श्री साईं बाबा अष्टोत्तर शतनामावली

śrī sāī bābā aṣṭottara śatanāmāvalī

Shri Sai Baba Ashtottara Shatanamavali (108 Names)

समय
8–10 मिनट
कुल नाम
108
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
गुरुवार; नौ गुरुवार का साईं व्रत; रामनवमी, गुरुपूर्णिमा व विजयादशमी
उद्देश्य:श्रद्धा-सबूरी (Faith & Patience)कष्ट-निवारण (Relief from Suffering)आरोग्य (Health)
✓ संपूर्ण

श्री साईं बाबा अष्टोत्तर शतनामावली शिरडी साईं बाबा के 108 नामों की सूची है, जो श्री सायिनाथ से आरंभ होकर श्रीसमर्थसद्गुरुसायिनाथ पर समाप्त होती है। इसमें नाम 97 समसर्वमतसम्मत (समस्त मतों में समान रूप से सम्मत) है — सर्वधर्म-समभाव का सीधा कथन। पाठ 8–10 मिनट का है।

परिचय

शिरडी के साईं बाबा श्रद्धा और सबूरी के संत हैं — सर्वधर्म समभाव और सेवा के प्रतीक।

स्रोत: शिरडी साईं बाबा की 108 नामों की सूची — सायिनाथ से आरंभ, श्रीसमर्थसद्गुरुसायिनाथ पर समाप्त

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री साईं बाबा अष्टोत्तर शतनामावली
IASTśrī sāī bābā aṣṭottara śatanāmāvalī
देवताश्री साईं बाबा
मूल स्रोतशिरडी साईं बाबा की 108 नामों की सूची — सायिनाथ से आरंभ, श्रीसमर्थसद्गुरुसायिनाथ पर समाप्त
शुभ दिनगुरुवार; नौ गुरुवार का साईं व्रत; रामनवमी, गुरुपूर्णिमा व विजयादशमी
पाठ समय8–10 मिनट
कठिनाईसरल (Beginner)

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री साईं बाबा अष्टोत्तर शतनामावली शिरडी के साईं बाबा के 108 नामों की सूची है, और यह शिरडी की नित्य पूजा-पद्धति में प्रयुक्त होने वाली सूची है। नामावली-रूप में हर नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना — प्रत्येक नाम पर एक पीत पुष्प अर्पित करना — तथा माला-जप, दोनों के लिए उपयुक्त है।

सबसे पहले एक भ्रम दूर कर देना आवश्यक है, क्योंकि वह बहुत होता है: शिरडी साईं और सत्य साईं भिन्न व्यक्ति हैं, और उनकी 108-सूचियाँ भी भिन्न हैं। इंटरनेट पर दोनों की सामग्री प्रायः एक ही वर्ग में साथ-साथ रखी मिलती है। यह सूची शिरडी साईं बाबा की है, और इसका आंतरिक प्रमाण नाम 5 है — गोदावरीतटशिरडीवासी, अर्थात *गोदावरी के तट पर शिरडी में निवास करने वाले*।

इस सूची की सबसे उल्लेखनीय बात नाम 97 है — समसर्वमतसम्मत, अर्थात *समस्त मतों में समान रूप से सम्मत*। किसी 108-सूची में सर्वधर्म-समभाव का इतना सीधा कथन विरल है, और यह शिरडी परंपरा का केंद्रीय भाव भी है: बाबा हिंदू और मुसलमान दोनों के लिए समान रहे, मस्जिद में रहे और धूनी जलाई। इसी के साथ नाम 107 आता है — समरसन्मार्गस्थापन, अर्थात *सम-रस सन्मार्ग की स्थापना करने वाले*। सूची अंत में यही कहती है कि उनका काम कोई नया मत खड़ा करना नहीं, मतों के बीच समरसता लाना था।

दूसरी परत समावेश की है, और वह आरंभ में ही आ जाती है — नाम 2 लक्ष्मीनारायण, नाम 3 कृष्णरामशिवमारुत्यादिरूप (कृष्ण, राम, शिव व मारुति आदि के रूप वाले), नाम 4 शेषशायी, और आगे नाम 78 वासुदेव तथा नाम 98 श्रीदक्षिणामूर्ति। सूची उन्हें किसी एक संप्रदाय में नहीं बाँधती।

