ॐ केशवाय नमः

oṃ keśavāya namaḥ

Keshav Mantra (Om Keshavaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार व एकादशी
उद्देश्य:आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)भक्ति व प्रेम (Love)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ केशवाय नमः श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली का प्रथम नाम है, जो नित्य संध्या व आचमन में लिया जाता है। तीन व्याख्याएँ हैं — केशी असुर के वधकर्ता; सुंदर केशों वाले; तथा “क” (ब्रह्मा) + “अ” (विष्णु) + “ईश” (शिव) यानी तीनों देवों के मूल।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 1; गोपाल सहस्रनाम — "केशवः"

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ केशवाय नमः
IASToṃ keśavāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 1; गोपाल सहस्रनाम — "केशवः"
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार व एकादशी
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

केशव नाम की तीन व्याख्याएँ परंपरा में साथ-साथ चलती हैं। पहली: "केशी" नामक अश्वरूपधारी असुर का वध करने वाले — इसी से केशव। दूसरी: "केश" अर्थात् सुंदर घुँघराले बाल, इसलिए केशव अर्थात् सुंदर केशों वाले। और तीसरी, जो सबसे गूढ़ मानी जाती है: "क" (ब्रह्मा) + "अ" (विष्णु) + "ईश" (शिव) — अर्थात् जो तीनों देवों का मूल हैं।

यह नाम कृष्ण के सबसे प्रधान नामों में है। श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — वे चौबीस नाम जो नित्य संध्या व आचमन में लिए जाते हैं — इसी नाम से आरंभ होती है, और इसी कारण इसे "प्रथम नाम" का स्थान प्राप्त है। भगवद्गीता में अर्जुन बार-बार कृष्ण को "केशव" कहकर पुकारते हैं, विशेषकर उस क्षण जब वे युद्ध से विमुख हो रहे होते हैं।

मंत्र

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ॐ केशवाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ केशवाय नमः॥

oṃ keśavāya namaḥ ||

Om Keshavaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "के" दीर्घ है और "श" तालव्य — "केसव" नहीं, "केशव"। अंत "वाय" भी दीर्घ। पूरा रूप "के-श-वाय न-मः"। यह नित्य संध्या का नाम है, इसलिए परंपरा में इसे शांत व सम स्वर में बोला जाता है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
केशीअश्वरूपधारी असुर
केशबाल — सुंदर घुँघराले केश
केशवायकेशी के वधकर्ता / सुंदर केशों वाले (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. केशव को नमस्कार। जिन्होंने केशी असुर का वध किया, जिनके केश सुंदर हैं और जो ब्रह्मा, विष्णु व शिव — तीनों के मूल हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • नित्य संध्या व आचमन की परंपरा का प्रथम नाम माना जाता है।
  • परंपरा में इसे सर्वांगीण कृष्ण-कृपा से जोड़ा जाता है।
  • मन की शांति व भक्ति-भाव जगने की मान्यता है।
  • दैनिक उपासना का सरल व सुलभ नाम-मंत्र कहा जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

प्रातः-संध्या नित्य वंदन मेंबुधवार व एकादशी कोजन्माष्टमी परभगवद्गीता का पाठ आरंभ करने से पूर्व

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

स्नान के बाद आचमन कर, कृष्ण या विष्णु के विग्रह के समक्ष दीपक जलाकर तुलसी माला से 108 बार जप करें। परंपरा में चतुर्विंशति नामावली के चौबीसों नाम क्रम से लेने का विधान है, जिसमें यह प्रथम है; पर इसे स्वतंत्र नाम-मंत्र के रूप में भी जपा जाता है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 1 "श्री केशवाय नमः" (drikpanchang) · श्री गोपाल सहस्रनाम — "केशवः" नाम 205 व 562 · भगवद्गीता — अर्जुन द्वारा प्रयुक्त सम्बोधन (प्रथम अध्याय)
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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ॐ केशवाय नमः — सामान्य प्रश्न

श्री कृष्ण भक्ति संग्रह

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