श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली

śrī lakṣmī aṣṭottara śatanāmāvalī

Shri Lakshmi Ashtottara Shatanamavali (108 Names)

समय
8–10 मिनट
कुल नाम
108
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
शुक्रवार; दीपावली व शरद पूर्णिमा
उद्देश्य:समृद्धि (Prosperity)धन-प्राप्ति (Wealth)सौभाग्य (Good Fortune)
✓ संपूर्ण

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली माँ लक्ष्मी के 108 नामों की सूची है, जो प्रकृति से आरंभ होकर भुवनेश्वरी पर समाप्त होती है। हर नाम "ॐ … नमः" रूप में पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना तथा माला-जप दोनों के लिए उपयुक्त है। पाठ में 8–10 मिनट लगते हैं।

परिचय

माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

स्रोत: पारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — प्रकृति से आरंभ, भुवनेश्वरी पर समाप्त; 16 श्लोकों का स्तोत्र-रूप भी प्रचलित

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली
IASTśrī lakṣmī aṣṭottara śatanāmāvalī
देवतामाँ लक्ष्मी
मूल स्रोतपारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — प्रकृति से आरंभ, भुवनेश्वरी पर समाप्त; 16 श्लोकों का स्तोत्र-रूप भी प्रचलित
शुभ दिनशुक्रवार; दीपावली व शरद पूर्णिमा
पाठ समय8–10 मिनट
कठिनाईसरल (Beginner)

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली माँ लक्ष्मी के 108 नामों की सूची है। यही 108 नाम 16 श्लोकों के स्तोत्र-रूप में भी प्रचलित हैं — "प्रकृतिं विकृतिं विद्यां सर्वभूतहितप्रदाम्" से आरंभ होकर "नमामि भुवनेश्वरीम्" पर समाप्त। नामावली और स्तोत्र दो अलग रचनाएँ नहीं; एक ही सूची है, एक में चतुर्थी विभक्ति (नमः के साथ) और दूसरे में द्वितीया।

सूची की पहली ही जोड़ी बताती है कि यह साधारण धन-स्तुति नहीं है। नाम 1 है प्रकृति और नाम 2 है विकृति — मूल प्रकृति, और उसका विकार-रूप। सांख्य दर्शन की शब्दावली से आरंभ होकर यह सूची लक्ष्मी को धन की देवी नहीं, सृष्टि का मूल तत्त्व कहती है। इसी क्रम में आगे श्रद्धा, विभूति, सुरभि, परमात्मिका, वाच्, बुद्धि, तुष्टि, पुष्टि आते हैं — ये सब वैदिक-दार्शनिक नाम हैं, ऐश्वर्य के नहीं।

कमल का प्रसंग असाधारण रूप से विस्तृत है। नाम 41 से 52 तक लगातार बारह नाम "पद्म" से बनते हैं — पद्मप्रिया, पद्महस्ता, पद्माक्षी, पद्मसुन्दरी, पद्मोद्भवा, पद्ममुखी, पद्मनाभप्रिया, पद्ममालाधरा, पद्मिनी, पद्मगन्धिनी। एक ही प्रतीक को इतने कोणों से खोलना — प्रिय, हाथ, नेत्र, सौंदर्य, उत्पत्ति, मुख, गंध — इस नामावली की अपनी शैली है।

तीन नाम बहुत ठोस हैं और यही इसके व्यावहारिक प्रयोग का आधार बनते हैं — नाम 72 दारिद्र्यनाशिनी, नाम 101 दारिद्र्यध्वंसिनी तथा नाम 103 सर्वोपद्रववारिणी। स्तोत्र-रूप की फलश्रुति स्वयं इसे "दारिद्र्यमोचन" स्तोत्र कहती है और भृगुवार अर्थात शुक्रवार को इसका पाठ बताती है — यही कारण है कि लक्ष्मी-उपासना में शुक्रवार का विशेष स्थान है।

और अंत चौंकाने वाला है। एक वैष्णव-श्री सूची, जो विष्णुपत्नी (98) और नारायणसमाश्रिता (100) कहती आई है, अंतिम पाँच नामों में शाक्त हो जाती है — नवदुर्गा (104), महाकाली (105), ब्रह्माविष्णुशिवात्मिका (106), त्रिकालज्ञानसम्पन्ना (107) और भुवनेश्वरी (108)। यानी सूची लक्ष्मी को अंत में विष्णु की शक्ति भर नहीं, स्वयं आदिशक्ति कह देती है।