तीसरी परत सबसे मार्मिक है, और वह भक्त-सम्बन्ध की है। नाम 43 है भक्तपराधीन — *भक्तों के अधीन रहने वाले*; और उसके ठीक आगे नाम 44 भक्तानुग्रहकातर — *भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए व्याकुल*। "कातर" शब्द असाधारण है: वह विवशता का शब्द है, महिमा का नहीं। इसी क्रम में नाम 20 भक्तावनप्रतिज्ञ (भक्तों की रक्षा की प्रतिज्ञा करने वाले), नाम 72 असहायसहाय (असहायों के सहाय) तथा नाम 73 अनाथनाथदीनबन्धु आते हैं।

चौथी परत बहुत ठोस है, और वह इस सूची को अन्य देव-नामावलियों से अलग करती है — यहाँ रोज़मर्रा की चीज़ें माँगी गई हैं। नाम 21 अन्नवस्त्रद (अन्न और वस्त्र देने वाले), नाम 22 आरोग्यक्षेमद, नाम 23 धनमाङ्गल्यप्रद, नाम 25 पुत्रमित्रकलत्रबन्धुद और नाम 26 योगक्षेमवह। यह सूची अमूर्त मोक्ष से पहले भोजन और कपड़ा माँगती है — और यह शिरडी की स्मृति के अनुरूप भी है, जहाँ बाबा स्वयं भिक्षा माँगकर बाँटते थे।

दो नाम दर्शन की दृष्टि से चौंकाते हैं। नाम 65 अरूपव्यक्त — *रूप-रहित होकर भी व्यक्त*; और नाम 71 सुलभदुर्लभ — *सुलभ भी और दुर्लभ भी*। सूची विरोध को छिपाती नहीं, एक ही नाम में रख देती है।

और अंत — 108वाँ नाम श्रीसमर्थसद्गुरुसायिनाथ है। सूची जिस नाम से आरंभ हुई थी (श्री सायिनाथ), उसी पर लौट आती है — पर अब उसके आगे समर्थ और सद्गुरु जुड़ चुके हैं।

एक बात स्पष्ट कह देनी चाहिए: यह रचना आधुनिक है। शिरडी साईं बाबा 20वीं सदी के संत हैं (महासमाधि 1918), अतः यह नामावली किसी पुराण से नहीं आती। इससे इसकी प्रामाणिकता कम नहीं होती — यह छपी हुई और नित्य पूजा में प्रयुक्त सूची है — पर उसका सही परिचय यही है।

नाम सूची (Name List)

लिपि:

रूप व काल — सायिनाथ, शिरडीवासी से आपद्बान्धव (नाम 1–27)

  1. 1.
    ॐ श्री सायिनाथाय नमःसाईं जो स्वामी हैं — मूल नाम
  2. 2.
    ॐ लक्ष्मीनारायणाय नमःलक्ष्मीनारायण-स्वरूप
  3. 3.
    ॐ कृष्णरामशिवमारुत्यादिरूपाय नमःकृष्ण, राम, शिव तथा मारुति आदि के रूप वाले
  4. 4.
    ॐ शेषशायिने नमःशेष-शय्या पर शयन करने वाले
  5. 5.
    ॐ गोदावरीतटशिरडीवासिने नमःगोदावरी के तट पर शिरडी में निवास करने वाले
  6. 6.
    ॐ भक्तहृदालयाय नमःभक्तों के हृदय ही जिनका आलय है
  7. 7.
    ॐ सर्वहृन्निलयाय नमःसमस्त प्राणियों के हृदय में निवास करने वाले
  8. 8.
    ॐ भूतावासाय नमःसमस्त भूतों के निवास
  9. 9.
    ॐ भूतभविष्यद्भाववर्जिताय नमःभूत, भविष्य तथा वर्तमान भाव से रहित
  10. 10.
    ॐ कालातीताय नमःकाल से अतीत
  11. 11.
    ॐ कालाय नमःकाल-स्वरूप
  12. 12.
    ॐ कालकालाय नमःकाल के भी काल
  13. 13.
    ॐ कालदर्पदमनाय नमःकाल के दर्प का दमन करने वाले
  14. 14.
    ॐ मृत्युञ्जयाय नमःमृत्यु को जीतने वाले
  15. 15.
    ॐ अमर्त्याय नमःअमर्त्य; मृत्यु-रहित
  16. 16.
    ॐ मर्त्याभयप्रदाय नमःमर्त्यों को अभय देने वाले
  17. 17.
    ॐ जीवाधाराय नमःजीवों के आधार
  18. 18.
    ॐ सर्वाधाराय नमःसबके आधार
  19. 19.
    ॐ भक्तावसनसमर्थाय नमःभक्तों के संकट में समर्थ
  20. 20.
    ॐ भक्तावनप्रतिज्ञाय नमःभक्तों की रक्षा की प्रतिज्ञा करने वाले
  21. 21.
    ॐ अन्नवस्त्रदाय नमःअन्न तथा वस्त्र देने वाले
  22. 22.
    ॐ आरोग्यक्षेमदाय नमःआरोग्य तथा क्षेम देने वाले
  23. 23.
    ॐ धनमाङ्गल्यप्रदाय नमःधन तथा मंगल देने वाले
  24. 24.
    ॐ ऋद्धिसिद्धिदाय नमःऋद्धि व सिद्धि देने वाले
  25. 25.
    ॐ पुत्रमित्रकलत्रबन्धुदाय नमःपुत्र, मित्र, पत्नी तथा बंधु देने वाले
  26. 26.
    ॐ योगक्षेमवहाय नमःयोग-क्षेम का वहन करने वाले
  27. 27.
    ॐ आपद्बान्धवाय नमःआपत्ति में बंधु

