समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार, प्रदोष व गंगा दशहरा
उद्देश्य:मन की शांति (Peace)शुद्धि व मोक्ष (Liberation)रक्षा (Protection)
✓ संपूर्ण नाम जाप
ॐ गङ्गाधराय नमः शिव अष्टोत्तर शतनामावली का नाम 27 है, जिसका अर्थ है “गंगा को धारण करने वाले को नमस्कार”। भगीरथ की तपस्या से उतरती गंगा का वेग शिव ने जटाओं में रोका था। परंपरा में इसे शुद्धि, धैर्य व पितृ-तर्पण से जोड़ा जाता है। हिन्दी में “गंगाधराय” वर्तनी भी शुद्ध है।
FAQ
ॐ गङ्गाधराय नमः — सामान्य प्रश्न
क्योंकि उन्होंने गंगा को अपने जटाजूट में धारण किया। परंपरा के अनुसार भगीरथ की तपस्या से गंगा स्वर्ग से उतरीं, पर उनका वेग पृथ्वी सह नहीं सकती थी। शिव ने उन्हें जटाओं में रोककर वेग शांत किया और फिर धीरे-धीरे प्रवाहित होने दिया।
परंपरा में इसे मन व आचरण की शुद्धि, आवेग के शमन और कठिन संकल्पों में धैर्य से जोड़ा जाता है। पितृ-तर्पण व श्राद्ध-कर्म के संकल्प के साथ भी इसका जप प्रचलित है।
कोई अर्थभेद नहीं। "गङ्गाधराय" संस्कृत की शास्त्रीय वर्तनी है (शिव अष्टोत्तर शतनामावली, क्रम 27) और "गंगाधराय" उसी का हिन्दी में अनुस्वार-सहित प्रचलित रूप। उच्चारण दोनों का एक ही है।
परंपरा में सोमवार, प्रदोष काल, श्रावण मास और गंगा दशहरा विशेष माने जाते हैं। गंगा या किसी पवित्र नदी के तट पर स्नान के बाद किया गया जप भी उत्तम कहा गया है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए रुद्राक्ष माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः स्नान के बाद व प्रदोष काल है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है — प्रतिदिन एक माला, बीच-बीच में छोड़कर की गई अधिक संख्या से श्रेष्ठ कही जाती है।
यह नाम-मंत्र है, अर्थात इष्ट के नाम का जप। परंपरा में नाम-जप के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं मानी जाती — इसे स्त्री-पुरुष, किसी भी आयु व किसी भी वर्ग का व्यक्ति श्रद्धापूर्वक जप सकता है। यही नाम-मार्ग की विशेषता कही जाती है कि इसमें पात्रता की शर्त भाव है, विधि नहीं।
"गङ्" में "ङ्" नासिक्य कंठ्य वर्ण है — हिन्दी में यही ध्वनि "गं" से निकलती है, इसलिए बोलने में कोई कठिनाई नहीं। परंपरा में कहा जाता है कि मंत्र-जप में शुद्ध उच्चारण का विशेष महत्व है, इसलिए आरंभ में धीरे-धीरे व स्पष्ट बोलकर अभ्यास करें और गति बाद में बढ़ाएँ।
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