नाम सूची (Name List)

लिपि:

प्रकृति-स्वरूप व वैदिक नाम (नाम 1–27)

  1. 1.
    ॐ प्रकृत्यै नमःमूल प्रकृति-स्वरूपा
  2. 2.
    ॐ विकृत्यै नमःप्रकृति के विकार-रूप में प्रकट होने वाली
  3. 3.
    ॐ विद्यायै नमःविद्या-स्वरूपा
  4. 4.
    ॐ सर्वभूतहितप्रदायै नमःसमस्त प्राणियों का हित करने वाली
  5. 5.
    ॐ श्रद्धायै नमःश्रद्धा-स्वरूपा
  6. 6.
    ॐ विभूत्यै नमःविभूति अर्थात ऐश्वर्य-स्वरूपा
  7. 7.
    ॐ सुरभ्यै नमःसुरभि; कामधेनु-स्वरूपा
  8. 8.
    ॐ परमात्मिकायै नमःपरमात्म-स्वरूपा
  9. 9.
    ॐ वाचे नमःवाणी-स्वरूपा
  10. 10.
    ॐ पद्मालयायै नमःकमल में निवास करने वाली
  11. 11.
    ॐ पद्मायै नमःकमल-स्वरूपा
  12. 12.
    ॐ शुचये नमःपवित्र
  13. 13.
    ॐ स्वाहायै नमःस्वाहा-स्वरूपा (देव-आहुति का मंत्र)
  14. 14.
    ॐ स्वधायै नमःस्वधा-स्वरूपा (पितृ-आहुति का मंत्र)
  15. 15.
    ॐ सुधायै नमःअमृत-स्वरूपा
  16. 16.
    ॐ धन्यायै नमःधन्या
  17. 17.
    ॐ हिरण्मय्यै नमःस्वर्णमयी
  18. 18.
    ॐ लक्ष्म्यै नमःलक्ष्मी
  19. 19.
    ॐ नित्यपुष्टायै नमःनित्य पुष्ट रहने वाली
  20. 20.
    ॐ विभावर्यै नमःप्रकाशमयी
  21. 21.
    ॐ अदित्यै नमःअदिति-स्वरूपा
  22. 22.
    ॐ दित्यै नमःदिति-स्वरूपा
  23. 23.
    ॐ दीपायै नमःदीप-स्वरूपा
  24. 24.
    ॐ वसुधायै नमःवसुधा अर्थात पृथ्वी-स्वरूपा
  25. 25.
    ॐ वसुधारिण्यै नमःधन की धारा बरसाने वाली
  26. 26.
    ॐ कमलायै नमःकमला
  27. 27.
    ॐ कान्तायै नमःकमनीय, प्रिया

क्षीरसागर, अनुग्रह व पद्म-नाम (नाम 28–54)