भक्त-सम्बन्ध — भक्तपराधीन, शरणागतवत्सल व कर्मध्वंसी (नाम 28–54)

  1. 28.
    ॐ मार्गबन्धवे नमःमार्ग में बंधु
  2. 29.
    ॐ भुक्तिमुक्तिस्वर्गापवर्गदाय नमःभुक्ति, मुक्ति, स्वर्ग तथा अपवर्ग देने वाले
  3. 30.
    ॐ प्रियाय नमःप्रिय
  4. 31.
    ॐ प्रीतिवर्धनाय नमःप्रीति की वृद्धि करने वाले
  5. 32.
    ॐ अन्तर्यामिने नमःअंतर्यामी
  6. 33.
    ॐ सच्चिदात्मने नमःसत्-चित् आत्मा वाले
  7. 34.
    ॐ नित्यानन्दाय नमःनित्य आनंद-स्वरूप
  8. 35.
    ॐ परमसुखदाय नमःपरम सुख देने वाले
  9. 36.
    ॐ परमेश्वराय नमःपरमेश्वर
  10. 37.
    ॐ परब्रह्मणे नमःपरब्रह्म
  11. 38.
    ॐ परमात्मने नमःपरमात्मा
  12. 39.
    ॐ ज्ञानस्वरूपिणे नमःज्ञान के स्वरूप
  13. 40.
    ॐ जगतःपित्रे नमःजगत के पिता
  14. 41.
    ॐ भक्तानाम्मातृदातृपितामहाय नमःभक्तों के लिए माता, दाता तथा पितामह
  15. 42.
    ॐ भक्ताभयप्रदाय नमःभक्तों को अभय देने वाले
  16. 43.
    ॐ भक्तपराधीनाय नमःभक्तों के अधीन रहने वाले
  17. 44.
    ॐ भक्तानुग्रहकातराय नमःभक्तों पर अनुग्रह करने के लिए व्याकुल
  18. 45.
    ॐ शरणागतवत्सलाय नमःशरणागतों पर वात्सल्य रखने वाले
  19. 46.
    ॐ भक्तिशक्तिप्रदाय नमःभक्ति तथा शक्ति देने वाले
  20. 47.
    ॐ ज्ञानवैराग्यदाय नमःज्ञान व वैराग्य देने वाले
  21. 48.
    ॐ प्रेमप्रदाय नमःप्रेम देने वाले
  22. 49.
    ॐ संशयहृदय दौर्बल्य पापकर्मवासनाक्षयकराय नमःसंशय, हृदय की दुर्बलता, पापकर्म तथा वासना का क्षय करने वाले
  23. 50.
    ॐ हृदयग्रन्थिभेदकाय नमःहृदय की ग्रंथि का भेदन करने वाले
  24. 51.
    ॐ कर्मध्वंसिने नमःकर्मों का ध्वंस करने वाले
  25. 52.
    ॐ शुद्धसत्वस्थिताय नमःशुद्ध सत्त्व में स्थित
  26. 53.
    ॐ गुणातीतगुणात्मने नमःगुणों से अतीत होकर भी गुणों की आत्मा वाले
  27. 54.
    ॐ अनन्तकल्याणगुणाय नमःअनंत कल्याणकारी गुणों वाले

