ॐ हृषीकेशाय नमः

oṃ hṛṣīkeśāya namaḥ

Hrishikesh Mantra (Om Hrishikeshaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
मध्यम
शुभ दिन
बुधवार व एकादशी
उद्देश्य:इंद्रिय-संयम (Discipline)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ हृषीकेशाय नमः श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली का नाम 10 है। “हृषीक” अर्थात् इंद्रियाँ और “ईश” अर्थात् स्वामी — यानी इंद्रियों के स्वामी। भगवद्गीता 1.15 में यही नाम आता है। परंपरा में इसे इंद्रिय-संयम व ध्यान-साधना का मंत्र माना जाता है।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 10; भगवद्गीता 1.15

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ हृषीकेशाय नमः
IASToṃ hṛṣīkeśāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 10; भगवद्गीता 1.15
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार व एकादशी
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईमध्यम

उद्भव / पृष्ठभूमि

हृषीकेश "हृषीक" और "ईश" से बना है — "हृषीक" अर्थात् इंद्रियाँ और "ईश" अर्थात् स्वामी। इस प्रकार हृषीकेश अर्थात् इंद्रियों के स्वामी। परंपरा में इसे योग-साधना का नाम माना जाता है, क्योंकि साधना का मूल प्रश्न यही है — इंद्रियाँ किसके अधीन हैं। एक अन्य व्याख्या में "हृषीक" को हर्ष से जोड़ा जाता है, तब हृषीकेश अर्थात् आनंद के स्वामी।

भगवद्गीता में यह नाम पहली बार 1.15 में आता है — "पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः", अर्थात् हृषीकेश ने पाञ्चजन्य शंख बजाया और अर्जुन ने देवदत्त। गीता में जहाँ-जहाँ इंद्रिय-निग्रह की बात आती है, वहाँ यह नाम विशेष अर्थपूर्ण हो जाता है। उत्तराखंड का ऋषिकेश नगर, जो गंगा तट पर योग-साधना का प्रसिद्ध केंद्र है, इसी नाम से जुड़ा माना जाता है।

मंत्र

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ॐ हृषीकेशाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ हृषीकेशाय नमः॥

oṃ hṛṣīkeśāya namaḥ ||

Om Hrishikeshaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: यह इस समूह का सबसे कठिन उच्चारण है। "हृ" में ऋ-कार है (हिन्दी में "ह्रि" जैसा), "षी" मूर्धन्य "ष" के साथ दीर्घ है, और "के" के बाद "शा" तालव्य "श" — अर्थात् एक ही शब्द में "ष" और "श" दोनों अलग-अलग आते हैं, इन्हें एक जैसा न बोलें। पूरा रूप "हृ-षी-के-शाय न-मः"। धीमे अभ्यास से आरंभ करें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
हृषीकइंद्रियाँ; हर्ष
ईशस्वामी, अधिपति
हृषीकेशायइंद्रियों के स्वामी (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. हृषीकेश को नमस्कार। जो समस्त इंद्रियों के स्वामी हैं और जिनके अधीन होकर ही इंद्रियाँ शांत होती हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे इंद्रिय-संयम व मन के नियमन का मंत्र माना जाता है।
  • योग व ध्यान-साधना के आरंभ में जप प्रचलित है।
  • चंचलता, व्यसन व विचलन के शमन की मान्यता है।
  • नित्य संध्या की चतुर्विंशति नामावली का दसवाँ नाम है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त

जप का उत्तम समय

ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान से पूर्वयोग या साधना आरंभ करते समयबुधवार व एकादशी कोप्रातः-संध्या नित्य वंदन में

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

शुद्ध आसन पर पद्मासन या सुखासन में बैठकर, नेत्र अर्ध-निमीलित रखते हुए तुलसी माला से 108 बार जप करें। परंपरा में इसे ध्यान व प्राणायाम से पूर्व जपने का विधान बताया जाता है, क्योंकि यह इंद्रिय-निग्रह का नाम है। जप के बाद कुछ क्षण मौन बैठना उत्तम कहा गया है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 10 "श्री हृषीकेशाय नमः" (drikpanchang) · भगवद्गीता 1.15 — "पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः" · श्री गोपाल सहस्रनाम — "हृषीकेशः" नाम 30
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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