  1. 28.
    ॐ कामाक्ष्यै नमःकामना पूर्ण करने वाले नेत्रों वाली
  2. 29.
    ॐ क्षीरोधसम्भवायै नमःक्षीरसागर से उत्पन्न
  3. 30.
    ॐ अनुग्रहप्रदायै नमःअनुग्रह प्रदान करने वाली
  4. 31.
    ॐ बुद्धये नमःबुद्धि-स्वरूपा
  5. 32.
    ॐ अनघायै नमःपाप-रहित
  6. 33.
    ॐ हरिवल्लभायै नमःहरि को प्रिय
  7. 34.
    ॐ अशोकायै नमःशोक-रहित
  8. 35.
    ॐ अमृतायै नमःअमृत-स्वरूपा
  9. 36.
    ॐ दीप्तायै नमःदेदीप्यमान
  10. 37.
    ॐ लोकशोकविनाशिन्यै नमःलोक का शोक नष्ट करने वाली
  11. 38.
    ॐ धर्मनिलयायै नमःधर्म में निवास करने वाली
  12. 39.
    ॐ करुणायै नमःकरुणा-स्वरूपा
  13. 40.
    ॐ लोकमात्रे नमःसमस्त लोकों की माता
  14. 41.
    ॐ पद्मप्रियायै नमःकमल जिन्हें प्रिय है
  15. 42.
    ॐ पद्महस्तायै नमःजिनके हाथ में कमल है
  16. 43.
    ॐ पद्माक्ष्यै नमःकमल-सदृश नेत्रों वाली
  17. 44.
    ॐ पद्मसुन्दर्यै नमःकमल के समान सुंदर
  18. 45.
    ॐ पद्मोद्भवायै नमःकमल से उत्पन्न
  19. 46.
    ॐ पद्ममुख्यै नमःकमल-सदृश मुख वाली
  20. 47.
    ॐ पद्मनाभप्रियायै नमःपद्मनाभ अर्थात विष्णु को प्रिय
  21. 48.
    ॐ रमायै नमःरमा; जो सदा रमण करती हैं
  22. 49.
    ॐ पद्ममालाधरायै नमःकमलों की माला धारण करने वाली
  23. 50.
    ॐ देव्यै नमःदेवी
  24. 51.
    ॐ पद्मिन्यै नमःकमलिनी-स्वरूपा
  25. 52.
    ॐ पद्मगन्धिन्यै नमःकमल की सुगंध वाली
  26. 53.
    ॐ पुण्यगन्धायै नमःपुण्यमयी सुगंध वाली
  27. 54.
    ॐ सुप्रसन्नायै नमःअत्यंत प्रसन्न

सौम्य स्वरूप व दारिद्र्य-नाश (नाम 55–81)

  1. 55.
    ॐ प्रसादाभिमुख्यै नमःप्रसाद देने को उन्मुख
  2. 56.
    ॐ प्रभायै नमःप्रभा-स्वरूपा
  3. 57.
    ॐ चन्द्रवदनायै नमःचंद्र-सदृश मुख वाली
  4. 58.
    ॐ चन्द्रायै नमःचंद्र-स्वरूपा
  5. 59.
    ॐ चन्द्रसहोदर्यै नमःचंद्रमा की सहोदरा — दोनों समुद्र-मंथन से प्रकट हुए
  6. 60.
    ॐ चतुर्भुजायै नमःचार भुजाओं वाली
  7. 61.
    ॐ चन्द्ररूपायै नमःचंद्र-रूप वाली
  8. 62.
    ॐ इन्दिरायै नमःइंदिरा
  9. 63.
    ॐ इन्दुशीतलायै नमःचंद्रमा के समान शीतल
  10. 64.
    ॐ आह्लादजनन्यै नमःआह्लाद उत्पन्न करने वाली
  11. 65.
    ॐ पुष्ट्यै नमःपुष्टि-स्वरूपा
  12. 66.
    ॐ शिवायै नमःशिवा; कल्याणस्वरूपा
  13. 67.
    ॐ शिवकर्यै नमःकल्याण करने वाली
  14. 68.
    ॐ सत्यायै नमःसत्य-स्वरूपा
  15. 69.
    ॐ विमलायै नमःनिर्मल
  16. 70.
    ॐ विश्वजनन्यै नमःविश्व की जननी
  17. 71.
    ॐ तुष्ट्यै नमःतुष्टि-स्वरूपा
  18. 72.
    ॐ दारिद्र्यनाशिन्यै नमःदरिद्रता का नाश करने वाली
  19. 73.
    ॐ प्रीतिपुष्करिण्यै नमःप्रीति की सरोवर-स्वरूपा
  20. 74.
    ॐ शान्तायै नमःशांत
  21. 75.
    ॐ शुक्लमाल्याम्बरायै नमःश्वेत माला व वस्त्र धारण करने वाली
  22. 76.
    ॐ श्रियै नमःश्री
  23. 77.
    ॐ भास्कर्यै नमःसूर्य के समान प्रकाशमयी
  24. 78.
    ॐ बिल्वनिलयायै नमःबिल्व वृक्ष में निवास करने वाली
  25. 79.
    ॐ वरारोहायै नमःसुंदर स्वरूप वाली
  26. 80.
    ॐ यशस्विन्यै नमःयशस्विनी
  27. 81.
    ॐ वसुन्धरायै नमःवसुंधरा-स्वरूपा

