ॐ द्वारकाधीशाय नमः

oṃ dvārakādhīśāya namaḥ

Dwarkadhish Mantra (Om Dwarkadhishaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
बुधवार, एकादशी व जन्माष्टमी
उद्देश्य:ऐश्वर्य व समृद्धि (Prosperity)रक्षा (Protection)मोक्ष (Liberation)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ द्वारकाधीशाय नमः का अर्थ है “द्वारका के अधीश्वर कृष्ण को नमस्कार”। यह कृष्ण का ऐश्वर्य-भाव वाला स्वरूप है, माधुर्य नहीं। शतनामावली में सम-अर्थी नाम “द्वारकानायकाय” (क्रम 58) मिलता है। द्वारका चार धामों व सप्त पुरियों — दोनों में गिनी जाती है।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: द्वारका उपासना परंपरा; शतनामावली में सम-अर्थी "द्वारकानायकाय" (58)

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ द्वारकाधीशाय नमः
IASToṃ dvārakādhīśāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतद्वारका उपासना परंपरा; शतनामावली में सम-अर्थी "द्वारकानायकाय" (58)
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार, एकादशी व जन्माष्टमी
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

द्वारकाधीश अर्थात् "द्वारका के अधीश्वर"। यह नाम कृष्ण के उस स्वरूप का है जो वृंदावन की बाल-लीला और मथुरा के संघर्ष के बाद आता है — जब वे राजा बनकर समुद्र-तट पर द्वारका नगरी बसाते हैं। यहाँ माधुर्य नहीं, ऐश्वर्य प्रधान है; यहाँ वे वंशीधर नहीं, चक्रधर हैं।

गुजरात के द्वारका में स्थित श्री द्वारकाधीश मंदिर चार धामों में से एक है और सप्त पुरियों में भी गिना जाता है। परंपरा में कहा जाता है कि मूल द्वारका नगरी समुद्र में समा गई। यही स्वरूप राजस्थान के नाथद्वारा में श्रीनाथजी और गुजरात के डाकोर व बेट द्वारका में भी पूजा जाता है। ध्यान देने योग्य है कि "द्वारकाधीश" यह ठीक शब्द-रूप अष्टोत्तर शतनामावली में नहीं आता; वहाँ "द्वारकानायकाय" (क्रम 58) मिलता है।

मंत्र

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ॐ द्वारकाधीशाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ द्वारकाधीशाय नमः॥

oṃ dvārakādhīśāya namaḥ ||

Om Dwarkadhishaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: आरंभ का "द्वा" संयुक्ताक्षर है (द् + व) — इसे "दुवा" न बनाएँ, एक ही मात्रा में बोलें। "धी" दीर्घ और "श" तालव्य। पूरा रूप "द्वा-र-का-धी-शाय न-मः"। यह "द्वारकाधीश" है — "द्वारिकाधीश" वर्तनी भी प्रचलित है और स्वीकार्य मानी जाती है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
द्वारकाकृष्ण द्वारा बसाई नगरी
अधीशअधिपति, स्वामी
द्वारकाधीशायद्वारका के अधीश्वर (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. द्वारकाधीश को नमस्कार। जो समुद्र-तट पर बसी द्वारका नगरी के अधीश्वर हैं और जिनका यह स्वरूप ऐश्वर्य व राजधर्म का प्रतीक है — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे ऐश्वर्य, व्यापार व समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
  • नेतृत्व व उत्तरदायित्व-निर्वाह का भाव — राजधर्म का स्वरूप है।
  • चार धाम व द्वारका यात्रा-संकल्प के साथ जप प्रचलित है।
  • गुजरात व पश्चिम भारत की कृष्ण-उपासना का केंद्रीय नाम है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

बुधवार व एकादशी कोजन्माष्टमी परद्वारका यात्रा या चार धाम संकल्प परनए व्यापार या उत्तरदायित्व के आरंभ पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

द्वारकाधीश की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर तुलसी माला से 108 बार जप करें। परंपरा में यह ऐश्वर्य-भाव का स्वरूप है, इसलिए इसकी पूजा में वस्त्र व आभूषण-सेवा का विधान बताया जाता है। जप के अंत में तुलसी दल अर्पित कर प्रणाम करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — सम-अर्थी नाम 58 "ॐ द्वारकानायकाय नमः" · श्री द्वारकाधीश मंदिर, द्वारका — चार धाम व सप्त पुरी परंपरा · नोट: ठीक "द्वारकाधीशाय" शब्द-रूप शतनामावली की सूची में नहीं मिला
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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ॐ द्वारकाधीशाय नमः — सामान्य प्रश्न

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