समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार व एकादशी
उद्देश्य:रक्षा (Protection)विजय (Victory)संकट मोचन (Relief from Crisis)
✓ संपूर्ण नाम जाप
ॐ चक्रपाणये नमः का अर्थ है “हाथ में सुदर्शन चक्र धारण करने वाले कृष्ण को नमस्कार”। परंपरा में सुदर्शन चक्र काल-चक्र व धर्म-चक्र दोनों का प्रतीक है। ठीक यह रूप कृष्ण नामावलियों में नहीं मिला; वहाँ सम-अर्थी “चक्रिणे” (कृष्ण सहस्रनामावली, क्रम 601) है। शुद्ध रूप “चक्रपाणये” है, “चक्रपाणाय” नहीं।
FAQ
ॐ चक्रपाणये नमः — सामान्य प्रश्न
चक्रपाणि अर्थात् "जिनके हाथ में चक्र है" — सुदर्शन चक्रधारी। "पाणि" का अर्थ हाथ है। सुदर्शन चक्र भगवान का प्रधान आयुध माना जाता है और परंपरा में उसे काल-चक्र व धर्म-चक्र दोनों का प्रतीक कहा जाता है।
शुद्ध रूप "ॐ चक्रपाणये नमः" है। "पाणि" इकारान्त शब्द है, इसलिए उसका चतुर्थी विभक्ति रूप "पाणये" बनता है, "पाणाय" नहीं।
ठीक इस रूप में नहीं। जाँची गई कृष्ण नामावलियों में सम-अर्थी नाम "ॐ चक्रिणे नमः" (श्री कृष्ण सहस्रनामावली, क्रम 601) मिलता है। विष्णु सहस्रनाम में भी "चक्री" व "चक्रगदाधर" जैसे चक्र-मूलक नाम आते हैं।
"सु-दर्शन" का अर्थ है जिसका दर्शन कल्याणकारी है। परंपरा में यह विरोधाभास ही उसका भाव माना जाता है — जो अधर्म के लिए संहारक है, वही भक्त के लिए मंगलकारी दर्शन है।
परंपरा में इस मंत्र का जप 108 बार — अर्थात एक माला — करने का विधान कहा जाता है, और इसके लिए तुलसी माला का प्रयोग बताया जाता है। जप का सुझाया गया समय प्रातः व संध्या है। संख्या से अधिक महत्व नियमितता तथा शुद्ध उच्चारण का माना गया है — प्रतिदिन एक माला, बीच-बीच में छोड़कर की गई अधिक संख्या से श्रेष्ठ कही जाती है।
परंपरा में इसके लिए बुधवार व एकादशी विशेष कहे जाते हैं। दैनिक जप का सुझाया गया समय प्रातः व संध्या है। इसके अतिरिक्त परंपरा में ये अवसर बताए जाते हैं — बुधवार व एकादशी को; शत्रु-बाधा या संकट के समय; जन्माष्टमी पर; यात्रा या किसी कठिन कार्य के आरंभ पर। सामान्य नियम यह कहा जाता है कि समय जो भी चुनें, वह प्रतिदिन एक ही रहे — इससे जप में स्थिरता आती है।
यह नाम-मंत्र है, अर्थात इष्ट के नाम का जप। परंपरा में नाम-जप के लिए दीक्षा अनिवार्य नहीं मानी जाती — इसे स्त्री-पुरुष, किसी भी आयु व किसी भी वर्ग का व्यक्ति श्रद्धापूर्वक जप सकता है। यही नाम-मार्ग की विशेषता कही जाती है कि इसमें पात्रता की शर्त भाव है, विधि नहीं।
पर्व