धन-धान्य, विष्णुपत्नी व भुवनेश्वरी पर समापन (नाम 82–108)

  1. 82.
    ॐ उदाराङ्गायै नमःउदार अंगों वाली
  2. 83.
    ॐ हरिण्यै नमःहरिणी; हरि की शक्ति
  3. 84.
    ॐ हेममालिन्यै नमःस्वर्ण-माला धारण करने वाली
  4. 85.
    ॐ धनधान्यकर्यै नमःधन तथा धान्य देने वाली
  5. 86.
    ॐ सिद्धये नमःसिद्धि-स्वरूपा
  6. 87.
    ॐ स्त्रैणसौम्यायै नमःस्त्री-सुलभ सौम्यता वाली
  7. 88.
    ॐ शुभप्रदायै नमःशुभ प्रदान करने वाली
  8. 89.
    ॐ नृपवेश्मगतानन्दायै नमःराजभवन में आनंद-स्वरूपा
  9. 90.
    ॐ वरलक्ष्म्यै नमःवरलक्ष्मी
  10. 91.
    ॐ वसुप्रदायै नमःधन प्रदान करने वाली
  11. 92.
    ॐ शुभायै नमःशुभा
  12. 93.
    ॐ हिरण्यप्राकारायै नमःस्वर्ण के प्राकार अर्थात परकोटे वाली
  13. 94.
    ॐ समुद्रतनयायै नमःसमुद्र की पुत्री
  14. 95.
    ॐ जयायै नमःजया; विजय-स्वरूपा
  15. 96.
    ॐ मङ्गलादेव्यै नमःमंगला देवी
  16. 97.
    ॐ विष्णुवक्षस्स्थलस्थितायै नमःभगवान विष्णु के वक्षःस्थल पर विराजने वाली
  17. 98.
    ॐ विष्णुपत्न्यै नमःभगवान विष्णु की पत्नी
  18. 99.
    ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमःप्रसन्न नेत्रों वाली
  19. 100.
    ॐ नारायणसमाश्रितायै नमःनारायण के आश्रय में रहने वाली
  20. 101.
    ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमःदरिद्रता का ध्वंस करने वाली
  21. 102.
    ॐ देव्यै नमःदेवी
  22. 103.
    ॐ सर्वोपद्रववारिण्यै नमःसमस्त उपद्रवों का निवारण करने वाली
  23. 104.
    ॐ नवदुर्गायै नमःनवदुर्गा-स्वरूपा
  24. 105.
    ॐ महाकाल्यै नमःमहाकाली-स्वरूपा
  25. 106.
    ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमःब्रह्मा, विष्णु व शिव — तीनों की आत्म-स्वरूपा
  26. 107.
    ॐ त्रिकालज्ञानसम्पन्नायै नमःतीनों कालों का ज्ञान रखने वाली
  27. 108.
    ॐ भुवनेश्वर्यै नमःसमस्त भुवनों की ईश्वरी

अर्थ (हिन्दी)

    लाभ

    • स्तोत्र-रूप की फलश्रुति इसे "दारिद्र्यमोचन" स्तोत्र कहती है और शुक्रवार (भृगुवार) को इसका पाठ बताती है — नाम 72, 101 व 103 इसी भाव के हैं।
    • परंपरा में दीपावली, शरद पूर्णिमा तथा प्रत्येक शुक्रवार को लक्ष्मी-पूजन के साथ इन 108 नामों की अर्चना की जाती है।
    • नाम 1–8 (प्रकृति, विकृति, विद्या, श्रद्धा, विभूति…) दार्शनिक हैं, इसलिए यह नामावली केवल धन-कामना नहीं, समग्र समृद्धि व सद्बुद्धि के भाव से पढ़ी जाती है।
    • लक्ष्मी सहस्रनाम की तुलना में यह बहुत छोटी है (8–10 मिनट), अतः नित्य पूजन में सुविधाजनक रहती है।

    कब करें पाठ

    प्रत्येक शुक्रवार को लक्ष्मी पूजन के समयदीपावली तथा शरद पूर्णिमा परवैभव लक्ष्मी व्रत मेंगृह-प्रवेश तथा नए कार्य के शुभारंभ पर

