ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये

oṃ namo bhagavate dakṣiṇāmūrtaye

Dakshinamurti Mantra (Medha Dakshinamurti Mantra)

समय
45 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
गुरुवार व सोमवार
उद्देश्य:ज्ञान व विद्या (Knowledge)परीक्षा सफलता (Exam Success)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये शिव के गुरु-स्वरूप का मंत्र है; पूर्ण रूप में इसके साथ “मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा” भी आता है। परंपरा में इसे मेधा, स्मरण-शक्ति व प्रज्ञा से जोड़ा जाता है, इसलिए विद्यार्थियों व साधकों में इसका जप प्रचलित है। गुरुवार विशेष माना जाता है।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: पारंपरिक मेधा दक्षिणामूर्ति मंत्र — शिव का गुरु स्वरूप

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये
IASToṃ namo bhagavate dakṣiṇāmūrtaye
प्रकारनाम जाप
देवताश्री शिव
मूल स्रोतपारंपरिक मेधा दक्षिणामूर्ति मंत्र — शिव का गुरु स्वरूप
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष या स्फटिक माला
शुभ दिनगुरुवार व सोमवार
पाठ समय45 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

दक्षिणामूर्ति शिव का गुरु-स्वरूप है। इस रूप में वे दक्षिण दिशा की ओर मुख किए, वटवृक्ष के नीचे मौन बैठे हैं और उनके समक्ष बैठे वृद्ध ऋषि-शिष्यों को वे बिना एक शब्द बोले ज्ञान दे रहे हैं। हाथ की चिन्मुद्रा ही उनका उपदेश है — यही परंपरा में "मौन व्याख्या" कही जाती है, जहाँ सर्वोच्च सत्य शब्दों से नहीं, बोध से सम्प्रेषित होता है।

यह स्वरूप शैव परंपरा में विद्या, स्मृति और विवेक का अधिष्ठाता माना जाता है, इसीलिए इसका मंत्र "मेधा दक्षिणामूर्ति मंत्र" कहलाता है — मेधा अर्थात् धारण-शक्ति व बुद्धि। विद्यार्थी, शिक्षक और साधक — तीनों में इसका जप प्रचलित है। आदि शंकराचार्य कृत "दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम्" इसी स्वरूप की सर्वप्रसिद्ध स्तुति है।

मंत्र

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ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये। मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्तये। मह्यं मेधां प्रज्ञां प्रयच्छ स्वाहा॥

oṃ namo bhagavate dakṣiṇāmūrtaye | mahyaṃ medhāṃ prajñāṃ prayaccha svāhā ||

Om Namo Bhagavate Dakshinamurtaye, Mahyam Medham Prajnam Prayachchha Swaha.

उच्चारण मार्गदर्शन: "दक्षिणामूर्तये" इस मंत्र का सबसे लंबा पद है — इसे "दक्-षि-णा-मूर्-त-ये" के छह अंशों में तोड़कर अभ्यास करें; "णा" और "मूर्" दोनों दीर्घ हैं। अंत "मूर्तये" है, "मूर्ताय" नहीं। दूसरी पंक्ति में "प्रज्ञां" के "ज्ञ" को हिन्दी की तरह "ग्य" बोलना सामान्य है और स्वीकार्य माना जाता है। "स्वाहा" को दीर्घ व स्पष्ट छोड़ें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
नमोनमस्कार
भगवतेभगवान को
दक्षिणामूर्तयेदक्षिणामूर्ति (शिव के गुरु स्वरूप) को
मह्यंमुझे
मेधांधारण-शक्ति, स्मरण-शक्ति
प्रज्ञांविवेकपूर्ण बुद्धि
प्रयच्छप्रदान कीजिए
स्वाहाआहुति-समर्पण का वाचक पद

अर्थ (हिन्दी)

  1. भगवान दक्षिणामूर्ति को नमस्कार। हे प्रभु, मुझे मेधा (धारण-शक्ति) और प्रज्ञा (विवेकपूर्ण बुद्धि) प्रदान कीजिए — यह आहुति आपको समर्पित है।

लाभ

  • परंपरा में इसे स्मरण-शक्ति व धारण-क्षमता बढ़ाने वाला मंत्र माना जाता है।
  • विद्यार्थियों में परीक्षा व अध्ययन की सफलता हेतु इसका जप प्रचलित है।
  • विवेक व निर्णय-शक्ति में स्पष्टता आने की मान्यता है।
  • गुरु-कृपा व आत्म-बोध के मार्ग का मंत्र कहा जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष या स्फटिक माला

उत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त व गुरुवार प्रातः

जप का उत्तम समय

गुरुवार को — गुरु का दिनप्रातः अध्ययन आरंभ करने से पूर्वपरीक्षा या साक्षात्कार से पहलेगुरु पूर्णिमा पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

प्रातः स्नान के बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें, दक्षिणामूर्ति के चित्र या शिवलिंग के समक्ष दीपक जलाएँ और रुद्राक्ष या स्फटिक माला से 108 बार जप करें। विद्यार्थियों के लिए अध्ययन आरंभ करने से पूर्व 11 या 21 बार जप की परंपरा भी बताई जाती है। जप के समय मौन, स्थिर आसन और एकाग्र दृष्टि पर विशेष बल दिया जाता है — क्योंकि यह मौन-गुरु का मंत्र है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपरादक्षिणामूर्ति शिव मंत्र — drikpanchang (पूर्ण पाठ; किसी ग्रन्थ का नाम वहाँ नहीं दिया गया) · दक्षिणामूर्ति स्तोत्रम् — आदि शंकराचार्य (स्वरूप का शास्त्रीय आधार) · दक्षिणामूर्ति उपनिषद् — कृष्ण यजुर्वेद की शैव उपनिषदों में से एक (स्वरूप-वर्णन)
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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