समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार, एकादशी व जन्माष्टमी
उद्देश्य:भक्ति व प्रेम (Love)मन की शांति (Peace)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण नाम जाप
ॐ श्यामसुन्दराय नमः का अर्थ है “श्याम वर्ण वाले सुंदर कृष्ण को नमस्कार”। परंपरा में श्याम वर्ण मेघ व अनंत आकाश का प्रतीक माना जाता है। यह संयुक्त शब्द-रूप किसी नामावली-सूची में नहीं मिला; दोनों घटक अलग-अलग मिलते हैं। यह जीवित भक्ति-परंपरा का संबोधन है।
FAQ
ॐ श्यामसुन्दराय नमः — सामान्य प्रश्न
श्यामसुन्दर अर्थात् "जो श्याम वर्ण के हैं और फिर भी परम सुंदर हैं"। भक्ति-परंपरा में कृष्ण का श्याम वर्ण ही उनका सबसे बड़ा सौंदर्य माना जाता है।
परंपरा में श्याम वर्ण को मेघ, आकाश और अनंत का प्रतीक कहा जाता है — जो असीम है उसका कोई निश्चित रंग नहीं होता, इसलिए वह श्याम दिखता है। यही भाव इस नाम का आधार है।
यह संयुक्त शब्द-रूप शतनामावली या सहस्रनामावली की सूचियों में नहीं मिला। दोनों घटक अलग-अलग मिलते हैं — अष्टोत्तर शतनामावली में "श्याम" मूलक नाम और गोपाल सहस्रनाम में "सुन्दर" मूलक नाम। "श्यामसुन्दर" जीवित भक्ति-परंपरा का संबोधन है।
"श्याम" संबोधन उत्तर भारत की भक्ति में सर्वाधिक प्रचलित है और खाटू श्याम, श्याम बाबा जैसे नाम इसी मूल से आते हैं। इस संग्रह में खाटू श्याम की आरती व चालीसा अलग से उपलब्ध हैं।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए तुलसी माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः व संध्या है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है — प्रतिदिन एक माला, बीच-बीच में छोड़कर की गई अधिक संख्या से श्रेष्ठ कही जाती है।
परंपरा में इसके लिए बुधवार, एकादशी व जन्माष्टमी विशेष कहे जाते हैं। दैनिक जप का सुझाया गया समय प्रातः व संध्या है। इसके अतिरिक्त परंपरा में ये अवसर बताए जाते हैं — प्रातः-संध्या नित्य पूजा में; बुधवार व एकादशी को; जन्माष्टमी पर; कीर्तन व सामूहिक भजन में। सामान्य नियम यह कहा जाता है कि समय जो भी चुनें, वह प्रतिदिन एक ही रहे — इससे जप में स्थिरता आती है।
यह नाम-मंत्र है, अर्थात इष्ट के नाम का जप। परंपरा में नाम-जप के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं मानी जाती — इसे स्त्री-पुरुष, किसी भी आयु व किसी भी वर्ग का व्यक्ति श्रद्धापूर्वक जप सकता है। यही नाम-मार्ग की विशेषता कही जाती है कि इसमें पात्रता की शर्त भाव है, विधि नहीं।
पर्व
