ॐ देवकीनन्दनाय नमः

oṃ devakīnandanāya namaḥ

Devkinandan Mantra (Om Devakinandanaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार, अष्टमी व जन्माष्टमी
उद्देश्य:भक्ति व प्रेम (Love)संतान व वंश (Family)रक्षा (Protection)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ देवकीनन्दनाय नमः श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली का नाम 12 है, जिसका अर्थ है “देवकी के पुत्र को नमस्कार”। कंस के कारागार में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि को उनका प्राकट्य हुआ था, इसलिए जन्माष्टमी की रात्रि-पूजा में यही नाम केंद्र में रहता है।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: श्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — नाम 12

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ देवकीनन्दनाय नमः
IASToṃ devakīnandanāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतश्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — नाम 12
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार, अष्टमी व जन्माष्टमी
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

देवकीनन्दन अर्थात् "देवकी के पुत्र"। यह नाम कृष्ण के अवतरण से सीधे जुड़ा है। कंस के कारागार में, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि को, माता देवकी के आठवें पुत्र के रूप में उनका प्राकट्य हुआ — और जन्म के तुरंत बाद वसुदेव उन्हें यमुना पार कर गोकुल ले गए। इस प्रकार देवकी ने उन्हें जन्म दिया, पर पालन यशोदा ने किया।

यही कारण है कि कृष्ण के दो "नन्दन" नाम अलग-अलग चलते हैं — देवकीनन्दन और यशोदानन्दन। परंपरा में इस भेद को भाव की दृष्टि से पढ़ा जाता है: देवकीनन्दन नाम ऐश्वर्य व अवतरण का स्मरण कराता है, जबकि यशोदानन्दन वात्सल्य व लालन-पालन का। जन्माष्टमी की रात्रि-पूजा में यही नाम केंद्र में रहता है, और सन्तान गोपाल मंत्र भी "देवकीसुत" संबोधन से आरंभ होता है।

मंत्र

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ॐ देवकीनन्दनाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ देवकीनन्दनाय नमः॥

oṃ devakīnandanāya namaḥ ||

Om Devakinandanaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: यह लंबा नाम है — इसे "दे-व-की-नन्-द-नाय" के अंशों में तोड़कर अभ्यास करें। "की" दीर्घ है (देवकी), और "नन्द" में "न्द" संयुक्ताक्षर। अंत "नाय" दीर्घ। हिन्दी में यह प्रायः "देवकीनंदनाय" (अनुस्वार सहित) लिखा जाता है; उच्चारण एक ही है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
देवकीमाता देवकी — कृष्ण की जननी
नन्दनपुत्र; आनंद देने वाला
देवकीनन्दनायदेवकी के पुत्र (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. देवकीनन्दन को नमस्कार। जो माता देवकी के पुत्र रूप में कंस के कारागार में प्रकट हुए और जिनके अवतरण से धर्म की पुनःस्थापना हुई — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • जन्माष्टमी की रात्रि-पूजा का केंद्रीय नाम-मंत्र माना जाता है।
  • परंपरा में इसे संतान-सुख व वंश-कल्याण की कामना से जोड़ा जाता है।
  • कठिन परिस्थिति में भी रक्षा का भाव — कारागार-प्राकट्य का प्रसंग।
  • माता-पिता व संतान के बीच स्नेह-भाव जगने की मान्यता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: अर्धरात्रि (जन्माष्टमी) व प्रातः

जप का उत्तम समय

जन्माष्टमी की अर्धरात्रि पूजा मेंप्रत्येक अष्टमी तिथि कोबुधवार व एकादशी कोसंतान-कल्याण के संकल्प के साथ

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

बालकृष्ण की प्रतिमा या झूले के समक्ष दीपक जलाकर, माखन-मिश्री व पंजीरी का भोग अर्पित कर तुलसी माला से 108 बार जप करें। जन्माष्टमी पर अर्धरात्रि — कृष्ण के प्राकट्य का काल — इस मंत्र के जप के लिए विशेष माना जाता है। जप के समय कारागार में हुए प्राकट्य का ध्यान करने की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — नाम 12 "ॐ देवकीनन्दनाय नमः" · कृष्ण जन्म प्रसंग — श्रीमद्भागवत महापुराण, दशम स्कन्ध
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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ॐ देवकीनन्दनाय नमः — सामान्य प्रश्न

श्री कृष्ण भक्ति संग्रह

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