ॐ माधवाय नमः

oṃ mādhavāya namaḥ

Madhav Mantra (Om Madhavaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार, एकादशी व वैशाख मास
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)भक्ति व प्रेम (Love)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ माधवाय नमः श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली का नाम 3 है। “मा” (लक्ष्मी) + “धव” (पति) से इसका अर्थ लक्ष्मीपति लिया जाता है। भगवद्गीता 1.14 में संजय कृष्ण के लिए यही शब्द प्रयोग करते हैं। वैशाख मास को परंपरा में “माधव मास” कहा जाता है।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 3; भगवद्गीता 1.14

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ माधवाय नमः
IASToṃ mādhavāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 3; भगवद्गीता 1.14
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार, एकादशी व वैशाख मास
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

माधव नाम की व्याख्या प्रायः "मा" + "धव" से की जाती है — "मा" अर्थात् लक्ष्मी और "धव" अर्थात् पति; इस प्रकार माधव अर्थात् लक्ष्मीपति। एक दूसरी व्याख्या में इसे "मधु" वंश से जोड़ा जाता है, जिसमें कृष्ण का जन्म हुआ — यादव-मधु कुल। तीसरी व्याख्या में "मा" (मौन/ध्यान) + "धव" (स्वामी) लेकर इसे ध्यान द्वारा जाने जाने वाले परम तत्त्व का नाम कहा जाता है।

यह नाम भगवद्गीता के प्रथम अध्याय में ही आ जाता है, जहाँ संजय शंख-नाद का वर्णन करते हुए कहते हैं — "माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः" (1.14), अर्थात् माधव और अर्जुन ने अपने दिव्य शंख बजाए। यही नाम आगे अर्जुन के सम्बोधनों में भी आता है। वैशाख मास को परंपरा में "माधव मास" कहा जाता है, इसलिए उस मास में इस नाम का जप विशेष माना जाता है।

मंत्र

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ॐ माधवाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ माधवाय नमः॥

oṃ mādhavāya namaḥ ||

Om Madhavaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: आरंभ का "मा" दीर्घ है और "ध" महाप्राण — "मादव" नहीं, "माधव"। अंत "वाय" भी दीर्घ। पूरा रूप "मा-ध-वाय न-मः"। स्वर मधुर व सम रखें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
मालक्ष्मी; मौन/ध्यान
धवपति, स्वामी
माधवायलक्ष्मीपति (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. माधव को नमस्कार। जो लक्ष्मी के पति हैं, मधु-वंश में प्रकट हुए और जो ध्यान द्वारा जाने जाते हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • लक्ष्मीपति स्वरूप होने से परंपरा में इसे समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है।
  • नित्य संध्या की चतुर्विंशति नामावली का तीसरा नाम है।
  • ध्यान-साधना में एकाग्रता बढ़ने की मान्यता है।
  • वैशाख (माधव) मास की उपासना में इसका जप विशेष माना जाता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

वैशाख (माधव) मास में प्रतिदिनबुधवार व एकादशी कोप्रातः-संध्या नित्य वंदन मेंजन्माष्टमी पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

कृष्ण या लक्ष्मी-नारायण के विग्रह के समक्ष दीपक जलाकर तुलसी माला से 108 बार जप करें। वैशाख मास में जल-दान व तुलसी-सेवा के साथ जप करना विशेष बताया जाता है। जप के अंत में तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 3 "श्री माधवाय नमः" (drikpanchang) · भगवद्गीता 1.14 — "माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः" · श्री गोपाल सहस्रनाम — "माधवः" नाम 256 व 260
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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ॐ माधवाय नमः — सामान्य प्रश्न

श्री कृष्ण भक्ति संग्रह

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