ॐ पशुपतये नमः

oṃ paśupataye namaḥ

Pashupati Mantra (Om Pashupataye Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
सोमवार व प्रदोष
उद्देश्य:मोक्ष (Liberation)रक्षा (Protection)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ पशुपतये नमः शिव अष्टोत्तर शतनामावली का नाम 92 है, जिसका अर्थ है “जीवों के स्वामी को नमस्कार”। शैव दर्शन में “पशु” बंधन में बँधा जीव है और “पति” शिव। काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर की उपासना में यह मूल जप-मंत्र है। शुद्ध रूप “पशुपतये” है, “पशुपताय” नहीं।

परिचय

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

स्रोत: शिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — नाम 92

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ पशुपतये नमः
IASToṃ paśupataye namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री शिव
मूल स्रोतशिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — नाम 92
जप संख्या108
मालारुद्राक्ष माला
शुभ दिनसोमवार व प्रदोष
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

पशुपति अर्थात् "पशुओं के स्वामी"। पर यहाँ "पशु" का अर्थ केवल मूक प्राणी नहीं है। शैव दर्शन में तीन तत्त्व माने जाते हैं — पति (शिव), पशु (जीव) और पाश (बंधन)। जो जीव अज्ञान, मोह व कर्म के पाश में बँधा है वही "पशु" है, और उसे इस बंधन से मुक्त करने वाले स्वामी "पशुपति" कहलाते हैं। इसी कारण यह नाम शैव सिद्धांत का मूल नाम माना जाता है।

इस नाम की प्रसिद्ध पीठ नेपाल के काठमांडू में स्थित श्री पशुपतिनाथ मंदिर है, जो बागमती नदी के तट पर है और उपमहाद्वीप के प्राचीनतम शिव-स्थलों में गिना जाता है। शतनामावली में इस नाम के ठीक निकट "पाशविमोचकाय" (पाश से मुक्त करने वाले) नाम भी आता है — दोनों नाम मिलकर एक ही भाव पूरा करते हैं।

मंत्र

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ॐ पशुपतये नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ पशुपतये नमः॥

oṃ paśupataye namaḥ ||

Om Pashupataye Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "प-शु" में "श" तालव्य है ("पसु" नहीं)। सबसे बड़ी सावधानी अंत में है — यह "पशुपताय" नहीं, "पशुपतये" है, क्योंकि "पति" शब्द का चतुर्थी रूप "पतये" बनता है। "प-शु-प-त-ये न-मः" — सभी अक्षर सम मात्रा में, शांत स्वर में बोलें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
पशुजीव — जो माया व कर्म के बंधन में है
पतिस्वामी, रक्षक
पशुपतयेजीवों के स्वामी को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. पशुपति शिव को नमस्कार। जो समस्त जीवों के स्वामी हैं और उन्हें अज्ञान व कर्म के पाश से मुक्त करते हैं — उन्हें मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • शैव परंपरा में इसे माया व कर्म-बंधन से मुक्ति का मंत्र माना जाता है।
  • मन के भय, मोह व आसक्ति के शमन की मान्यता है।
  • पशु-धन व जीव-मात्र की रक्षा के संकल्प के साथ भी जपा जाता है।
  • पशुपतिनाथ उपासना में यह मूल जप-मंत्र माना जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: रुद्राक्ष माला

उत्तम समय: प्रातः व प्रदोष काल

जप का उत्तम समय

सोमवार व प्रदोष काल मेंप्रातः व संध्या वंदन के साथमहाशिवरात्रि परपशुपतिनाथ दर्शन या यात्रा-संकल्प पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शिवलिंग पर जल व बिल्वपत्र चढ़ाकर, आसन पर बैठकर रुद्राक्ष माला से 108 बार जप करें। शैव परंपरा में इसे भस्म-धारण के साथ जपने का विधान बताया जाता है। जप के समय "पशु-पाश-पति" के भाव पर मन टिकाना — अर्थात् अपने बंधनों को शिव को समर्पित करना — मुख्य माना गया है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराशिव अष्टोत्तर शतनामावली (शक्तिप्रमोद) — नाम 92 "ॐ पशुपतये नमः" · शिव शतनामावली — नाम "पशुनाम्पतये" क्रम 23 (drikpanchang) · श्री पशुपतिनाथ उपासना परंपरा, काठमांडू
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री शिव

Lord Shiva

महादेव शिव त्रिदेवों में संहारक और कल्याणकारी देव हैं — योग, ध्यान और मोक्ष के अधिपति।

देवता वर्गसंहार · योग · ध्यान · कल्याण · मोक्ष
वाहननंदी (वृषभ)
संबंधित वारसोमवार
मुख्य मंत्रॐ नमः शिवाय
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ॐ पशुपतये नमः — सामान्य प्रश्न

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