तत्त्व-नाम — अरूपव्यक्त, सुलभदुर्लभ व असहायसहाय (नाम 55–81)

  1. 55.
    ॐ अमितपराक्रमाय नमःअपरिमित पराक्रम वाले
  2. 56.
    ॐ जयिने नमःजयशील
  3. 57.
    ॐ दुर्धर्षाक्षोभ्याय नमःजिन्हें न दबाया जा सके और न क्षुब्ध किया जा सके
  4. 58.
    ॐ अपराजिताय नमःअपराजित
  5. 59.
    ॐ त्रिलोकेषु अविघातगतये नमःतीनों लोकों में जिनकी गति अबाध है
  6. 60.
    ॐ अशक्यरहिताय नमःजिनके लिए कुछ भी अशक्य नहीं
  7. 61.
    ॐ सर्वशक्तिमूर्तये नमःसमस्त शक्तियों की मूर्ति
  8. 62.
    ॐ स्वरूपसुन्दराय नमःस्वरूप से ही सुंदर
  9. 63.
    ॐ सुलोचनाय नमःसुंदर नेत्रों वाले
  10. 64.
    ॐ बहुरूपविश्वमूर्तये नमःअनेक रूप वाले विश्व-मूर्ति
  11. 65.
    ॐ अरूपव्यक्ताय नमःरूप-रहित होकर भी व्यक्त
  12. 66.
    ॐ अचिन्त्याय नमःअचिंत्य
  13. 67.
    ॐ सूक्ष्माय नमःसूक्ष्म
  14. 68.
    ॐ सर्वान्तर्यामिने नमःसबके अंतर में रहने वाले
  15. 69.
    ॐ मनोवागतीताय नमःमन तथा वाणी से परे
  16. 70.
    ॐ प्रेममूर्तये नमःप्रेम की मूर्ति
  17. 71.
    ॐ सुलभदुर्लभाय नमःसुलभ भी और दुर्लभ भी
  18. 72.
    ॐ असहायसहायाय नमःअसहायों के सहाय
  19. 73.
    ॐ अनाथनाथदीनबन्धवे नमःअनाथों के नाथ तथा दीनों के बंधु
  20. 74.
    ॐ सर्वभारभृते नमःसमस्त भार वहन करने वाले
  21. 75.
    ॐ अकर्मानेककर्मासुकर्मिणे नमःअकर्म, अनेक कर्म तथा सुकर्म — तीनों के कर्ता
  22. 76.
    ॐ पुण्यश्रवणकीर्तनाय नमःजिनका श्रवण व कीर्तन पुण्यकारी है
  23. 77.
    ॐ तीर्थाय नमःतीर्थ-स्वरूप
  24. 78.
    ॐ वासुदेवाय नमःवासुदेव
  25. 79.
    ॐ सताङ्गतये नमःसज्जनों की गति
  26. 80.
    ॐ सत्परायणाय नमःसत् में परायण
  27. 81.
    ॐ लोकनाथाय नमःलोकों के नाथ

समसर्वमतसम्मत से श्रीसमर्थसद्गुरुसायिनाथ — समापन (नाम 82–108)

