः" — मधुर व प्रसन्न स्वर में दोहराएँ।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
शम्सुख, कल्याण, शांति
भूउत्पन्न करने वाला
शम्भवेसुख के स्रोत (शिव) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. शम्भु को नमस्कार। जिनसे सुख व कल्याण उत्पन्न होता है, जो स्वयं आनंद के स्रोत हैं — उन शिव को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे मन में प्रसन्नता व सौम्य भाव जगाने वाला मंत्र माना जाता है।
  • उदासी, निराशा व मानसिक भारीपन में जप प्रचलित है।
  • गृह में सुख-शांति के संकल्प के साथ जपा जाता है।
  • भय-रहित, प्रेमपूर्ण शिव-उपासना का सरल मंत्र कहा जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

प्रातः व संध्या नित्य पूजा मेंसोमवार व प्रदोष काल मेंमहाशिवरात्रि व श्रावण मास मेंउदासी या मानसिक अशांति के समय

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शिवलिंग पर जल, बिल्वपत्र व श्वेत पुष्प अर्पित कर रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। यह सौम्य भाव का मंत्र है, इसलिए परंपरा में इसे कठोर नियम या उग्र संकल्प के साथ नहीं, बल्कि सहज प्रसन्न मन से जपने को कहा जाता है। भजन-कीर्तन के साथ सामूहिक जप भी प्रचलित है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराशिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — नाम 3 "ॐ शम्भवे नमः"
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
सभी पाठ देखें

ॐ शम्भवे नमः — सामान्य प्रश्न

श्री शिव भक्ति संग्रह

आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