ॐ मधुसूदनाय नमः

oṃ madhusūdanāya namaḥ

Madhusudan Mantra (Om Madhusudanaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार व एकादशी
उद्देश्य:रक्षा (Protection)संयम व विवेक (Discipline)विजय (Victory)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ मधुसूदनाय नमः श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली का नाम 6 है, जिसका अर्थ है “मधु असुर के संहारक को नमस्कार”। “मधु” का प्रतीकार्थ मीठा प्रलोभन भी लिया जाता है। भगवद्गीता के प्रथम अध्याय में अर्जुन कृष्ण को इसी नाम से पुकारते हैं जब वे युद्ध से विमुख होते हैं।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: श्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 6; भगवद्गीता में अर्जुन का सम्बोधन

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ मधुसूदनाय नमः
IASToṃ madhusūdanāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 6; भगवद्गीता में अर्जुन का सम्बोधन
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार व एकादशी
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

मधुसूदन अर्थात् "मधु का संहार करने वाले"। परंपरा में मधु और कैटभ — दो असुर माने जाते हैं जो प्रलय-काल में उत्पन्न हुए और जिनका वध भगवान ने किया। इसी से यह नाम आया। प्रतीक रूप में मधु को "मीठा प्रलोभन" भी कहा जाता है — वह आकर्षण जो मीठा लगता है पर साधक को मार्ग से भटका देता है; तब मधुसूदन वे हैं जो ऐसे प्रलोभनों का नाश करते हैं।

भगवद्गीता में यह नाम एक विशेष क्षण पर आता है। जब अर्जुन युद्ध-भूमि पर विषाद में डूबकर कहते हैं कि वे स्वजनों का वध नहीं करेंगे, तब वे कृष्ण को "मधुसूदन" कहकर पुकारते हैं — मानो उन्हीं से पूछ रहे हों कि जो असुरों का संहार करते हैं, वे स्वजनों के वध का आदेश कैसे दे सकते हैं। यह नाम आगे भी गीता में कई बार आता है, विशेषकर तब जब अर्जुन कोई कठिन प्रश्न रखते हैं।

मंत्र

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ॐ मधुसूदनाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ मधुसूदनाय नमः॥

oṃ madhusūdanāya namaḥ ||

Om Madhusudanaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "सू" दीर्घ है — "मधुसुदन" नहीं, "मधुसूदन"। पूरा रूप "म-धु-सू-द-नाय न-मः"; अंत "नाय" भी दीर्घ। "ध" महाप्राण है, इसे "द" न बनाएँ। स्वर दृढ़ रखें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
मधुमधु नामक असुर; प्रतीकार्थ में मीठा प्रलोभन
सूदनसंहार करने वाला
मधुसूदनायमधु के संहारक (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. मधुसूदन को नमस्कार। जिन्होंने मधु असुर का संहार किया और जो साधक के भीतर के मीठे प्रलोभनों का भी नाश करते हैं — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे प्रलोभन व व्यसन के शमन से जोड़ा जाता है।
  • विवेक व संयम की दृढ़ता आने की मान्यता है।
  • शत्रु-बाधा व विघ्नों से रक्षा हेतु जप प्रचलित है।
  • नित्य संध्या की चतुर्विंशति नामावली का छठा नाम है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

प्रातः-संध्या नित्य वंदन मेंबुधवार व एकादशी कोकिसी प्रलोभन या दुविधा से जूझते समयजन्माष्टमी पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

कृष्ण की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक जलाकर तुलसी माला से 108 बार जप करें। परंपरा में इस मंत्र का जप संयम-संकल्प के साथ करने की बात कही जाती है — अर्थात् जिस प्रलोभन से मुक्ति चाहिए, उसे मन में रखकर। जप के अंत में तुलसी दल अर्पित कर प्रणाम करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण चतुर्विंशति नामावली — नाम 6 "श्री मधुसूदनाय नमः" (drikpanchang) · भगवद्गीता — अर्जुन द्वारा प्रयुक्त सम्बोधन (प्रथम अध्याय व आगे) · नोट: नाम विष्णु सहस्रनाम में भी है; संस्करण-भेद के कारण क्रमांक नहीं दिया गया
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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