  1. 82.
    ॐ पावनानघाय नमःपवित्र करने वाले तथा पाप-रहित
  2. 83.
    ॐ अमृतांशुवे नमःअमृत-किरण वाले; चंद्र-स्वरूप
  3. 84.
    ॐ भास्करप्रभाय नमःसूर्य के समान प्रभा वाले
  4. 85.
    ॐ ब्रह्मचर्यतपश्चर्यादि सुव्रताय नमःब्रह्मचर्य व तपश्चर्या आदि उत्तम व्रतों वाले
  5. 86.
    ॐ सत्यधर्मपरायणाय नमःसत्य तथा धर्म में परायण
  6. 87.
    ॐ सिद्धेश्वराय नमःसिद्धों के ईश्वर
  7. 88.
    ॐ सिद्धसङ्कल्पाय नमःसिद्ध संकल्प वाले
  8. 89.
    ॐ योगेश्वराय नमःयोग के ईश्वर
  9. 90.
    ॐ भगवते नमःभगवान
  10. 91.
    ॐ भक्तवत्सलाय नमःभक्तों पर वात्सल्य रखने वाले
  11. 92.
    ॐ सत्पुरुषाय नमःसत्पुरुष
  12. 93.
    ॐ पुरुषोत्तमाय नमःपुरुषों में उत्तम
  13. 94.
    ॐ सत्यतत्त्वबोधकाय नमःसत्य-तत्त्व का बोध कराने वाले
  14. 95.
    ॐ कामादिषड्वैरिध्वंसिने नमःकाम आदि छहों शत्रुओं का ध्वंस करने वाले
  15. 96.
    ॐ अभेदानन्दानुभवप्रदाय नमःअभेद-आनंद का अनुभव देने वाले
  16. 97.
    ॐ समसर्वमतसम्मताय नमःसमस्त मतों में समान रूप से सम्मत
  17. 98.
    ॐ श्रीदक्षिणामूर्तये नमःश्री दक्षिणामूर्ति-स्वरूप
  18. 99.
    ॐ श्रीवेङ्कटेशरमणाय नमःश्री वेङ्कटेश के रमण
  19. 100.
    ॐ अद्भुतानन्दचर्याय नमःअद्भुत आनंदमय चर्या वाले
  20. 101.
    ॐ प्रपन्नार्तिहराय नमःशरणागतों की पीड़ा हरने वाले
  21. 102.
    ॐ संसारसर्वदुःखक्षयकराय नमःसंसार के समस्त दुःखों का क्षय करने वाले
  22. 103.
    ॐ सर्ववित्सर्वतोमुखाय नमःसर्वज्ञ तथा सब ओर मुख वाले
  23. 104.
    ॐ सर्वान्तर्बहिस्थिताय नमःसबके भीतर तथा बाहर स्थित
  24. 105.
    ॐ सर्वमङ्गलकराय नमःसमस्त मंगल करने वाले
  25. 106.
    ॐ सर्वाभीष्टप्रदाय नमःसमस्त अभीष्ट देने वाले
  26. 107.
    ॐ समरसन्मार्गस्थापनाय नमःसम-रस सन्मार्ग की स्थापना करने वाले
  27. 108.
    ॐ श्रीसमर्थसद्गुरुसायिनाथाय नमःश्री समर्थ सद्गुरु सायिनाथ

अर्थ (हिन्दी)

    लाभ

    • नाम 21–26 में अन्न, वस्त्र, आरोग्य, धन, संतान व योग-क्षेम — यह सूची अमूर्त मोक्ष से पहले रोज़मर्रा की चीज़ें माँगती है।
    • नाम 102 संसारसर्वदुःखक्षयकर तथा नाम 101 प्रपन्नार्तिहर — दुःख-नाश व शरणागत-रक्षा के भाव से पढ़े जाते हैं।
    • नाम 43 भक्तपराधीन तथा 44 भक्तानुग्रहकातर — इस सूची के सबसे मार्मिक नाम, जो कृपा को विवशता की तरह कहते हैं।
    • नाम 97 समसर्वमतसम्मत — सर्वधर्म-समभाव का सीधा कथन; शिरडी परंपरा का केंद्रीय भाव।
    • सहस्रनामावली की तुलना में यह बहुत छोटी है (8–10 मिनट), अतः प्रत्येक गुरुवार पढ़ने के लिए सुविधाजनक।

    कब करें पाठ

    गुरुवार को — शिरडी परंपरा का मुख्य वारनौ गुरुवार के साईं व्रत में प्रतिदिनरामनवमी, गुरुपूर्णिमा तथा विजयादशमी — शिरडी के तीन प्रमुख उत्सवसाईं मंदिर के दर्शन अथवा शिरडी यात्रा के समय

