ॐ जनार्दनाय नमः

oṃ janārdanāya namaḥ

Janardan Mantra (Om Janardanaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार व एकादशी
उद्देश्य:संकट मोचन (Relief from Crisis)रक्षा (Protection)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ जनार्दनाय नमः श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली का नाम 21 है। इसके दो अर्थ साथ चलते हैं — दुष्ट जनों का मर्दन करने वाले, तथा वे जिनसे समस्त जन याचना करते हैं। भगवद्गीता के प्रथम अध्याय में अर्जुन इसी नाम से कृष्ण को सम्बोधित करते हैं।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 21; गोपाल सहस्रनाम — "जनार्दनः" (566)

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ जनार्दनाय नमः
IASToṃ janārdanāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 21; गोपाल सहस्रनाम — "जनार्दनः" (566)
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार व एकादशी
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

जनार्दन नाम की दो व्याख्याएँ प्रचलित हैं, और दोनों एक-दूसरे की पूरक मानी जाती हैं। पहली: "जन" + "अर्दन" — दुष्ट जनों का मर्दन करने वाले। दूसरी: "जन" + "अर्दन" को याचना के अर्थ में लेकर — वे जिनसे समस्त जन अपनी कामनाएँ माँगते हैं, अर्थात् सबकी प्रार्थना सुनने वाले। परंपरा में कहा जाता है कि दोनों अर्थ साथ चलते हैं: जो दुष्टों का दमन करते हैं, वही भक्तों की पुकार भी सुनते हैं।

भगवद्गीता के प्रथम अध्याय में अर्जुन कृष्ण को "जनार्दन" कहकर पुकारते हैं — उस क्षण जब वे युद्ध के परिणाम पर प्रश्न उठा रहे होते हैं। यह नाम श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली में इक्कीसवें स्थान पर आता है, इसलिए नित्य संध्या व आचमन की परंपरा का भी अंग है। महाराष्ट्र में जनार्दन स्वामी की परंपरा और अनेक स्थानों पर "जनार्दन" नाम के विष्णु-मंदिर इसी नाम से जुड़े हैं।

मंत्र

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ॐ जनार्दनाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ जनार्दनाय नमः॥

oṃ janārdanāya namaḥ ||

Om Janardanaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "ना" दीर्घ है और "र्द" में "र्" पूर्ववर्ती अक्षर से जुड़ा — "ज-नार्-द-नाय न-मः"। अंत "नाय" भी दीर्घ। ध्यान रखें कि यह "जनारदन" नहीं, "जनार्दन" है — "र्" का उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
जनलोग, प्रजा
अर्दनमर्दन करने वाला; अथवा जिससे याचना की जाए
जनार्दनायदुष्टों के मर्दक / सबकी प्रार्थना सुनने वाले (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. जनार्दन को नमस्कार। जो दुष्ट जनों का मर्दन करते हैं और जिनसे समस्त जन अपनी प्रार्थना करते हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे संकट व विपत्ति से मुक्ति की प्रार्थना से जोड़ा जाता है।
  • दुष्ट-बाधा व शत्रु-भय से रक्षा की मान्यता है।
  • "सबकी सुनने वाले" भाव से मन को आश्वासन मिलने की बात कही जाती है।
  • नित्य संध्या की चतुर्विंशति नामावली का इक्कीसवाँ नाम है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

प्रातः-संध्या नित्य वंदन मेंबुधवार व एकादशी कोसंकट, विपत्ति या असहायता के समयजन्माष्टमी पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

कृष्ण या विष्णु के विग्रह के समक्ष दीपक जलाकर तुलसी माला से 108 बार जप करें। परंपरा में इस मंत्र का जप प्रार्थना-भाव के साथ करने पर बल दिया जाता है — क्योंकि नाम का ही एक अर्थ "जिनसे याचना की जाए" है। जप के अंत में अपनी प्रार्थना मन ही मन निवेदित करने की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 21 "श्री जनार्दनाय नमः" (drikpanchang) · श्री गोपाल सहस्रनाम — "जनार्दनः" नाम 566 · भगवद्गीता — अर्जुन द्वारा प्रयुक्त सम्बोधन (प्रथम अध्याय)
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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ॐ जनार्दनाय नमः — सामान्य प्रश्न

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