ॐ यशोदानन्दनाय नमः

oṃ yaśodānandanāya namaḥ

Yashodanandan Mantra (Om Yashodanandanaya Namah)

समय
30 सेकंड
जप संख्या
108
कठिनाई
सरल
शुभ दिन
बुधवार, जन्माष्टमी व नन्दोत्सव
उद्देश्य:वात्सल्य व संतान (Family)भक्ति व प्रेम (Love)मन की शांति (Peace)
✓ संपूर्ण नाम जाप

ॐ यशोदानन्दनाय नमः का अर्थ है “यशोदा के पुत्र को नमस्कार”। यशोदा ने कृष्ण को जन्म नहीं दिया, पालन किया — यही वात्सल्य रस का आधार है। ठीक यह रूप शतनामावली में नहीं; वहाँ सम-अर्थी “यशोदावत्सलाय” (क्रम 9) मिलता है।

परिचय

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

स्रोत: व्रज-भक्ति परंपरा; शतनामावली में सम-अर्थी नाम "यशोदावत्सलाय" (9)

एक नज़र में

मंत्र / पाठॐ यशोदानन्दनाय नमः
IASToṃ yaśodānandanāya namaḥ
प्रकारनाम जाप
देवताश्री कृष्ण
मूल स्रोतव्रज-भक्ति परंपरा; शतनामावली में सम-अर्थी नाम "यशोदावत्सलाय" (9)
जप संख्या108
मालातुलसी माला
शुभ दिनबुधवार, जन्माष्टमी व नन्दोत्सव
पाठ समय30 सेकंड
कठिनाईसरल

उद्भव / पृष्ठभूमि

यशोदानन्दन अर्थात् "यशोदा के पुत्र"। यशोदा ने कृष्ण को जन्म नहीं दिया, पर पाला — और परंपरा में यही पालन-भाव सबसे ऊँचा माना जाता है। माखन चुराना, ऊखल से बाँधा जाना, मुँह खोलने पर समस्त ब्रह्मांड का दर्शन — कृष्ण की जितनी भी बाल-लीलाएँ प्रसिद्ध हैं, उनमें यशोदा ही केंद्र में हैं।

इस नाम की सबसे मार्मिक बात यही मानी जाती है कि जगत् का स्वामी एक माँ की गोद में सामान्य शिशु बनकर रह गया। भागवत परंपरा में कहा जाता है कि योगी जिन्हें ध्यान में नहीं पा सके, यशोदा ने उन्हें रस्सी से बाँध लिया — क्योंकि वहाँ बल नहीं, वात्सल्य काम कर रहा था। इसी भाव को "वात्सल्य रस" कहा जाता है, और यह नाम-मंत्र उसी का प्रतिनिधि है। ध्यान रहे कि यह ठीक शब्द-रूप शतनामावली की सूची में नहीं आता।

मंत्र

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ॐ यशोदानन्दनाय नमः॥

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उच्चारण (Pronunciation)

ॐ यशोदानन्दनाय नमः॥

oṃ yaśodānandanāya namaḥ ||

Om Yashodanandanaya Namah.

उच्चारण मार्गदर्शन: "यशोदा" में "श" तालव्य और "दा" दीर्घ है; उसके बाद "नन्दनाय"। पूरा रूप "य-शो-दा-नन्-द-नाय न-मः"। यह लंबा नाम है, इसलिए आरंभ में धीमी गति से अभ्यास करें। स्वर कोमल व स्नेहपूर्ण रखें — यह वात्सल्य-भाव का नाम है।

शब्द-अर्थ (Word-by-Word)

ॐप्रणव — परब्रह्म का प्रतीक
यशोदामाता यशोदा — कृष्ण की पालक माता
नन्दनपुत्र; आनंद देने वाला
यशोदानन्दनाययशोदा के पुत्र (कृष्ण) को
नमःनमस्कार, समर्पण

अर्थ (हिन्दी)

  1. यशोदानन्दन को नमस्कार। जो माता यशोदा के पुत्र हैं और जिन्होंने जगत् का स्वामी होते हुए भी एक माँ की गोद में शिशु-भाव स्वीकार किया — उन श्रीकृष्ण को मैं प्रणाम करता हूँ।

लाभ

  • वात्सल्य रस की भक्ति का प्रमुख नाम-मंत्र माना जाता है।
  • परंपरा में इसे संतान-सुख व माता-पुत्र स्नेह से जोड़ा जाता है।
  • माताओं द्वारा संतान के कल्याण हेतु जप प्रचलित है।
  • मन में सरलता व शिशु-भाव जगने की मान्यता है।

अनुशंसित जप संख्या

जप संख्या: प्रतिदिन 108 बार (एक माला)।

माला: तुलसी माला

उत्तम समय: प्रातः व संध्या

जप का उत्तम समय

जन्माष्टमी व नन्दोत्सव परबुधवार व एकादशी कोसंतान के कल्याण के संकल्प के साथप्रातः-संध्या नित्य पूजा में

जप विधि (चैंटिंग मेथड)

बालकृष्ण की प्रतिमा या पालने के समक्ष दीपक जलाकर, माखन-मिश्री का भोग अर्पित कर तुलसी माला से 108 बार जप करें। परंपरा में माताएँ इसे संतान के कल्याण के संकल्प के साथ जपती हैं। जप के समय यशोदा की गोद में बालकृष्ण का ध्यान करने की परंपरा है — बल का नहीं, स्नेह का ध्यान।

प्रामाणिकता व स्रोत

स्थिति✓ संपूर्ण
स्रोत परंपराश्री कृष्ण अष्टोत्तर शतनामावली (नारद पञ्चरात्र) — सम-अर्थी नाम 9 "ॐ यशोदावत्सलाय नमः" · श्री गोपाल सहस्रनाम — यशोदा-मूलक नाम · नोट: ठीक यह शब्द-रूप शतनामावली की सूची में नहीं मिला; यह व्रज-भक्ति परंपरा का संबोधन है
अंतिम अद्यतनजून 2026

देव परिचय

श्री कृष्ण

Lord Krishna

श्री कृष्ण भगवान विष्णु के पूर्णावतार हैं — प्रेम, लीला और गीता-ज्ञान के दाता।

देवता वर्गप्रेम · धर्म · भक्ति · ज्ञान
मुख्य मंत्रॐ क्लीं कृष्णाय नमः
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ॐ यशोदानन्दनाय नमः — सामान्य प्रश्न

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