    पाठ विधि

    आरंभ में "ॐ श्री सायिनाथाय नमः" तीन बार कहें — यह इसी सूची का पहला नाम भी है। नामावली-पाठ की परंपरागत विधि अर्चना है: प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ते हुए एक पीत पुष्प, अक्षत अथवा तुलसी-दल अर्पित करते जाना; परंपरा में साईं-पूजन में पीला रंग तथा घी का दीप विशेष माने गए हैं। यदि अर्चना संभव न हो तो तुलसी अथवा रुद्राक्ष माला लेकर जप करें; 108 नाम पूरे होने पर ठीक एक माला पूर्ण होती है। पाठ लगभग 8–10 मिनट में पूर्ण होता है। परंपरा में इसके साथ श्री सायिनाथ अष्टकम्, पञ्चरत्न स्तोत्र अथवा साईं चालीसा पढ़ी जाती है, और अंत में आरती करके ऊदी (धूनी की भस्म) व प्रसाद वितरित किया जाता है।

    प्रामाणिकता व स्रोत

    स्थिति✓ संपूर्ण
    मूल ग्रंथशिरडी साईबाबा नामावली परंपरा — 20वीं सदी की रचना
    स्रोत परंपराhindunidhi.com — साईं बाबा अष्टोत्तर शत नामावलि (संस्कृत); आधार सूची, 108 नाम। इसमें हर दसवें नाम पर क्रमांक-चिह्न है (10, 20, … 100, 108); सभी 11 चिह्न यंत्रवत् जाँचे गए — एक भी विचलन नहीं। · ⚠️ यह पृष्ठ इस संग्रह के दो-स्रोत मानक पर खरा नहीं उतरता, और यह छिपाया नहीं गया। शिरडी साईं की 108-नामावली किसी दूसरे प्रमुख स्रोत पर नहीं मिली; stotranidhi तथा sanskritdocuments पर शिरडी साईं की कोई अष्टोत्तर शतनामावली नहीं है। · ⚠️ शिरडी साईं और सत्य साईं भिन्न व्यक्ति हैं। stotranidhi की "श्री सत्यसायि अष्टोत्तरशतनामावली" सत्य साईं की है, शिरडी की नहीं — उसे इस सूची का दूसरा स्रोत नहीं माना जा सकता। इस सूची का आंतरिक प्रमाण नाम 5 गोदावरीतटशिरडीवासिने है। · ⚠️ रचना-काल आधुनिक है — महासमाधि 1918; यह किसी पुराण से नहीं आती। रचयिता का नाम किसी स्रोत ने नहीं दिया, अतः कुछ गढ़ा नहीं गया। · ℹ️ यह साईं सहस्रनामावली का संक्षेप नहीं है — तुलना करने पर इस 108-सूची के केवल 22 नाम (20.4%) ही 1000-सूची में शब्दशः मिले; वे स्वतंत्र रचनाएँ हैं। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से अनूदित (108/108)।
    रचयिताअज्ञात (रचयिता का नाम किसी स्रोत ने नहीं दिया)
    अंतिम अद्यतनजून 2026

    संपादकीय टिप्पणी: शिरडी साईं और सत्य साईं भिन्न व्यक्ति हैं, और उनकी 108-सूचियाँ भी भिन्न हैं — इंटरनेट पर दोनों की सामग्री प्रायः एक साथ मिलती है, इसलिए यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है। यह सूची शिरडी साईं बाबा की है; आंतरिक प्रमाण नाम 5 गोदावरीतटशिरडीवासिने है। यह पृष्ठ दो-स्रोत मानक पर खरा नहीं उतरता: शिरडी साईं की 108-नामावली किसी दूसरे प्रमुख स्रोत पर नहीं मिली (stotranidhi की "श्री सत्यसायि अष्टोत्तरशतनामावली" सत्य साईं की है)। आंतरिक प्रमाण यह है कि आधार-स्रोत के अपने 11 क्रमांक-चिह्न (10, 20, … 100, 108) यंत्रवत् जाँचे गए और सभी सही निकले। रचना-काल आधुनिक है (महासमाधि 1918), अतः यह किसी पुराण से नहीं आती; रचयिता का नाम किसी स्रोत ने नहीं दिया। यह साईं सहस्रनामावली का संक्षेप नहीं है — दोनों की तुलना करने पर इस सूची के केवल 22 नाम (20.4%) ही 1000-सूची में शब्दशः मिलते हैं, अर्थात वे स्वतंत्र रचनाएँ हैं।

    देव परिचय

    श्री साईं बाबा

    Shirdi Sai Baba

    शिरडी के साईं बाबा श्रद्धा और सबूरी के संत हैं — सर्वधर्म समभाव और सेवा के प्रतीक।

    देवता वर्गश्रद्धा · सबूरी · सेवा · करुणा
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