    पाठ विधि

    आरंभ में "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" तीन बार कहें। नामावली-पाठ की परंपरागत विधि अर्चना है — प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ते हुए एक कमल-पुष्प, गुलाब अथवा अक्षत अर्पित करते जाना। यदि यह संभव न हो तो कमलगट्टे की माला लेकर जप किया जा सकता है; 108 नाम पूरे होने पर ठीक एक माला पूर्ण होती है। पाठ लगभग 8–10 मिनट में पूर्ण होता है। स्तोत्र-रूप की फलश्रुति विशेष रूप से शुक्रवार को तथा प्रातःकाल पाठ करने का विधान बताती है, और यह भी कि पाठ करते समय देवी का सर्वाभरण-भूषित रूप ध्यान में रखा जाए। अंत में लक्ष्मी चालीसा अथवा कनकधारा स्तोत्र पढ़कर आरती करने की परंपरा है।

    प्रामाणिकता व स्रोत

    स्थिति✓ संपूर्ण
    मूल ग्रंथपारंपरिक लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र (16 श्लोक) — मूल ग्रंथ-संदर्भ अनिश्चित
    स्रोत परंपराdrikpanchang.com — देवी लक्ष्मी की अष्टोत्तर शतनामावली (आधार सूची; 108 नाम, क्रमांक सहित यंत्रवत् जाँचे गए) · stotranidhi.com — श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् (वही 108 नाम 16 श्लोकों में, "प्रकृतिं विकृतिं विद्यां" से आरंभ) — पद-विच्छेद की स्वतंत्र पुष्टि तथा फलश्रुति का स्रोत · पाठ-भेद दर्ज (चुना नहीं गया, दोनों बताए गए): नाम 28–29 — "कामाक्षी / क्षीरोदसम्भवा" (आधार) बनाम स्तोत्र का "क्षमा / क्षीरोदसम्भवा", जिसका अपना दर्ज पाठान्तर "कामाक्षीं क्रोधसम्भवाम्" है। · फलश्रुति के आधार पर: स्तोत्र स्वयं को "दारिद्र्यमोचन" कहता है तथा भृगुवार (शुक्रवार) व प्रातःकाल पाठ का विधान बताता है। · ⚠️ मूल ग्रंथ व अध्याय-क्रमांक किसी उपलब्ध स्रोत में नहीं मिला, अतः कोई ग्रंथ-नाम नहीं दिया गया। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से अनूदित।
    रचयितापारंपरिक
    अंतिम अद्यतनजून 2026

    संपादकीय टिप्पणी: यह अष्टलक्ष्मी की सूची नहीं है — अष्टलक्ष्मी (आदि, धान्य, धैर्य, गज, सन्तान, विजय, विद्या व धन लक्ष्मी) की अपनी अलग नामावली है; दोनों को एक मानना सामान्य भ्रम है। नाम 28–29 पर स्रोतों में वास्तविक पाठ-भेद है: एक परंपरा "कामाक्षी" पढ़ती है, दूसरी "क्षमा" (और उसका दर्ज पाठान्तर "कामाक्षीं क्रोधसम्भवाम्" है) — यहाँ आधार-पाठ रखा गया और भेद FAQ में दर्ज है, किसी एक को ग़लत नहीं कहा गया। मूल ग्रंथ अनिश्चित है: स्तोत्र-रूप की फलश्रुति इसे "दारिद्र्यमोचन" कहती है, पर किसी स्रोत ने पुराण व अध्याय-क्रमांक नहीं दिया, इसलिए यहाँ कोई ग्रंथ-नाम नहीं गढ़ा गया।

    देव परिचय

    माँ लक्ष्मी

    Goddess Lakshmi

    माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।

    देवता वर्गधन · समृद्धि · ऐश्वर्य · सौभाग्य
    वाहनउल्लू
    संबंधित वारशुक्रवार
    मुख्य मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
    माँ लक्ष्मी के पाठ
    सभी पाठ देखें

    श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली — सामान्य प्रश्न

    माँ लक्ष्मी भक्ति संग्रह

    आरती, चालीसा, मंत्र, स्तोत्र, अष्टकम, सहस्रनाम और अन्य भक्ति पाठ