ॐ राधावल्लभाय नमः

oṃ rādhāvallabhāya namaḥ

Radhavallabh Mantra (Om Radhavallabhaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार, एकादशी व राधाष्टमी
उद्देश्य:प्रेम व दांपत्य (Love)भक्ति (Devotion)आध्यात्मिक उन्नति (Spiritual Growth)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ राधावल्लभाय नमः का अर्थ है “राधा के प्रियतम कृष्ण को नमस्कार”। यह नाम जाँची गई नामावली-सूचियों में नहीं मिला — यह वृंदावन के राधावल्लभ सम्प्रदाय (हित हरिवंश महाप्रभु) की जीवित उपासना परंपरा का नाम-मंत्र है, जहाँ उपासना का केंद्र राधा हैं।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: राधावल्लभ सम्प्रदाय (वृंदावन) की उपासना परंपरा

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ राधावल्लभाय नमः
IASToṃ rādhāvallabhāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतराधावल्लभ सम्प्रदाय (वृंदावन) की उपासना परंपरा
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार, एकादशी व राधाष्टमी
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

राधावल्लभ अर्थात् "राधा के वल्लभ" — राधा के प्रिय, राधा के स्वामी। इस नाम की विशेषता यह मानी जाती है कि यहाँ कृष्ण की पहचान राधा से बनती है, न कि राधा की कृष्ण से। वृंदावन की भक्ति-परंपरा में यही भाव सर्वोच्च कहा जाता है — कि भगवान भी प्रेम के अधीन हो जाते हैं।

यह नाम वृंदावन के राधावल्लभ सम्प्रदाय का केंद्र है, जिसकी परंपरा हित हरिवंश महाप्रभु से जुड़ी बताई जाती है। उस सम्प्रदाय में उपासना का केंद्र राधा हैं और कृष्ण उनके वल्लभ रूप में स्मरण किए जाते हैं; वहाँ की सेवा-पद्धति में "राधा" नाम को ही मूल मंत्र माना जाता है। वृंदावन का श्री राधावल्लभ मंदिर आज भी इस परंपरा का प्रमुख स्थल है। ध्यान रहे कि यह नाम शतनामावली की सूचियों में नहीं आता — यह जीवित सम्प्रदाय-परंपरा का नाम है।

मंत्र

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ॐ राधावल्लभाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ राधावल्लभाय नमः॥

oṃ rādhāvallabhāya namaḥ ||

Om Radhavallabhaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "वल्लभ" में द्वित्व "ल्ल" है — इसे स्पष्ट दोहरा बोलें, "वलभ" नहीं। "रा" और "धा" दीर्घ। पूरा रूप "रा-धा-वल्-ल-भाय न-मः"; अंत "भाय" दीर्घ और "भ" महाप्राण। स्वर कोमल व भाव-पूर्ण रखें।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
राधाश्री राधा
वल्लभप्रिय, प्रियतम, स्वामी
राधावल्लभायराधा के प्रियतम (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. राधावल्लभ को नमस्कार। जो श्री राधा के वल्लभ अर्थात् परम प्रिय हैं और जिनकी पहचान ही राधा से बनती है — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • परंपरा में इसे प्रेम-भक्ति व दांपत्य-सामंजस्य से जोड़ा जाता है।
  • युगल उपासना का प्रमुख नाम माना जाता है।
  • राधावल्लभ सम्प्रदाय की सेवा-परंपरा का केंद्रीय नाम है।
  • मन में समर्पण व माधुर्य-भाव जगने की मान्यता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

राधाष्टमी परबुधवार व एकादशी कोजन्माष्टमी व शरद पूर्णिमा परवृंदावन यात्रा या दर्शन-संकल्प पर

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाकर तुलसी माला से 108 बार जप करें। राधावल्लभ परंपरा में उपासना का केंद्र राधा हैं, इसलिए जप के समय पहले राधा का स्मरण कर फिर यह नाम लेने की परंपरा बताई जाती है। जप के अंत में तुलसी दल अर्पित करें।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराराधावल्लभ सम्प्रदाय (वृंदावन) — हित हरिवंश महाप्रभु की उपासना परंपरा · श्री राधावल्लभ मंदिर, वृंदावन · नोट: यह नाम जाँची गई शतनामावली व सहस्रनामावली की सूचियों में नहीं मिला
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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ॐ राधावल्लभाय नमः — सामान्य प्रश्न

श्री कृष्ण भक्ति संग्रह

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